return to news
  1. इस राज्य के किसानों को शिवराज सिंह चौहान की सौगात, पांच फसलों की खरीद को दी मंजूरी

बिजनेस न्यूज़

इस राज्य के किसानों को शिवराज सिंह चौहान की सौगात, पांच फसलों की खरीद को दी मंजूरी

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड April 23, 2026, 17:26 IST

सारांश

शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि खरीद व्यवस्था की सतत निगरानी जरूरी है, ताकि किसी भी स्तर पर बिचौलियों को फायदा न मिले और वास्तविक किसानों की उपज ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए।

किसानों को सौगात

ओडिशा के किसानों को शिवराज सिंह चौहान की सौगात

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 अप्रैल को दिल्ली के कृषि भवन में ओडिशा के उप मुख्यमंत्री और कृषि व किसान सशक्तिकरण मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह के साथ हुई वर्चुअल बैठक में राज्य की मांगों पर तुरंत और पॉजिटिव फैसला लेते हुए मूंग, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी और सरसों की खरीद के लिए महत्वपूर्ण स्वीकृतियां दीं। अप्रूवल्स की कुल एमएसपी (Minimum Support Price) वैल्यू 1,428.31 करोड़ रुपये से अधिक होगी। बैठक में चौहान ने साफ तौर पर कहा कि ओडिशा के किसानों की सहायता में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी, लेकिन खरीद प्रक्रिया पारदर्शी, ईमानदार और सीधे किसानों से सुनिश्चित होनी चाहिए।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का फायदा समय पर और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए मिलना चाहिए, ताकि वास्तविक उत्पादक किसानों को सीधी राहत पहुंचे। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री ने ओडिशा के उप मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री के साथ राज्य की कृषि उपज खरीद संबंधी मांगों की समीक्षा की। बैठक में राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्तावों, उत्पादन अनुमानों और खरीद की आवश्यकता पर विचार करने के बाद केंद्र की ओर से शिवराज सिंह ने पांच प्रमुख फसलों के लिए स्वीकृति देने का निर्णय लिया।

किन फसलों को कितने MSP पर मिली हरी झंडी?

शिवराज सिंह द्वारा मूंग के लिए ओडिशा की 34,492 मीट्रिक टन की मांग को स्वीकृति दी गई, जिसकी MSP वैल्यू 302.42 करोड़ रुपये है। उड़द के लिए 1,19,387 मीट्रिक टन की मांग को मंजूरी दी गई, जिसकी MSP वैल्यू 931.21 करोड़ रुपये बैठती है। इसी तरह मूंगफली के लिए 20,219 मीट्रिक टन की स्वीकृति दी गई, जिसकी MSP वैल्यू 146.85 करोड़ रुपये है। सूरजमुखी के लिए 2,210 मीट्रिक टन की मांग को सही मानते हुए शिवराज सिंह द्वारा मंजूरी दी गई, जिसकी MSP वैल्यू 17.06 करोड़ रुपये है, वहीं सरसों के मामले में भी चौहान ने ओडिशा की 4,964 मीट्रिक टन की मांग को अप्रूव किया, जिसकी MSP वैल्यू 30.77 करोड़ रुपये है।

सूरजमुखी खेती को लेकर क्यों गदगद हुए शिवराज सिंह चौहान?

यह पूरी प्रक्रिया पीएम-आशा के तहत 90 दिनों की अवधि के लिए प्रस्तावित है और राज्य सरकार पहले से ही PoS आधारित खरीद व्यवस्था पर काम कर रही है। बैठक के दौरान चौहान ने विशेष रूप से सूरजमुखी की खेती को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह फसल कई क्षेत्रों से धीरे-धीरे खत्म हो रही थी, ऐसे में ओडिशा में इसका बना रहना और बढ़ना उत्साहजनक है। उन्होंने राज्य सरकार को भरोसा दिलाया कि सूरजमुखी के रकबे और उत्पादन को बढ़ाने के लिए केंद्र हरसंभव सहयोग देगा और जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर दिया जोर

शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि खरीद व्यवस्था की सतत निगरानी जरूरी है, ताकि किसी भी स्तर पर बिचौलियों को फायदा न मिले और वास्तविक किसानों की उपज ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ खरीद सुनिश्चित की जाती है, तो इससे ओडिशा के किसानों को वास्तविक और ठोस लाभ मिलेगा। चौहान ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि उपार्जन पूरी तरह किसानों से हो, पारदर्शी हो और ऐसी व्यवस्था बने जिसमें व्यापारी किसानों के नाम पर फायदा न उठा सकें। उन्होंने कहा कि ओडिशा के किसानों की सहायता के लिए केंद्र सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

अगला लेख