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4 min read | अपडेटेड October 23, 2026, 15:51 IST
सारांश
SIM बाइंडिंग का मतलब है कि आपके मैसेजिंग ऐप का अकाउंट उस मोबाइल नंबर और सिम कार्ड से जुड़ा रहे, जिससे आपने अकाउंट बनाया है। सरकार चाहती है कि मोबाइल नंबर और मैसेजिंग अकाउंट के बीच यह संबंध मजबूत बना रहे।

iPhone और Android, दोनों तरह के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं।
WhatsApp और Telegram इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए सिम कार्ड से जुड़ा एक नया नियम आने वाला है। सरकार के नए निर्देशों के तहत इन मैसेजिंग ऐप्स को यूजर के मोबाइल नंबर और उसके केवाईसी (KYC) वेरिफाइड सिम कार्ड से जोड़ना होगा। इस नियम का मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी अकाउंट के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। इसके लिए कंपनियों को 31 दिसंबर 2026 तक नियमों का पालन करना है। वहीं, 1 जनवरी से सिम बाइंडिंग के नियम लागू होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 1 जनवरी से सभी फोन में WhatsApp चलना बंद हो जाएगा। इसका असर खास तौर पर उन यूजर्स पर पड़ सकता है, जो अपने रजिस्टर्ड सिम कार्ड के बिना किसी दूसरे फोन या वाई-फाई के जरिए मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करते हैं।
SIM बाइंडिंग का मतलब है कि आपके मैसेजिंग ऐप का अकाउंट उस मोबाइल नंबर और सिम कार्ड से जुड़ा रहे, जिससे आपने अकाउंट बनाया है। सरकार चाहती है कि मोबाइल नंबर और मैसेजिंग अकाउंट के बीच यह संबंध मजबूत बना रहे, ताकि कोई व्यक्ति दूसरे के नंबर का गलत इस्तेमाल करके धोखाधड़ी न कर सके।
अभी कई यूजर्स अपने फोन में WhatsApp अकाउंट सेटअप करने के बाद सिम कार्ड निकाल देते हैं और वाई-फाई की मदद से ऐप चलाते रहते हैं। नए नियमों के तहत ऐसे यूजर्स को परेशानी हो सकती है, अगर संबंधित ऐप को अकाउंट की पुष्टि के लिए रजिस्टर्ड सिम कार्ड की मौजूदगी जरूरी करनी पड़े।
इस नियम का असर किसी एक खास मोबाइल कंपनी या मॉडल तक सीमित नहीं है। iPhone और Android, दोनों तरह के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं। खास तौर पर वे लोग, जो WhatsApp या Telegram चलाने के लिए उस सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जिससे उनका अकाउंट रजिस्टर्ड है।
उदाहरण के लिए, अगर आपने अपने पुराने फोन के नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया था और अब दूसरे फोन में बिना उस सिम कार्ड के WhatsApp चला रहे हैं, तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह, केवल वाई-फाई पर चलने वाले फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी अपने अकाउंट की स्थिति जांचनी पड़ सकती है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन-किन फोन मॉडल पर किस तरह की पाबंदी लगेगी। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि WhatsApp और Telegram इन नियमों को किस तरह लागू करते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple ने SIM बाइंडिंग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए iOS में बदलाव किए हैं। सितंबर में जारी एक सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए iPhone में सिम कार्ड मौजूद है या नहीं, इसका पता लगाने से जुड़ी सुविधा पर काम किया गया है।
लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सभी पुराने iPhone या किसी खास मॉडल में WhatsApp बंद हो जाएगा। फिलहाल, प्रभावित होने वाले डिवाइस की कोई स्पष्ट और आधिकारिक सूची उपलब्ध नहीं है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर 2025 को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। शुरुआती नियमों में WhatsApp Web जैसे वेब सेशन को हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट करने की शर्त भी शामिल थी।
हालांकि, बाद में विभाग ने हर छह घंटे में लॉगआउट करने की अनिवार्य शर्त वापस ले ली। इसकी जगह जोखिम के आधार पर लॉगआउट करने की व्यवस्था रखी गई। यानी अगर किसी मामले में धोखाधड़ी का संदेह होता है, तो संबंधित सेवा को तुरंत बंद किया जा सकता है। इसलिए यूजर्स को यह नहीं मानना चाहिए कि अब WhatsApp Web हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, WhatsApp और Telegram इस नियम के दायरे में हैं। वहीं, Snapchat को कथित तौर पर SIM बाइंडिंग की इन शर्तों का पालन करना जरूरी नहीं है। फिलहाल यूजर्स के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपने WhatsApp या Telegram अकाउंट से जुड़े रजिस्टर्ड सिम कार्ड को सुरक्षित रखें। विदेश यात्रा करने वाले, कई डिवाइस पर अकाउंट चलाने वाले और केवल वाई-फाई पर फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। साथ ही, 1 जनवरी से सभी फोन में WhatsApp बंद होने की बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है। नियमों का वास्तविक असर ऐप कंपनियों की ओर से इन्हें लागू किए जाने के तरीके पर निर्भर करेगा।
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