मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड December 02, 2025, 14:26 IST
सारांश
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयर में मंगलवार को 4 फीसदी की तेजी आई। कंपनी को सरकार से हथियार और गोला-बारूद बनाने का लाइसेंस मिल गया है। यह लाइसेंस 15 साल के लिए मान्य होगा। इससे कंपनी अब ड्रोन, रडार और नेविगेशन सिस्टम बना सकेगी, जिससे सेना के बड़े ऑर्डर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को मिला रक्षा उपकरण बनाने का बड़ा लाइसेंस
आज डिफेंस सेक्टर की कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में जोरदार हलचल देखने को मिली। कंपनी के शेयर इंट्रा-डे कारोबार में 4 फीसदी तक उछल गए। इस तेजी के पीछे एक बहुत बड़ी खबर है। दरअसल, कंपनी को सरकार की तरफ से एक महत्वपूर्ण नियामक मंजूरी मिल गई है, जो इसके भविष्य के कारोबार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी डीपीआईआईटी (DPIIT) ने कंपनी को इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव और मैन्युफैक्चरिंग का लाइसेंस दे दिया है। यह खबर आते ही निवेशकों ने शेयर में खरीदारी शुरू कर दी और यह 276.35 रुपये के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
कंपनी ने 1 दिसंबर 2025 को एक्सचेंजों को बताया कि यह नया लाइसेंस उसे कई तरह के रणनीतिक डिफेंस उत्पाद बनाने की अनुमति देता है। अब अपोलो माइक्रो सिस्टम्स मानवरहित हवाई प्रणाली यानी ड्रोन (UAS), इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और आधुनिक रडार उपकरण का निर्माण कर सकेगी। सबसे खास बात यह है कि यह लाइसेंस जारी होने की तारीख से अगले 15 सालों तक मान्य रहेगा। इसका मतलब है कि कंपनी को लंबे समय तक बार-बार मंजूरी लेने की झंझट नहीं होगी और वह अपनी विस्तार योजनाओं पर बेफिक्र होकर काम कर सकेगी। कंपनी ने साफ किया है कि रक्षा मंत्रालय (MoD) के साथ वर्तमान और भविष्य के विनिर्माण के अवसरों में भाग लेने के लिए यह लाइसेंस एक अनिवार्य शर्त थी।
इस मंजूरी के बाद कंपनी का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। लाइसेंस के तहत कंपनी को तीन प्रमुख श्रेणियों में रक्षा उपकरण बनाने की छूट मिली है। इसमें मानवरहित हेलीकॉप्टर, नेविगेशन सिस्टम और एकीकृत रडार सिस्टम शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि वह पहले से ही कई ड्रोन प्लेटफार्मों पर काम कर रही है और लॉजिस्टिक्स वाले ड्रोन के साथ-साथ हमलावर (Attack-class) ड्रोन बनाने के लिए घरेलू और विदेशी भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रही है। उम्मीद है कि अगली दो तिमाहियों में इन सिस्टम्स का फील्ड ट्रायल शुरू हो जाएगा। इसके अलावा कंपनी नेविगेशन के लिए हाई-प्रिसिजन तकनीक विकसित करेगी, जो आधुनिक मिसाइलों और विमानों के लिए बहुत जरूरी है।
यह मंजूरी भारत के तेजी से बढ़ते रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम में अपोलो माइक्रो सिस्टम्स की स्थिति को और मजबूत करेगी। सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत स्वदेशीकरण पर जोर दे रही है, जिससे हाई-टेक रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों का महत्व बढ गया है। कंपनी का बढ़ता हुआ पोर्टफोलियो उन क्षेत्रों से मेल खाता है जिनकी सेना को सबसे ज्यादा जरूरत है, जैसे यूएवी और रडार। अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ चल रहे सहयोग और नए लाइसेंस की लंबी वैधता के चलते कंपनी अपने प्रोडक्ट डेवलपमेंट में तेजी लाएगी और उसे उम्मीद है कि आने वाले समय में उसे बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
अगर शेयर के प्रदर्शन की बात करें तो अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने अपने निवेशकों को मालामाल किया है। हालांकि शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई 354.65 रुपये (जो सितंबर 2025 में बना था) से अभी भी 22 फीसदी नीचे है, लेकिन इसने निचले स्तरों से शानदार रिकवरी दिखाई है। दिसंबर 2024 में यह शेयर 92.50 रुपये के निचले स्तर पर था, वहां से अब तक इसने 199 फीसदी की छलांग लगाई है और निवेशकों की दौलत को लगभग तीन गुना कर दिया है। पिछले एक साल में इस शेयर ने 169 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। हालांकि, पिछले तीन महीनों में इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इस नई खबर से फिर से तेजी के संकेत मिल रहे हैं।
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