मार्केट न्यूज़

3 min read | अपडेटेड February 09, 2026, 09:53 IST
सारांश
आए फाइनेंस ने अपने आईपीओ के जरिए बाजार से पूंजी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस इश्यू में 710 करोड़ रुपये के नए शेयर और 300 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल है। कंपनी के मुनाफे में अच्छी बढ़त देखी गई है, लेकिन बढ़ते एनपीए और ग्राहकों की लोन कैपेसिटी से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है।

आए फाइनेंस का आईपीओ निवेशकों के लिए खुला।
आज से शेयर बाजार में निवेश का एक नया मौका मिल रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लोन देने वाली प्रमुख कंपनी आए फाइनेंस ने अपना आईपीओ निवेशकों के लिए खोल दिया है। यह आईपीओ 9 फरवरी से शुरू होकर 11 फरवरी तक खुला रहेगा। कंपनी ने इसके जरिए 1,010 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। अगर आप छोटे कारोबारियों की बढ़ती जरूरतों और डिजिटल लेंडिंग सेक्टर पर भरोसा करते हैं, तो यह आईपीओ आपके निवेश का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, पैसा लगाने से पहले कंपनी कुछ जरूरी बातें समझना बहुत जरूरी है।
आए फाइनेंस ने अपने इस आईपीओ के लिए शेयरों की कीमत 122 रुपये से 129 रुपये के बीच तय की है। एक निवेशक को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा, जिसमें 116 शेयर शामिल हैं। इसका मतलब है कि ऊपरी कीमत के हिसाब से आपको कम से कम 14,964 रुपये का निवेश करना पड़ेगा। कंपनी के शेयरों का आवंटन 12 फरवरी को होने की उम्मीद है और 16 फरवरी को इसके शेयरों की लिस्टिंग शेयर बाजार में हो सकती है। इस आईपीओ में 710 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जा रहे हैं, जबकि 300 करोड़ रुपये के शेयर पुराने निवेशकों द्वारा बेचे जा रहे हैं।
कंपनी ने साफ किया है कि आईपीओ से मिलने वाली नई रकम का इस्तेमाल वह अपने पूंजी आधार को मजबूत करने के लिए करेगी। एक एनबीएफसी होने के नाते आए फाइनेंस को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है। जुटाए गए फंड से कंपनी भविष्य में अपनी उधारी क्षमता को बढ़ाएगी और नए ग्राहकों तक अपनी पहुंच बनाएगी। कंपनी का मुख्य फोकस उन छोटे दुकानदारों और उद्यमियों पर रहता है, जिन्हें बड़े बैंक आसानी से कर्ज नहीं देते। यह नई पूंजी कंपनी को बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और नई शाखाएं खोलने में मदद करेगी।
अगर हम कंपनी की कमाई की बात करें, तो इसके आंकड़े काफी उत्साहजनक दिखते हैं। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का कुल रेवेन्यू का करीब 1,460 करोड़ रुपये रहा है। इसी दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा मार्च तिमाही में 175.3 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। जो सिंतबर तिमाही में घटकर 64.60 करोड़ रुपये पर आ गिरा। कंपनी का AUM यानी कुल लोन बुक भी बढ़कर 6,000 करोड़ रुपये के पार निकल गई है।
हर निवेश के साथ कुछ रिस्क भी जुड़े होते हैं और आए फाइनेंस के मामले में भी ऐसा ही है। सबसे बड़ी चिंता कंपनी के बढ़ते एनपीए को लेकर है। वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का ग्रॉस एनपीए 2.49 प्रतिशत था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 4.21 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि कंपनी द्वारा दिए गए कर्ज में से कुछ हिस्सा वापस आने में दिक्कत हो रही है। इसके अलावा कंपनी जिन छोटे कारोबारियों को लोन देती है, उनकी कमाई अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। अगर बाजार में मंदी आती है, तो ऐसे ग्राहकों की कर्ज चुकाने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है, जो सीधा कंपनी के मुनाफे को प्रभावित करेगा।
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