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4 min read | अपडेटेड July 24, 2026, 09:02 IST
सारांश
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ये दोनों जांच तब शुरू की थीं, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आपात शक्तियों के तहत लगाए गए ‘जवाबी शुल्क’ को अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी देशों पर 10% शुल्क लागू कर दिया था, जिसका समय शुक्रवार को समाप्त हो रहा है।

फोर्स्ड लेबर के चलते अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% टैरिफ लगाया (Photo: Shutterstock)
अमेरिका ने भारत और 16 अन्य देशों से आयातित सामान पर 10% टैरिफ लगाया है। यह कदम इन सामानों के उत्पादन में जबरन मजदूरी के इस्तेमाल को रोकने की कोशिशों के तहत उठाया गया है। पिछले महीने, जब अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत टैरिफ का प्रस्ताव रखा था, तो भारत को उन देशों की कैटेगरी में रखा गया था, जिन पर 12.5% लेवी (शुल्क) लगाई जानी थी। लेकिन वॉशिंगटन ने नई दिल्ली द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में किए गए उस संशोधन पर ध्यान दिया, जिसमें जबरन मजदूरी से उत्पादित सामान के आयात पर रोक लगाई गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इस मुद्दे पर जारी एक मेमोरेंडम में कहा, ‘इन कदमों के परिणामस्वरूप, ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने मुझे सलाह दी है कि इन अर्थव्यवस्थाओं के सामान पर 10% की दर से टैरिफ लगाया जाना चाहिए, ताकि इन अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए और प्रोत्साहित किया जा सके।’
इससे पहले अमेरिका ने बुधवार को कहा था कि वह बंधुआ मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े आयात के मुद्दे पर भारत समेत 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ ‘धारा 301’ जांच के तहत 'अंतिम कार्रवाई उपाय' जल्द जारी करेगा और इसके एक दिन बाद ही यह फैसला आ गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने सीनेट की वित्त समिति के समक्ष कहा था कि अमेरिका ने अपने टॉप 60 व्यापारिक साझेदारों की जांच की, क्योंकि वे बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध को अपनाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम रहे हैं।
ग्रीर ने कहा था, ‘यूएसटीआर 'संभवत: कल' यानी गुरुवार को इस मामले में धारा 301 जांच पर अंतिम कार्रवाई की घोषणा करेगा।’ पिछले महीने यूएसटीआर कार्यालय ने इस मुद्दे से निपटने के लिए देशों द्वारा उठाए गए कदमों की मजबूती के आधार पर 10% और 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कार्रवाई पर 1,600 से अधिक टिप्पणियां मिलीं और इस मामले पर सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित की गई, जिसमें 100 से अधिक गवाहों ने अपने विचार रखे। इसके अलावा, अमेरिका एक दर्जन से अधिक देशों में संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की भी जांच कर रहा है। हालांकि, इस जांच के प्रारंभिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ये दोनों जांच तब शुरू की थीं, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आपात शक्तियों के तहत लगाए गए ‘जवाबी शुल्क’ को अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी देशों पर 10% शुल्क लागू कर दिया था, जिसका समय शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। भारत ने अमेरिकी सरकार की इन जांचों का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसे मुद्दों पर द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत चर्चा की जा सकती है, जिस पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और निर्यात का प्रमुख गंतव्य है। साल 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार लगभग 141 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर था। सुनवाई के दौरान एक अमेरिकी सीनेटर ने भारत में अमेरिकी सोडा ऐश उत्पादकों को बाजार पहुंच से जुड़ी चिंताओं का मुद्दा भी उठाया। इस पर ग्रीर ने कहा कि वह इस विषय को भारतीय अधिकारियों के साथ उठाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि अमेरिकी उत्पादकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। भारत ने 16 मार्च, 2026 को सोडा ऐश के आयात पर डंपिंग-रोधी जांच शुरू की थी।
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