मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड December 28, 2025, 16:43 IST
सारांश
साल 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली का गवाह बना। इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बाजार से करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये निकाले, जिसने 2022 के पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। हालांकि घरेलू निवेशकों और कर्ज बाजार में बढ़ते निवेश ने बाजार को सहारा देने का काम किया है।

विदेशी निवेशकों ने साल 2025 में भारतीय इक्विटी बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2025 एक ऐसी याद छोड़कर जा रहा है जिसे कोई भी निवेशक दोहराना नहीं चाहेगा। इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी मार्केट से जिस रफ्तार से पैसा निकाला है वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। आंकड़ों की मानें तो यह अब तक का सबसे खराब साल साबित हुआ है। विदेशी निवेशकों ने करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये बाजार से खींच लिए जिससे दलाल स्ट्रीट पर काफी दबाव महसूस किया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विदेशी निवेशकों में यह भगदड़ क्यों मची और क्या 2026 की नई सुबह उनके लिए वापसी का कोई संदेश लेकर आएगी। इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें वैश्विक और घरेलू दोनों कारणों पर गौर करना होगा।
इस बड़ी निकासी के पीछे कोई एक वजह नहीं थी बल्कि कई वैश्विक कारणों ने मिलकर बाजार का माहौल बिगाड़ा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और डॉलर का लगातार मजबूत होना सबसे बड़ा कारण रहा। जब अमेरिका जैसे सुरक्षित बाजार में बिना जोखिम के अच्छा रिटर्न मिलने लगा तो बड़े निवेशकों ने भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां लगाना बेहतर समझा। इसके अलावा अमेरिका में लगने वाले संभावित व्यापारिक शुल्क और दुनिया भर में चल रहे तनाव ने भी निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया। भारतीय बाजार में शेयरों की कीमतें यानी वैल्युएशन भी काफी ज्यादा हो गई थी जिसे देखते हुए विदेशी फंड्स ने मुनाफावसूली करना ही सही समझा।
साल 2025 की यह निकासी कितनी बड़ी है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसने 2022 के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। साल 2022 में 1.21 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी जबकि 2025 में यह आंकड़ा 1.58 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। पूरे साल में सिर्फ 4 महीने ऐसे रहे जब विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की जबकि बाकी 8 महीने वे सिर्फ बिकवाली करते नजर आए। हालांकि शेयर बाजार से हाथ खींचने के बावजूद भारतीय कर्ज बाजार में उनका भरोसा बना रहा। विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय डेट मार्केट में करीब 59,000 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है जिसकी बड़ी वजह भारतीय सरकारी बॉन्ड्स का ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होना है।
विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह से ताश के पत्तों की तरह नहीं बिखरा और इसका पूरा क्रेडिट हमारे घरेलू संस्थागत निवेशकों और छोटे रिटेल निवेशकों को जाता है। आम लोगों ने एसआईपी के जरिए बाजार में पैसा लगाना जारी रखा और बिकवाली के दबाव को कम किया। अगर सेक्टर की बात करें तो बिकवाली का सबसे ज्यादा असर फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सेक्टर पर दिखा। अमेरिका में विकास की चिंता और ब्याज दरों के दबाव की वजह से इन क्षेत्रों से भारी पैसा निकाला गया। दूसरी तरफ हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में विदेशी निवेशकों की रुचि अब भी बनी हुई है।
बाजार के एक्सपर्ट्स को पूरा भरोसा है कि 2026 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। ऐसी उम्मीद है कि जब अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते फाइनल हो जाएंगे और वहां ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होगा तो डॉलर कमजोर पड़ेगा। डॉलर के कमजोर होते ही विदेशी निवेशक फिर से भारत जैसे बाजारों का रुख करेंगे। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और कंपनियों के सुधरते मुनाफे उन्हें दोबारा अपनी ओर खींचने के लिए काफी होंगे।
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