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4 min read | अपडेटेड April 15, 2026, 11:49 IST
सारांश
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आज शेयर बाजार में रौनक लौट आई है। ब्रेंट क्रूड के 95 डॉलर के नीचे आने से तेल, पेंट और एयरलाइन कंपनियों के शेयर्स में जबरदस्त उछाल देखा गया।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच शेयर बाजार में दिखी जोरदार हरियाली।
बुधवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी सुकून भरा दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने बाजार में नई जान फूंक दी है। जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने और वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई को लेकर डर खत्म होने से उन कंपनियों के शेयर्स में जबरदस्त तेजी देखी गई, जिनका काम पूरी तरह से कच्चे तेल पर निर्भर है। सुबह के कारोबार में ही तेल मार्केटिंग कंपनियों, एविएशन, पेंट और टायर सेक्टर के स्टॉक्स में बड़ी खरीदारी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड का भाव 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसलने से निवेशकों का भरोसा लौटा है और बाजार ने पिछले कुछ दिनों के घाटे की भरपाई की है। यह तेजी उस वक्त आई है जब लोग महंगाई और सप्लाई चैन की दिक्कतों को लेकर परेशान थे।
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बातचीत शुरू होने की उम्मीदों के बाद आई है। इससे बाजार को लगा कि तेल की सप्लाई में कोई बड़ी रुकावट नहीं आएगी। इसी वजह से तेल का भाव लगातार दो दिनों से गिर रहा है। भारत के लिए यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि हम अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगवाते हैं। जब भी कच्चा तेल सस्ता होता है, तो कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत कम हो जाती है और उनका नेट प्रॉफिट बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसी का असर आज दलाल स्ट्रीट पर साफ देखने को मिला, जहां चौतरफा खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
तेल की कीमतों में कमी का सबसे सीधा और बड़ा असर तेल मार्केटिंग कंपनियों यानी ओएमसी पर देखने को मिला है। बुधवार को भारत पेट्रोलियम यानी बीपीसीएल के शेयर्स 4.4 पर्सेंट से ज्यादा उछल गए। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम में लगभग 4.7 पर्सेंट और इंडियन ऑयल में 2.9 पर्सेंट की बढ़त देखी गई। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल के दाम गिरने से इन कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन में काफी सुधार होता है। जब तेल महंगा होता है, तो इन कंपनियों पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि वे तुरंत पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ा पातीं। अब तेल सस्ता होने से इनके ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में सुधार आने की पूरी उम्मीद है, जिससे कंपनी के रेवेन्यू में भी इजाफा होगा।
हवाई जहाज चलाने वाली कंपनियों के लिए भी आज का दिन काफी शानदार रहा। इंटरग्लोब एविएशन यानी इंडिगो के शेयर निफ्टी 50 इंडेक्स पर टॉप गेनर बनकर उभरे और इनमें 4.7 पर्सेंट की तेजी आई। किसी भी एयरलाइन कंपनी के लिए एविऐशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ सबसे बड़ा खर्चा होता है। यह खर्चा उनके कुल ऑपरेशनल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। कच्चे तेल के दाम गिरने का मतलब है कि आने वाले समय में एटीएफ सस्ता होगा, जिससे एयरलाइन्स के खर्चों में कमी आएगी और उनका नेट प्रॉफिट बढ़ेगा। इसी उम्मीद में निवेशकों ने आज एविएशन सेक्टर में जमकर पैसा लगाया और शेयर्स में खरीदारी की।
सिर्फ तेल और हवाई जहाज ही नहीं, बल्कि पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों के चेहरों पर भी मुस्कान लौटी है। एशियन पेंट के शेयर 2.4 पर्सेंट चढ़े, वहीं बर्जर पेंट और कंसाई नेरोलैक में भी अच्छी तेजी रही। पेंट बनाने में सॉल्वेंट्स और रेजिन्स का इस्तेमाल होता है जो कच्चे तेल से ही बनते हैं। इसी तरह टायर बनाने वाली अपोलो टायर्स और सीएट जैसी कंपनियों के शेयर्स 2 से 3.5 पर्सेंट तक बढ़े। टायर बनाने में लगने वाला सिंथेटिक रबर भी कच्चे तेल का ही एक बाई-प्रोडक्ट है। कच्चा तेल सस्ता होने से इन सभी कंपनियों की प्रोडक्शन कैपेसिटी और मार्जिन पर पॉजिटिव असर पड़ेगा, जिससे इनके फ्यूचर ग्रोथ की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
शेयर बाजार के बड़े इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में भी आज जोरदार रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स 1200 अंकों से ज्यादा चढ़ गया और निफ्टी ने 24,200 के लेवल को पार कर लिया। आईटी, मेटल और बैंकिंग सेक्टर में भी जमकर खरीदारी हुई। इंडिया विक्स यानी बाजार में उतार-चढ़ाव बताने वाले इंडेक्स में गिरावट आई है, जिसका मतलब है कि अब निवेशक पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 90 से 95 डॉलर के बीच बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में बाजार में यह तेजी जारी रह सकती है। हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि ग्लोबल हालात अभी भी नाजुक हैं और जियोपॉलिटिकल खबरों पर नजर रखना जरूरी है।
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