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  1. क्या कैलिबर माइनिंग के शेयर आएंगे आपके खाते में, या लगेगी निराशा हाथ? अलॉटमेंट स्टेटस ऐसे करें चेक

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क्या कैलिबर माइनिंग के शेयर आएंगे आपके खाते में, या लगेगी निराशा हाथ? अलॉटमेंट स्टेटस ऐसे करें चेक

Namita Shukla

5 min read | अपडेटेड July 22, 2026, 09:54 IST

सारांश

कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के आईपीओ को बोली के तीसरे और अंतिम दिन यानी कि 21 जुलाई को 146.64 गुना सब्सक्राइब किया गया। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ के तहत की गई 78,35,821 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 114,90,37,400 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं।

कैलिबर माइनिंग आईपीओ

कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स आईपीओ का सब्सक्रिप्शन स्टेटस कैसे पता करें? (Photo: Shutterstock)

कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स आईपीओ में अगर आपने दांव लगाया है, तो आपके खाते में शेयर आएंगे या नहीं, इसका फैसला आज देर शाम तक हो जाएगा। कैलिबर माइनिंग आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस आज फाइनलाइज हो जाएगा। एकीकृत माइनिंग और कोयला लॉजिस्टिक्स सर्विसेज देने वाले कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स आईपीओ 450 करोड़ रुपये का बुक बिल्ड इश्यू है। जिसमें फ्रेश शेयरों के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल कंपोनेंट भी शामिल है। इसमें 400 करोड़ रुपये के 94 लाख फ्रेश शेयर और 50 करोड़ के 12 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल पर हैं। इस आईपीओ का सब्सक्रिप्शन विंडो 17 से 21 जुलाई तक खुला था, जबकि आज यानी कि 22 जुलाई को इसका अलॉटमेंट फाइनलाइज कर दिया जाएगा। कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) दोनों पर लिस्ट होंगे। फ्रेश इश्यू से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज चुकाने, पूंजीगत व्यय, उपकरणों की खरीद और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाना है। अलॉटमेंट स्टेटस कहां और कैसे चेक करें-

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BSE पर कैसे चेक करें अलॉटमेंट स्टेटस

  • BSE वेबसाइट पर स्टेटस चेक करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
  • इश्यू टाइप में 'Equity' सेलेक्ट करें।

  • इश्यू नेम के लिए ड्रॉपडाउन मेनू से आईपीओ का नाम सेलेक्ट करें।

  • इसके बाद अपना एप्लिकेशन नंबर या PAN दर्ज करें।

  • अब I'm not a robot पर चेक करने के बाद Search पर क्लिक करें।

NSE पर कैसे चेक करें अलॉटमेंट स्टेटस

  • NSE वेबसाइट पर IPO अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
  • इसके Equity & SME IPO bid details' को सेलेक्ट करें।

  • इश्यू सिंबल के लिए ड्रॉपडाउन लिस्ट से कंपनी नाम सेलेक्ट करें।

  • इसके बाद PAN नंबर और एप्लिकेशन नंबर दर्ज करें।

  • अब Submit बटन पर क्लिक करें।

Kfin Technologies पर कैसे चेक करें अलॉटमेंट स्टेटस

  • रजिस्ट्रार की वेबसाइट के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
  • ड्रॉपडाउन मेनू से कंपनी का नाम सेलेक्ट करें।

  • निवेशकों को अब PAN, एप्लिकेशन नंबर या DP क्लाइंट ID जैसी जानकारी भरनी होगी।

  • इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।

कैसा रहा सब्सक्रिप्शन?

कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के आईपीओ को बोली के तीसरे और अंतिम दिन यानी कि 21 जुलाई को 146.64 गुना सब्सक्राइब किया गया। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ के तहत की गई 78,35,821 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 114,90,37,400 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टरों की कैटेगरी को 267.36 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जबकि QIBs के सेगमेंट को 240.7 गुना सब्सक्राइब किया गया। वहीं, रिटेल इन्वेस्टरों के सेगमेंट को 41.15 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इसके पहले, कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स लिमिटेड ने गुरुवार को एंकर इन्वेस्टरों से 135 करोड़ रुपये जुटाए थे।

आईपीओ से जुड़ी अन्य जरूरी डीटेल्स

कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 402-424 रुपये प्रति शेयर तय किया। न्यूनतम आवेदन 35 शेयरों का रखा गया। कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स मुख्य रूप से ओपन-कास्ट कोयला खनन, ओवरबर्डन रिमूवल, कोयला परिवहन और एंड-टू-एंड माइन लॉजिस्टिक्स सर्विसेज उपलब्ध कराती है। कंपनी का परिचालन प्रमुख रूप से कोल इंडिया ग्रुप की सहायक कंपनियों और अन्य सरकारी और निजी ग्राहकों के साथ जुड़ा हुआ है।

कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी का कारोबार मजबूत रहा। रिस्टेटेड फाइनेंशियल आंकड़ों के अनुसार कंपनी का रेवेन्यू, EBITDA और नेट प्रॉफिट तीनों में वृद्धि दर्ज की गई। FY26 में कंपनी का EBITDA लगभग 437.91 करोड़ रुपये रहा, जबकि शुद्ध लाभ (PAT) 157.90 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी की नेटवर्थ 647.54 करोड़ रुपये और कुल परिसंपत्तियां 2,077.39 करोड़ रुपये रहीं। हालांकि इसी पीरियड में कंपनी का नेट डेट-टू-इक्विटी अनुपात 1.62 गुना रहा, जो यह दर्शाता है कि कारोबार अभी भी पर्याप्त कर्ज पर आधारित है।

कंपनी की ताकत

कंपनी के पास खनन और लॉजिस्टिक्स का एकीकृत बिजनेस मॉडल है, जिससे उसे लंबे समय के अनुबंधों का फायदा मिलता है। भारी मशीनरी का अपना बेड़ा, परिचालन अनुभव और सरकारी खनन कंपनियों के साथ संबंध कंपनी की प्रमुख ताकत माने जाते हैं। हाल के सालों में कंपनी ने अपने कारोबार का दायरा और ऑर्डर बुक दोनों बढ़ाए हैं।

क्या हैं रिस्क फैक्टर्स

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक निवेशकों को इन जोखिमों पर खास ध्यान देना चाहिए-

1- कंपनी की आय कुछ चुनिंदा ग्राहकों पर अत्यधिक निर्भर है। FY26 में शीर्ष तीन ग्राहकों से लगभग 90% राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि सबसे बड़े ग्राहक का योगदान करीब 44% रहा। अगर इनमें से कोई अनुबंध खत्म होता है या रिन्यू नहीं होता, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है।
2- कंपनी पर काफी कर्ज है। FY26 के अंत तक कुल उधारी 1,057 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई, जिससे ब्याज लागत और कैश फ्लो पर दबाव बना रह सकता है।
3- माइनिंग बिजनेस पूरी तरह सरकारी नीतियों, पर्यावरणीय मंजूरियों, खनन पट्टों और नियामकीय स्वीकृतियों पर निर्भर करता है। किसी भी नीति परिवर्तन का सीधा असर कंपनी के परिचालन पर पड़ सकता है।
4- बिजनेस में भारी मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता होती है। डीजल एवं ईंधन की कीमतों में वृद्धि, मशीनरी की खराबी या परियोजनाओं में देरी से परिचालन लागत बढ़ सकती है और प्रॉफिटेबिलिटी प्रभावित हो सकती है।
5- कंपनी पर 458 करोड़ रुपये से अधिक की संभावित देनदारियां भी हैं, जो भविष्य में वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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