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Sanjay Malhotra on Rate cut: मुद्रास्फीति, ग्रोथ आउटलुक से तय होगी ब्याज दर में कटौती

Upstox

2 min read | अपडेटेड July 25, 2025, 17:21 IST

सारांश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस साल अपनी प्रमुख उधारी दरों में एक फीसदी की कटौती की और आधिकारिक आंकड़े बता रहे हैं कि प्रमुख मुद्रास्फीति चार फीसदी के लक्ष्य के मुकाबले घटकर 2.1 फीसदी रह गई है। ऐसे में आगे और नरमी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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Rate Cut: जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस साल बैंकों ने ऋण दरों में लगभग आधा फीसदी की कमी की है।

Sanjay Malhotra on Rate cut: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि मुद्रास्फीति और ग्रोथ की संभावनाएं भविष्य में ब्याज दर कटौती तय करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान आंकड़े इस फैसले को प्रभावित नहीं करेंगे। बता दें कि जून में मुद्रास्फीति में भारी गिरावट आई है।
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पीटीआई के मुताबिक मल्होत्रा ने 'FE मॉडर्न BFSI शिखर सम्मेलन' में कहा कि आरबीआई की दरों में कटौती से एसेट्स में उछाल नहीं आएगा और केंद्रीय बैंक के पास अर्थव्यवस्था की मदद के लिए दरों में कटौती के अलावा और भी कई उपाय मौजूद हैं।

बता दें कि आरबीआई ने इस साल अपनी प्रमुख उधारी दरों में एक फीसदी की कटौती की और आधिकारिक आंकड़े बता रहे हैं कि प्रमुख मुद्रास्फीति चार फीसदी के लक्ष्य के मुकाबले घटकर 2.1 फीसदी रह गई है। ऐसे में आगे और नरमी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

मल्होत्रा ने कहा, "दरों में कटौती मौजूदा आंकड़ों के बजाय भविष्य में ग्रोथ और महंगाई दोनों की संभावनाओं पर निर्भर करेगी।"

उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना होगा कि मौद्रिक नीति का असर कुछ देरी के साथ होता है, इसलिए दरों पर निर्णय लेते समय मुद्रास्फीति जैसे प्रमुख आंकड़ों के 12 महीने तक के पुर्वानुमान को ध्यान में रखा जाता है।"

जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस साल बैंकों ने ऋण दरों में लगभग आधा फीसदी की कमी की है। जबकि रिजर्व बैंक ने फरवरी से लेकर अबतक नीतिगत दर में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। मल्होत्रा ने कहा कि दरों में कटौती का मकसद लोन ग्रोथ को बढ़ाना है, और उन्होंने भरोसा जताया कि इससे एसेट ‘बुलबुले’ नहीं बनेंगे।

UK के साथ ट्रेड डील पर क्या बोले RBI गवर्नर?

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर का शुक्रवार को स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद अब बीते दिन की बात है और भारत को अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौतों (जैसे ब्रिटेन एफटीए) की जरूरत है।

लंदन में ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते पर केंद्रीय बैंक की यह पहली टिप्पणी है। मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ उम्मीद है कि ब्रिटेन के साथ एफटीए से हमें मदद मिलेगी... अब आगे बढ़ने का यही रास्ता है, क्योंकि दुर्भाग्य से बहुपक्षवाद पीछे छूट गया है।’’

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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