मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड February 19, 2026, 19:25 IST
सारांश
फरवरी 2026 के पहले 15 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय आईटी सेक्टर से 10,956 करोड़ रुपये की निकासी की है। एआई तकनीक से होने वाले बदलावों के डर से निवेशक इस सेक्टर में अपना निवेश कम कर रहे हैं। इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स में पिछले एक महीने में 16 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच भारतीय आईटी सेक्टर के शेयरों में देखी जा रही गिरावट।
भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बिकवाली का तांडव देखने को मिला है। हालांकि दिन की शुरुआत अच्छी हुई थी लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा बाजार पर भालुओं (Bears) की पकड़ मजबूत होती गई। सेंसेक्स अपनी शुरुआती बढ़त खोते हुए 1,100 अंकों से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी 50 ने 25,500 का महत्वपूर्ण स्तर भी छोड़ दिया। बाजार में मचे इस हाहाकार ने निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा कर दिए हैं। आज लगभग सेक्टर में बिकवाली देखने को मिल रही है।
बता दें कि भारतीय IT सेक्टर के लिए फरवरी का महीना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई (FPI) ने 1 फरवरी से 15 फरवरी के बीच करीब 10,956 करोड़ रुपये के आईटी शेयर बेच दिए हैं। यह बिकवाली जनवरी 2026 में हुई 1,835 करोड़ रुपये की निकासी के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। निवेशकों के इस रुख की सबसे बड़ी वजह AI तकनीक के कारण आईटी सेक्टर में आने वाले संभावित बदलावों को माना जा रहा है।
लगातार हो रही इस बिकवाली के कारण आईटी शेयरों में एफपीआई निवेश का कुल मूल्य काफी घट गया है। जनवरी के अंत में यह निवेश 5,33,953 करोड़ रुपये था जो 15 फरवरी 2026 तक करीब 16 पर्सेंट गिरकर 4,48,938 करोड़ रुपये रह गया है। इसका सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिखा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स पिछले तीन महीनों में 12 पर्सेंट और केवल पिछले एक महीने के भीतर 16 पर्सेंट से ज्यादा टूट चुका है।
बाजार में यह डर बढ़ रहा है कि एआई तकनीक पारंपरिक सॉफ्टवेयर और सास (SaaS) बिजनेस मॉडल को बदल सकती है। खासकर 'एजेंटिक एआई' के तेजी से बढ़ते कदम उन आईटी सेवाओं के लिए खतरा बन सकते हैं जो अब तक बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती पर निर्भर रही हैं। निवेशकों को लगता है कि इससे कंपनियों के रेवेन्यू यानी राजस्व की बढ़त पर बुरा असर पड़ सकता है।
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) का कहना है कि मौजूदा वैल्युएशन को देखकर लगता है कि निवेशक अब भविष्य में होने वाली कमाई यानी फ्री कैश फ्लो (FCF) की बढ़त को कम आंक रहे हैं। एक महीने पहले तक जहां 6-7 पर्सेंट ग्रोथ की उम्मीद थी अब वह घटकर 4-6 पर्सेंट रह गई है। यूबीएस के मुताबिक आईटी कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव करने की जरूरत होगी।
वहीं जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने नोट किया है कि आईटी सेक्टर लगातार तीसरे साल (2023-25) औसत से कम ग्रोथ के दौर में है। उनके विश्लेषण के अनुसार अगर यही सुस्ती आगे भी बनी रहती है तो मौजूदा वैल्युएशन में 10 पर्सेंट तक की और गिरावट आने की संभावना है। हालांकि 30 पर्सेंट से ज्यादा की बड़ी गिरावट तभी आएगी जब भविष्य में ग्रोथ पूरी तरह से शून्य हो जाए। फिलहाल इस सेक्टर में फ्री कैश फ्लो और डिविडेंड यील्ड उसी लेवल पर पहुंच गए हैं जो कोरोना काल या 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय देखे गए थे।
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