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5 min read | अपडेटेड November 03, 2026, 17:10 IST
सारांश
भारत के निर्यात लक्ष्य पर गोयल ने कहा कि देश वित्त वर्ष 2026-27 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

भारत का साफ संदेश: न जीएम उत्पादों को मंजूरी, न डेयरी क्षेत्र में विदेशी एंट्री (Photo: Shutterstock)
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को क्लियर किया कि भारत आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified, GM) प्रोडक्ट्स के आयात की अनुमति नहीं देगा और किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत अपना डेयरी सेक्टर भी नहीं खोलेगा। उन्होंने इन दोनों मुद्दों को देश के लिए बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि सरकार व्यापार समझौतों में किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। गोयल ने कहा कि भारत ने अब तक किसी भी व्यापार समझौते में संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े अपने हितों से समझौता नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कृषि और समुद्री उत्पादों जैसे सेक्टरों में मार्केट खोलने को लेकर भारत बेहद सतर्क रहता है, क्योंकि इन सेक्टरों में देश की मजबूत स्थिति है। गोयल ने कहा, 'भारत ने आज तक किसी भी देश के लिए अपना डेयरी सेक्टर नहीं खोला है। जीएम उत्पादों के आयात को लेकर भी हमारी नीति स्पष्ट है। हमने कभी इसकी अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेंगे।'
मंत्री ने कहा कि भारत व्यापार समझौतों में धार्मिक संवेदनशीलताओं को लेकर भी विशेष सावधानी बरतता है। विदेशों में डेयरी प्रोडक्ट्स के निर्माण में कई बार बछड़े के मांस या रेनेट का इस्तेमाल किया जाता है। रेनेट पनीर बनाने में उपयोग होने वाला एंजाइम है, जिसे परंपरागत रूप से छोटे बछड़ों के पेट की अंदरूनी परत से प्राप्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे प्रोडक्ट्स के लिए सख्त प्रमाणन व्यवस्था जरूरी है, ताकि देश के बड़े हिस्से की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
गोयल ने कहा कि भारत का उद्देश्य व्यापार समझौतों के जरिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और उन उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाना है, जिनमें देश प्रतिस्पर्धी है। इससे किसानों, एमएसएमई और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को व्यापक लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत कपड़ा, दवा, कृषि उत्पादों और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए तरजीही बाजार पहुंच हासिल करने की कोशिश कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि भारतीय उत्पादों पर प्रतिस्पर्धी देशों इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलीपींस की तुलना में कम शुल्क लगाया जाए।
भारत में कृषि पर बड़ी आबादी निर्भर है, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों की हिस्सेदारी अधिक है। नीति-निर्माताओं को आशंका है कि विकसित देशों की अत्यधिक मशीनीकृत और सब्सिडी वाली कृषि प्रणालियों से सस्ते जीएम उत्पादों का बड़े पैमाने पर आयात घरेलू बाजार में कीमतों को प्रभावित कर सकता है। इससे किसानों की आय और आजीविका पर दबाव पड़ने की आशंका है। जीएम प्रोडक्ट्स को लेकर खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय जोखिम, धार्मिक चिंताओं और व्यापार संरक्षण जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। अमेरिका की जीएम कृषि उत्पादों और डेयरी उत्पादों के कारोबार में बड़ी रुचि है।
गोयल ने कहा कि सरकार देश में विनिर्माण गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है, ताकि रोजगार के अधिक अवसर पैदा किए जा सकें। मंत्री ने कहा कि नियमित रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सरकार युवाओं के लिए उद्यमिता के नए रास्ते भी खोल रही है। आज दुनिया स्टार्टअप और नए व्यवसायों के जरिए रोजगार तथा विकास के अवसर उपलब्ध करा रही है।
भारत के निर्यात लक्ष्य पर गोयल ने कहा कि देश वित्त वर्ष 2026-27 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान भारत का निर्यात लगभग 480 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 14 प्रतिशत अधिक है। लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले छह महीनों में 520 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात करना होगा। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में निर्यात के आंकड़े काफी अच्छे रहे हैं। अक्टूबर के व्यापार आंकड़े नवंबर के मध्य में आधिकारिक तौर पर जारी किए जाएंगे।
चीन द्वारा टनल बोरिंग मशीनों के निर्यात पर नियंत्रण लगाए जाने के सवाल पर गोयल ने कहा कि यदि इन मशीनों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत इन्हें घरेलू स्तर पर बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा कि दुर्लभ खनिज तत्वों तक पहुंच बाधित होने के बावजूद भारत ने किसी के सामने मदद के लिए हाथ नहीं फैलाया। इससे स्पष्ट है कि सरकार महत्वपूर्ण औद्योगिक संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहती है।
गोयल ने बताया कि भारत में विमानों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार एम्ब्रेयर, एयरबस और बोइंग जैसी विमान विनिर्माता कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है। विमानों की उपलब्धता बढ़ने से देश में पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
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