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RBI MPC Meeting: कमजोर मानसून और क्रूड की कीमतों के बीच क्या ब्याज दरों पर आएगा बड़ा फैसला?

Upstox

4 min read | अपडेटेड August 03, 2026, 14:03 IST

सारांश

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक इस सप्ताह शुरू हो रही है। क्रूड ऑयल के दाम, कमजोर मानसून और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी जैसे आर्थिक पहलुओं को देखते हुए रिजर्व बैंक रणनीति अपना सकता है।

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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक इस हफ्ते होने जा रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक इस हफ्ते होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और देश में कमजोर मानसून को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे आने वाले महीनों में खाने पीने की चीजों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया दबाव में था। हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने वाले एफसीएनआर डिपॉजिट फ्लो में आई तेजी से केंद्रीय बैंक को काफी राहत मिली है। इस पूरे माहौल को देखते हुए माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति सतर्क रुख अपना सकती है और फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे स्थिर रख सकती है।

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ब्याज दरों पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

जून में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर बिना किसी बदलाव के बरकरार रखा गया था और विदेशी संस्थागत निवेशकों के फ्लो को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों का ऐलान किया गया था। SBM बैंक इंडिया के फाइनेंशियल मार्केट्स प्रमुख मंदार पिताले का मानना है कि वर्तमान ग्रोथ और इंफ्लेशन के आंकड़े ग्रोथ के लिए जोखिम की तरफ इशारा करते हैं, जबकि निकट फ्यूचर में इंफ्लेशन का दायरा संभालने योग्य दिखता है। इसके साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए समिति जल्दबाजी में ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार नहीं करेगी। उनके अनुसार ग्लोबल ऑयल प्राइज और मानसून फ्यूचर की पॉलिसी के लिए मुख्य कारक रहेंगे। गोल्डमैन सेक्स के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट शांतनु सेनगुप्ता को भी उम्मीद है कि समिति रेपो रेट को स्थिर रखेगी और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखेगी।

इस साल की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा एफसीएनआर डिपॉजिट जुटाने के लिए एक विशेष विंडो का ऐलान किया था, जिससे उन्हें रियायती दरों पर ऐसे डिपॉजिट जुटाने और स्वैप करने की अनुमति मिली थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार एफसीएनआर डिपॉजिट, विदेशी मुद्रा उधारी और एक्सटर्नल कमर्शियल बरोइंग के माध्यम से कुल 40.81 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। शांतनु सेनगुप्ता ने बताया कि रिजर्व बैंक के कदमों के बाद रुपया स्थिर हुआ है, इसलिए समिति को निकट फ्यूचर में कड़ा रुख अपनाने की बहुत कम जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहने के कारण रिजर्व बैंक अपने इंफ्लेशन अनुमान में थोड़ी कटौती कर सकता है।

मानसून और आर्थिक ग्रोथ का आउटलुक

बैंक ऑफ बड़ौदा की इकोनॉमिस्ट सोनल बधान का भी मानना है कि रिजर्व बैंक इस बार वेट एंड वॉच मोड में रहेगा। वे उम्मीद करती हैं कि समिति के सदस्य मानसून की प्रगति और फूड इंफ्लेशन पर इसके असर पर नजर बनाए रखेंगे। उनके अनुसार पहली तिमाही की ग्रोथ के लिए रिजर्व बैंक के अनुमानों में पहले से ही अमेरिका और ईरान युद्ध के असर को शामिल कर लिया गया था, इसलिए ग्रोथ 6.6 से 6.8% के अनुमान के अनुसार रहने की उम्मीद है। हालांकि ग्लोबल ऑयल प्राइज, कमजोर मानसून और जलाशयों में पानी के कम स्तर से इंफ्लेशन बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष का मानना है कि समिति ब्याज दरों को स्थिर रख सकती है, लेकिन ऑयल वोलेटिलिटी और रुपये पर दबाव के कारण इसका रुख सतर्क बना रहेगा।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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