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3 min read | अपडेटेड May 30, 2026, 15:53 IST
सारांश
भारतीय रुपया भी दबाव में है। हाल के महीनों में रुपया लगभग 90 रुपये प्रति डॉलर से गिरकर 95 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया है। कमजोर रुपया आयात को और महंगा बना देता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI को भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ सकता है।

RBI: महंगाई फिलहाल RBI के तय दायरे 2 से 6 फीसदी के भीतर है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 से 5 जून के बीच होने वाली है। बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या RBI ब्याज दरों में कोई बदलाव करेगा। अधिकांश एक्सर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रख सकता है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये में कमजोरी के कारण कुछ अर्थशास्त्री आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जता रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि जून की बैठक में RBI ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं कुछ एक्सपर्ट्स ऐसे भी हैं जो इस बैठक से ही दरों में बढ़ोतरी की शुरुआत की संभावना देख रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान महंगाई पर काबू पाने के लिए RBI को कम से कम 0.50 फीसदी तक ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
बता दें कि फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच RBI ने कुल 1.25 फीसदी की दर कटौती की थी। उस समय उम्मीद थी कि इसके बाद लंबे समय तक ब्याज दरें स्थिर रहेंगी। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनावों ने स्थिति बदल दी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर और महंगाई पर दिखाई देने लगा है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थी। हालांकि अब यह इस स्तर से नीचे आ गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर पड़ता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई में तेजी आ सकती है।
इसके अलावा भारतीय रुपया भी दबाव में है। हाल के महीनों में रुपया लगभग 90 रुपये प्रति डॉलर से गिरकर 95 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया है। कमजोर रुपया आयात को और महंगा बना देता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI को भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ सकता है।
महंगाई फिलहाल RBI के तय दायरे 2 से 6 फीसदी के भीतर है। अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.48 फीसदी रही थी। लेकिन तेल की ऊंची कीमतें, पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए दाम और रुपये की कमजोरी आने वाले महीनों में महंगाई को ऊपर धकेल सकती हैं। कई एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत महंगाई करीब 5.2 फीसदी रह सकती है, जो RBI के 4.6 फीसदी के अनुमान से अधिक है।
मानसून भी एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। यदि अल नीनो का असर देखने को मिलता है और बारिश सामान्य से कम होती है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
विकास दर के मोर्चे पर भी चुनौतियां दिखाई दे रही हैं। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में GDP वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची ऊर्जा कीमतें, कमजोर वैश्विक माहौल और सख्त वित्तीय परिस्थितियां आर्थिक विकास की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। कई अनुमानों के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6.6 से 6.8 फीसदी के बीच रह सकती है।
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