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4 min read | अपडेटेड May 22, 2026, 14:25 IST
सारांश
पिछले 20 सालों में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न देकर मालामाल किया है, लेकिन मुनाफे की इस रेस में अमेरिकी शेयर बाजार ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। फंड्सइंडिया की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बाजार ने 20 साल में निवेशकों के 1 लाख रुपये को 17 गुना तक बढ़ा दिया है।

लंबी अवधि के इनवेस्टमेंट में सोने के मुकाबले अमेरिकी और भारतीय शेयर बाजार ने दिया बंपर रिटर्न। | Image: Shutterstock
पिछले 20 सालों में सोने की ताबड़तोड़ चमक ने निवेशकों को खूब निहाल किया है। सर्राफा बाजार में सोने के दामों में आई तेजी से लोग बेहद खुश हैं, जहां महज 1 लाख रुपये का निवेश आज 15 लाख रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम फंड बन चुका है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मुनाफे की इस रेस में एक ऐसा सुपरहिट एसेट भी मौजूद है जिसने रिटर्न के मामले में सोने को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है और पैसे को 17 गुना तक बढ़ा दिया है। अमूमन लोग जिसे ज्यादा रिस्क वाला मानकर दूर भागते हैं, उसी एसेट ने चुपचाप वेल्थ क्रिएशन का नया इतिहास रच दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन सा है वह निवेश माध्यम जिसके सामने गोल्ड की चमक भी फीकी पड़ गई है।
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म फंड्सइंडिया की एक ताजा रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पिछले 20 से 35 सालों के अलग-अलग एसेट्स के रिटर्न से जुड़े आंकड़ों का गहरा विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं, जो यह साफ बताते हैं कि सही जगह पर और सही समय के लिए टिका रहने वाला एक आम निवेशक कैसे लंबी अवधि में करोड़पति बन सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित माने जाने वाले कई पारंपरिक निवेश माध्यम इस रेस में शेयर बाजार से बहुत पीछे छूट गए हैं।
पिछले 20 सालों के दौरान सोने ने निवेशकों को मालामाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सोने ने इन 20 सालों में सालाना 14.6 पर्सेंट का शानदार रिटर्न दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति ने 20 साल पहले सोने में 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उसकी वैल्यू बढ़कर 15 लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी होती। लेकिन सोने की यह तूफानी रफ्तार भी अमेरिकी शेयर बाजार को नहीं पछाड़ पाई। अमेरिकी बाजारों ने पिछले 20 सालों में सालाना 15.2 पर्सेंट का धमाकेदार रिटर्न दिया है और निवेशकों के 1 लाख रुपये को बढ़ाकर 17 गुना तक कर दिया है।
अगर हम अपने घरेलू यानी भारतीय शेयर बाजार की बात करें, तो निफ्टी 50 ने जुलाई 1990 से लेकर अब तक यानी लगभग 35 सालों के सफर में कमाल का प्रदर्शन किया है। इस लंबी अवधि के दौरान बाजार ने कई बड़े उतार-चढ़ाव, मंदी और संकट के दौर देखे हैं, लेकिन इसके बावजूद निफ्टी 50 ने हर साल औसतन 13.2 पर्सेंट का शानदार सालाना रिटर्न दिया है। इस रफ्तार के हिसाब से देखें तो 35 साल पहले भारतीय बाजार में लगाया गया 1 लाख रुपये आज बढ़कर 85 लाख रुपये का बड़ा फंड बन चुका है, यानी निवेशकों का पैसा करीब 86 गुना बढ़ गया है। वहीं पिछले 20 सालों की बात करें तो भारतीय शेयर बाजार ने करीब 11.4 पर्सेंट का सालाना रिटर्न दिया है, जिससे निवेशकों का पैसा 8.7 गुना बढ़ा है।
शेयर बाजार के भीतर भी अगर अलग-अलग कैपेसिटी वाली कंपनियों को देखा जाए, तो मझोली और छोटी कंपनियों ने रिटर्न के मामले में बाजी मारी है। मिड-कैप सेगमेंट ने पिछले 20 सालों में 14.6 पर्सेंट का सालाना रिटर्न दिया है और इनवेस्टर्स के पैसे को 15 गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया है। वहीं स्मॉल-कैप सेगमेंट ने 12.7 पर्सेंट का शानदार रिटर्न देकर पैसे को करीब 11 गुना किया है। इसके मुकाबले लार्ज-कैप कंपनियों ने 11.8 पर्सेंट का रिटर्न दिया है और वहां पैसा 9 गुना बढ़ा है। इसके विपरीत पारंपरिक निवेश जैसे जमीन-जायदाद यानी प्रॉपर्टी से पिछले 20 सालों में सिर्फ 7.9 पर्सेंट का सालाना रिटर्न मिला है। वहीं डेट इंस्ट्रूमेंट्स से मिलने वाला रिटर्न महज 7.5 पर्सेंट से 7.6 पर्सेंट के दायरे में ही सिमट कर रह गया है।
यह रिपोर्ट साफ तौर पर कहती है कि शेयर बाजार में कम समय यानी 6 महीने से लेकर 3 साल तक के लिए पैसा लगाना काफी रिस्क भरा हो सकता है और इसमें निवेशकों को घाटा भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि जो भी निवेशक भारतीय बाजार में 7 साल या उससे ज्यादा समय के लिए टिके रहे, उन्हें नुकसान होने की आशंका न के बराबर रही है और उन्हें हमेशा बंपर मुनाफा ही मिला है। इसलिए बाजार में धैर्य बनाए रखना ही अमीर बनने का सबसे बड़ा फॉर्मूला है।
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