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भारत के न्यूक्लियर मार्केट में क्या होगी USA की एंट्री? 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस हफ्ते आ रहा है दौरे पर

Upstox

2 min read | अपडेटेड May 18, 2026, 09:27 IST

सारांश

भारत और अमेरिका फ्यूजन ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा फ्रांस के कादाराश में विकसित किए जा रहे इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर में भी दोनों देशों की भागीदारी है।

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अमेरिकी परमाणु उद्योग के 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का इस सप्ताह भारत दौरा (Photo: Shutterstock)

अमेरिकी न्यूक्लियर इंडस्ट्री के सीनियर अधिकारियों का एक 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह भारत का दौरा करेगा। यह दौरा भारत द्वारा न्यूक्लियर सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने के बाद संभावित सहयोग के मौकों की तलाश के उद्देश्य से हो रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल 18 से 21 मई तक नई दिल्ली और मुंबई का दौरा करेगा। इस दौरान टीम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात करेगी। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) ने कहा, ‘इस दौरे का उद्देश्य यह समझना है कि अमेरिकी और भारतीय कंपनियां परियोजना विकास को समर्थन देने, सप्लाई चेनों को मजबूत करने और लॉन्ग-टर्म कमर्शियल साझेदारी बनाने के लिए किस तरह आगे सहयोग कर सकती हैं।’

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प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकारों से यह भी समझेगा कि वे अपने राज्यों के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को किस तरह सपोर्ट दे सकते हैं और लोकल लेवल पर मैनुफैक्चरिंग पार्टनरशिप कैसे डेवलप की जा सकती हैं। यह प्रतिनिधिमंडल उन सरकारी अधिकारियों और प्राइवेट सेक्टरों के दिग्गजों के साथ बातचीत करेंगे, जो पिछले साल दिसंबर में लागू हुए ‘ सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) कानून’ के बाद से सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में उपलब्ध अवसरों को तलाशने के इच्छुक हैं। यह अमेरिकी परमाणु उद्योग प्रतिनिधिमंडल यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम और न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट की पहल के तहत भारत आ रहा है।

भारत और अमेरिका फ्यूजन ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा फ्रांस के कादाराश में विकसित किए जा रहे इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर में भी दोनों देशों की भागीदारी है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के फेलो शाश्वत कुमार ने कहा, ‘भारत की 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने की महत्वाकांक्षा और क्षेत्र के निजीकरण से अमेरिकी कंपनियों के लिए बड़ा व्यावसायिक अवसर बनता है।’ प्रतिनिधिमंडल भारतीय निजी क्षेत्र के साथ नागरिक परमाणु ऊर्जा में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं की तलाश करेगा।

PTI इनपुट के साथ

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