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3 min read | अपडेटेड June 30, 2026, 15:06 IST
सारांश
हिंदुस्तान कॉपर ने गुजरात कॉपर प्लांट को फिर से शुरू करने के लिए लोहुम मटेरियल्स के साथ रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के तहत साझेदारी की है। हिन्दुस्तान कॉपर के शेयरों में आज 1-1.5% यानी कि 5-7 रुपये तक की तेजी देखने को मिली।
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हिंदुस्तान कॉपर को झगड़िया परियोजना से ‘नवरत्न’ का दर्जा हासिल करने की उम्मीद (Photo: Shutterstock)
पब्ल्कि सेक्टर की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के निवर्तमान चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजीव कुमार सिंह ने आज कहा कि कंपनी की गुजरात के झगड़िया में 50,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले प्रोजेक्ट से कंपनी की इनकम और रणनीतिक प्रदर्शन मजबूत हो सकता है, जिससे उसे भविष्य में नवरत्न का दर्जा हासिल करने में मदद मिल सकती है। झगड़िया प्रोजेक्ट को गुजरात कॉपर परियोजना (जीसीपी) के नाम से जाना जाता है। यह गुजरात के भरूच में स्थित 50,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली सेकेंडरी कॉपर स्मेल्टर और रिफाइनरी है। हिंदुस्तान कॉपर ने गुजरात कॉपर प्लांट को फिर से शुरू करने के लिए लोहुम मटेरियल्स के साथ रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के तहत साझेदारी की है। हिन्दुस्तान कॉपर के शेयरों में आज 1-1.5% यानी कि 5-7 रुपये तक की तेजी देखने को मिली।
संजीव कुमार सिंह ने कहा, ‘हिंदुस्तान कॉपर के लिए यह प्रोजेक्ट फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और एसेट्स की प्रोडक्टिविटी को मजबूत करने में योगदान दे सकती है। भारत सरकार के लागू ढांचे के अधीन यह प्रोजेक्ट इनकम, प्रॉफिटिबिलिटी, ऑपरेशनल साइज और रणनीतिक प्रदर्शन बढ़ाकर कंपनी को भविष्य में नवरत्न का दर्जा हासिल करने की दिशा में भी मदद कर सकती है।’ अनुपम मिश्रा 1 जुलाई से कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का कार्यभार संभालेंगे। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) खान मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक ‘मिनीरत्न’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (सीपीएसई) है।
लोक उद्यम विभाग द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों को दिया जाने वाला नवरत्न दर्जा कंपनियों को अधिक फाइनेंशियल और ऑपरेशनल स्वायत्तता देता है। इसके तहत कंपनियां सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना अपनी आंतरिक परियोजनाओं में 1,000 करोड़ रुपये या अपनी शुद्ध संपत्ति (नेटवर्थ) के 15% तक निवेश कर सकती हैं। नवरत्न दर्जे के लिए वही केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसई) पात्र होते हैं, जो मिनीरत्न-1 और अनुसूची-‘ए’ श्रेणी के हों और पिछले पांच सालों में से कम से कम तीन सालों में ‘उत्कृष्ट’ या ‘बहुत अच्छा’ समझौता ज्ञापन (एमओयू) मूल्यांकन हासिल कर चुके हों। इसके अलावा, कंपनी को छह निर्धारित प्रदर्शन मानकों (जिनमें शुद्ध संपत्ति पर शुद्ध लाभ, मानव संसाधन लागत और प्रति शेयर आय शामिल हैं) के आधार पर 100 में से कम से कम 60 अंक हासिल करने होते हैं।
झगड़िया कॉपर प्लांट की स्थापना खैतान ग्रुप ने की थी। इसे 2003 में चालू किया गया और मई 2006 में कमर्शियल उत्पादन शुरू हुआ, लेकिन वर्किंग कैपिटल की कमी के कारण सितंबर 2009 में इसका संचालन बंद हो गया। एचसीएल ने 2015 में इस प्लांट की सुरक्षित परिसंपत्तियां 210 करोड़ रुपये में खरीदीं और इसका नाम गुजरात कॉपर परियोजना रखा। अक्टूबर 2016 में यहां फिर से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हुआ।
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