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  1. रूस और ईरान से तेल खरीदने के बैन का भारत पर क्या होगा असर? यहां समझें पूरी कहानी

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रूस और ईरान से तेल खरीदने के बैन का भारत पर क्या होगा असर? यहां समझें पूरी कहानी

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 16, 2026, 16:24 IST

सारांश

अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई अस्थाई छूट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि जो तेल 11 मार्च से पहले समुद्र में था, उसे ठिकाने लगाने के लिए मोहलत दी गई थी, जो अब खत्म हो चुकी है।

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अमेरिकी सरकार के इस कड़े रुख से भारत जैसे बड़े तेल खरीदारों की चिंता बढ़ सकती है।

अमेरिका ने एक बड़ा कड़ा फैसला लेते हुए रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए देशों को दी गई अस्थाई राहत (सैंक्शन्स वेवर) को आगे नहीं बढ़ाने का मन बना लिया है। वाशिंगटन का यह कदम सीधे तौर पर सख्त पाबंदियों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा इशारा है। इस फैसले के साथ ही अमेरिका ने एक नई और तीखी चेतावनी जारी की है कि जो भी देश ईरानी तेल खरीदेगा, उसे इसके नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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क्यों खत्म हुई छूट और क्या था मामला?

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि रूस और ईरान के तेल पर जनरल लाइसेंस को अब रिन्यू नहीं किया जाएगा। दरअसल, यह जनरल लाइसेंस एक अस्थाई उपाय के तौर पर शुरू किया गया था ताकि वह तेल जो 11 मार्च से पहले ही समुद्र में जहाजों पर लोड हो चुका था, वह बिना किसी प्रतिबंध के अपनी यात्रा पूरी कर सके। भारत को रूस से आने वाले क्रूड के लिए मार्च की शुरुआत में यह राहत दी गई थी, जिसे बाद में अन्य देशों और ईरानी तेल के लिए भी बढ़ाया गया था। अब चूंकि वह सारा शिपमेंट क्लियर हो चुका है, इसलिए अमेरिका ने इस छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है।

भारत के लिए कितनी बड़ी है चुनौती

रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत रूस से डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल का बड़ा खरीदार रहा है। इस वेवर की समय सीमा खत्म होने से भारतीय रिफाइनर्स के लिए ऑपरेशनल लचीलापन कम हो जाएगा। अब भारतीय रिफाइनर्स को बहुत संभलकर तेल की खरीदारी करनी होगी क्योंकि अगर ईरानी तेल का थोड़ा भी अंश उसमें शामिल पाया गया, तो उन पर सेकेंडरी सैंक्शन्स लगने का खतरा बढ़ जाएगा। ट्रंप प्रशासन का यह कड़ा रुख खासतौर पर उन देशों के लिए है जो अभी भी ईरान से व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य और कूटनीति का असर

यह पूरी हलचल ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी कर रखी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रास्तों में से एक है और इसकी वजह से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, इन कड़े प्रतिबंधों के बीच कूटनीति के दरवाजे भी खुले हैं। ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता होने वाली है। इस बीच ऐसी खबरें भी आई हैं कि तेहरान जहाजों को गुजरने की थोड़ी छूट दे सकता है, जिसकी वजह से तेल की कीमतों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि भारत और अन्य देशों के पास इस नई स्थिति से निपटने के लिए कितना मौका बचता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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