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Cipla Q4 Results: मुनाफे में दिखी थोड़ी सुस्ती लेकिन कंपनी बांटेगी भारी डिविडेंड, जानें रिकॉर्ड डेट

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड May 13, 2026, 13:43 IST

सारांश

सिप्ला ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर घटकर 542.51 करोड़ रुपये रहा है। हालांकि, निवेशकों के लिए अच्छी खबर यह है कि कंपनी के बोर्ड ने प्रति शेयर 13 रुपये के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है।

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फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी सिप्ला ने अपने निवेशकों के लिए मुनाफे के हिस्से का किया ऐलान।

भारतीय दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सिप्ला लिमिटेड ने अपने प्रदर्शन का पूरा लेखा-जोखा पेश कर दिया है। बुधवार 13 मई 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में कंपनी ने चौथी तिमाही और पूरे साल के नतीजे जारी किए हैं। बाजार की नजरें कंपनी के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर टिकी हुई थीं और नतीजों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।

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अगर कमाई की बात करें तो चौथी तिमाही में सिप्ला का ऑपरेशन से रेवेन्यू 6,541.20 करोड़ रुपये रहा है। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 6,729.69 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए कंपनी का कुल रेवेन्यू 28,162.59 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। मुनाफे के मोर्चे पर देखें तो इस तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 542.51 करोड़ रुपये रहा है। पिछले साल की समान तिमाही में यह मुनाफा 1,214.14 करोड़ रुपये था। मुनाफे में आई यह गिरावट कुछ विशेष खर्चों और मार्केट की बदलती स्थितियों की वजह से देखी गई है।

मिलेगा तगड़ा डिविडेंड

सिप्ला के बोर्ड ने अपने शेयरधारकों के लिए 13 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। यह डिविडेंड 2 रुपये की फेस वैल्यू वाले शेयर पर दिया जाएगा। कंपनी ने इस डिविडेंड के भुगतान के लिए 5 जून 2026 की रिकॉर्ड डेट तय की है। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों के पास इस तारीख तक कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें सालाना जनरल मीटिंग के बाद 30 दिनों के भीतर डिविडेंड का पैसा मिल जाएगा।

लेबर कोड का पड़ा वित्तीय असर

कंपनी के मुनाफे पर एक बड़ा असर नए लेबर कोड की वजह से पड़ा है। भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के चलते कंपनी की ग्रेच्युटी और छुट्टी की देनदारी बढ़ गई है। इसकी वजह से कंपनी को 275.91 करोड़ रुपये का एकमुश्त अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है। सिप्ला ने इसे अपने वित्तीय नतीजों में एक्सेप्शनल आइटम यानी असाधारण खर्च के रूप में दिखाया है। कंपनी ने बताया है कि कर्मचारियों के वेज की परिभाषा में हुए बदलाव के कारण यह असर पड़ा है। यह एक नॉन-रिकरिंग यानी बार-बार न होने वाला खर्च है।

सिप्ला अपने फ्यूचर को ध्यान में रखते हुए लगातार विस्तार पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में कंपनी ने इंस्पेरा हेल्थसांइसेज लिमिटेड में 100 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीदने का काम पूरा कर लिया है। यह सौदा 110.65 करोड़ रुपये में हुआ है। इसके अलावा कंपनी ने इंस्पेरा का खुद में विलय करने की योजना को भी मंजूरी दे दी है। कंपनी ने अपने एसोसिएट बिजनेस में 42.02 करोड़ रुपये के राइट डाउन का भी जिक्र किया है। कंपनी की कुल संपत्ति अब बढ़कर 42,495.98 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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