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3 min read | अपडेटेड January 20, 2026, 15:03 IST
सारांश
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020-21 सीरीज X के निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। बॉन्ड जारी होने के 5 साल पूरे होने पर आरबीआई ने 'प्री-मैच्योर रिडेम्पशन' यानी समय से पहले पैसा निकालने की खिड़की खोल दी है। इस सीरीज में निवेशकों को 175 फीसदी से ज्यादा का बंपर रिटर्न मिल रहा है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020-21 सीरीज X के निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। बॉन्ड जारी होने के 5 साल पूरे होने पर आरबीआई ने 'प्री-मैच्योर रिडेम्पशन' यानी समय से पहले पैसा निकालने की खिड़की खोल दी है। इस सीरीज में निवेशकों को 175 फीसदी से ज्यादा का बंपर र
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी एसजीबी में निवेश करने वाले लोगों के लिए यह साल शानदार मुनाफे की सौगात लेकर आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने एसजीबी 2020-21 सीरीज X के निवेशकों को समय से पहले अपना पैसा निकालने यानी 'प्री-मैच्योर रिडेम्पशन' की अनुमति दे दी है। इस योजना के नियमों के अनुसार, निवेश के पांच साल पूरे होने के बाद निवेशक ब्याज भुगतान की तारीख पर अपनी पूंजी वापस ले सकते हैं। इस खास ट्रांच के लिए 19 जनवरी 2026 को पात्रता की तारीख तय की गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस सीरीज में निवेश करने वालों को सोने की कीमतों में आए उछाल की वजह से 175 फीसदी से भी ज्यादा का जबरदस्त फायदा हो रहा है।
आरबीआई ने इस सीरीज के लिए रिडेम्पशन प्राइस 14,130 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। अगर हम इसके फ्लैशबैक में जाएं तो जनवरी 2021 में जब यह बॉन्ड जारी हुआ था, तब इसकी कीमत महज 5,117 रुपये प्रति यूनिट थी। इसका मतलब यह है कि सिर्फ पांच सालों में निवेशकों को प्रति यूनिट लगभग 9,000 रुपये का मुनाफा हो रहा है। अगर किसी निवेशक ने उस वक्त 50,000 रुपये निवेश किए थे, तो आज उसकी वैल्यू बढ़कर लगभग 1.38 लाख रुपये हो गई है। यह मुनाफा केवल सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का है, इसमें हर साल मिलने वाला 2.5 फीसदी का ब्याज शामिल नहीं है। यानी कुल मिलाकर निवेशकों की संपत्ति तीन गुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी है।
गोल्ड बॉन्ड की वापसी की कीमत तय करने के लिए आरबीआई एक खास प्रक्रिया अपनाता है। इस बार रिडेम्पशन प्राइस तय करने के लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कार्य दिवसों (13, 14 और 16 जनवरी 2026) के बंद भाव का औसत निकाला गया है। इसी औसत के आधार पर 14,130 रुपये की कीमत तय की गई है। एक बार जब निवेशक रिडेम्पशन के लिए आवेदन कर देता है, तो यह राशि सीधे उनके रजिस्टर्ड बैंक खाते में जमा कर दी जाती है। इससे निवेशकों को फिजिकल गोल्ड बेचने या उसकी शुद्धता की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती।
अगर आप इस सीरीज से बाहर निकलना चाहते हैं, तो आपको उसी बैंक, पोस्ट ऑफिस या एजेंट के पास जाना होगा जहां से आपने यह बॉन्ड खरीदा था। प्री-मैच्योर रिडेम्पशन के लिए आवेदन ब्याज भुगतान की तारीख से कुछ दिन पहले करना होता है ताकि प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। ध्यान रहे कि एसजीबी में पांच साल की लॉक-इन अवधि होती है, जिसके बाद ही समय से पहले बाहर निकलने की सुविधा मिलती है। यह सुविधा निवेशकों को पूरा आठ साल का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार किए बिना अपना मुनाफा घर ले जाने का मौका देती है।
एसजीबी में निवेश का सबसे बड़ा फायदा इसकी टैक्स छूट है। हालांकि बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज आयकर अधिनियम के तहत टैक्स के दायरे में आता है, लेकिन आरबीआई के माध्यम से रिडेम्पशन पर मिलने वाला कैपिटल गेन व्यक्तिगत निवेशकों के लिए पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। सरकार ने बजट 2025-26 में यह घोषणा की थी कि अब नई एसजीबी सीरीज जारी नहीं की जाएगी क्योंकि सरकार के लिए यह कर्ज लेने का एक महंगा जरिया बन गया है। हालांकि, जिन लोगों के पास पुराने बॉन्ड हैं, वे अपनी मैच्योरिटी या रिडेम्पशन अवधि तक इस योजना का लाभ उठाते रहेंगे।
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