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डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में क्यों आज आई बंपर तेजी? सरकारी स्कीम के ऐलान ने बढ़ाए भाव

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड July 16, 2026, 09:51 IST

सारांश

डिक्सन टेक के शेयरों में 6% से ज्यादा यानी कि करीब 860 रुपये प्रति शेयर से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। डिक्सन टेक के शेयर 14,512 रुपये पर ट्रेड होते दिखे। चलिए समझते हैं कि डिक्सन टेक के शेयरों में आज यह तेजी देखने को क्यों मिल रही है।

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डिक्सन टेक्नोलॉजीज

डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में आज क्यों दिख रही बंपर तेजी? (Photo: Shutterstock)

डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में आज दमदार तेजी देखने को मिल रही है। मार्केट खुलते ही डिक्सन के शेयर ग्रीन में ही नजर आए हैं। सुबह 9:30 बजे के आस-पास डिक्सन टेक के शेयरों में 6% से ज्यादा यानी कि करीब 860 रुपये प्रति शेयर से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। डिक्सन टेक के शेयर 14,512 रुपये पर ट्रेड होते दिखे। चलिए समझते हैं कि डिक्सन टेक के शेयरों में आज यह तेजी देखने को क्यों मिल रही है। दरअसल बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने, मोबाइल फोन का प्रोडक्शन बढ़ाने और ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक मैनुफैक्चरिंग सेंटर के तौर पर स्थिति मजबूत करने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के खर्च वाली दो बड़े विनिर्माण कार्यक्रमों को मंजूरी दी।

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सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैनुफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के 'सेमीकॉन 2.0' प्रोग्राम को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, मोबाइल फोन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने और लोकल वैल्यू क्रिएशन को मजूबूत करने के मकसद से 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण’ योजना को भी मंजूरी दी गई है। सेमीकंडक्टर प्रोग्राम ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के पहले चरण पर आधारित है। यह छह मुख्य क्षेत्रों... चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और मटीरियल, फैब्रिकेशन सुविधाएं, एडवांस्ड पैकेजिंग और टेस्टिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट साथ ही टैलेंट डेवलपमेंट पर ध्यान देगा।

क्यों दिखी डिक्सन के शेयरों में तेजी?

सरकार के इस ऐलान का असर आज डिक्सन टेक के शेयरों पर देखने को मिल रहा है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनी है। 1993 में स्थापित इस कंपनी का मुख्यालय नोएडा, उत्तर प्रदेश में है। यह स्मार्टफोन, टीवी, वॉशिंग मशीन और लाइटिंग जैसे प्रोडक्ट्स सैमसंग और श्याओमी जैसे बड़े ब्रांड्स के लिए बनाती है।

क्या है सरकार का प्लान?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘इस प्रोग्राम के अंत तक हम स्वदेशी चिप के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।’ सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और योजना अवधि के दौरान दो लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन होगा। वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ को भी मंजूरी दी है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक यानी पांच सालों के लिए विनिर्माताओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) दिए जाएंगे। पात्र मोबाइल फोन की बिक्री पर प्रोत्साहन 2.25% से 5% तक होंगे। साथ ही मुख्य कलपुर्जे की घरेलू खरीद और उत्पाद डिजाइन और शोध में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि मोबाइल फोन योजना से योजना अवधि के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपये का कुल उत्पादन होगा, निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। भारत मोबाइल फोन विनिर्माण के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अब देश में उपयोग होने वाले 99.2% मोबाइल फोन यहीं बनते हैं। 2025 में मोबाइल फोन भारत का सबसे अधिक निर्यात होने वाला उत्पाद बन गया। इसने डीजल और तराशे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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