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4 min read | अपडेटेड April 29, 2026, 07:34 IST
सारांश
भारत में पेट्रोल पंप मालिकों की कमाई को लेकर अक्सर लोगों में उत्सुकता रहती है। असल में पंप मालिकों की कमाई सरकार द्वारा तय कमीशन पर निर्भर करती है। पेट्रोल पर करीब 3-4 रुपये और डीजल पर 2-3 रुपये प्रति लीटर का कमीशन मिलता है। यह कमाई पूरी तरह से बिक्री की मात्रा पर टिकी होती है।

पेट्रोल पंप पर तेल डलवाते वक्त क्या आपने कभी सोचा है कि पंप मालिक को इससे कितनी बचत होती है?
भारत में जब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर पेट्रोल पंप चलाने वाले मालिक इससे कितना कमाते होंगे। कई लोगों को लगता है कि तेल महंगा होने से पंप मालिकों की चांदी हो जाती है, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। पेट्रोल पंप चलाने वालों की कमाई सरकार और तेल कंपनियों द्वारा तय किए गए एक फिक्स कमीशन ढांचे पर टिकी होती है। इसका मतलब यह है कि बाजार में तेल की कीमत चाहे जो भी हो, पंप मालिक का मुनाफा हर लीटर के हिसाब से पहले से ही तय होता है। यह कमाई उतनी ज्यादा नहीं है जितनी बाहर से नजर आती है और इसी वजह से अक्सर पंप मालिक अपने मार्जिन को लेकर विरोध प्रदर्शन भी करते रहते हैं।
एक पेट्रोल पंप मालिक खुद से तेल की कीमतें या अपना मुनाफा तय नहीं कर सकता है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी तेल कंपनियां ही डीलर्स का कमीशन तय करती हैं। अगर औसत आंकड़ों की बात करें, तो एक पंप मालिक को पेट्रोल पर करीब 3 से 4 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 2 से 3 रुपये प्रति लीटर का कमीशन मिलता है। यह कमीशन अलग-अलग लोकेशन और तेल कंपनियों के प्राइसिंग स्ट्रक्चर के हिसाब से थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। अक्टूबर 2024 में तेल कंपनियों ने कई सालों के बाद डीलर्स के मार्जिन में थोड़ी बढ़ोतरी की थी, जिसमें पेट्रोल पर 0 65 रुपये और डीजल पर 0 44 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था।
अगर हम पेट्रोल की कुल कीमत को देखें, तो पंप मालिक की कमाई उसका बहुत छोटा हिस्सा होती है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में एक पंप मालिक की कुल कमाई तेल की खुदरा कीमत का सिर्फ 3 से 5 पर्सेंट ही होती है। बाकी का बड़ा हिस्सा तेल की बेस कॉस्ट, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार के वैट (VAT) में चला जाता है। कमीशन तय करने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें प्रति किलोलीटर एक तय रकम और तेल की बेस प्राइस का छोटा सा हिस्सा शामिल होता है। आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल डीलर्स को 3,100 रुपये प्रति किलोलीटर से ज्यादा और डीजल डीलर्स को 2,300 रुपये प्रति किलोलीटर से ज्यादा का कमीशन मिलता है।
पंप मालिकों का कहना है कि कहने को तो उन्हें हर लीटर पर कमीशन मिलता है, लेकिन उनके खर्चे भी बहुत बड़े होते हैं। एक पेट्रोल पंप को चलाने के लिए स्टाफ की सैलरी, बिजली का बिल, मशीनरी का मेंटेनेंस, जमीन का किराया और सुरक्षा जैसे कई जरूरी खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले चार्ज और सुरक्षा नियमों का पालन करने में भी काफी पैसा खर्च होता है। शहरी इलाकों में तो जमीन की ऊंची कीमत और रेंट की वजह से पंप मालिकों पर और भी ज्यादा बोझ रहता है। इन सभी खर्चों को निकालने के बाद एक पंप मालिक के पास जो असली मुनाफा बचता है, वह काफी कम हो जाता है।
पंप मालिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनका कमीशन तो फिक्स है, लेकिन उनके खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। महंगाई और बढ़ते वेतन की वजह से पंप चलाना मुश्किल होता जा रहा है। यही वजह है कि छोटे पंप या कम बिक्री वाले आउटलेट्स के लिए अपना अस्तित्व बचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। पेट्रोल पंप का बिजनेस पूरी तरह से वॉल्यूम यानी बिक्री की मात्रा पर टिका होता है। जिस पंप पर रोजाना जितना ज्यादा तेल बिकेगा, वहां का मालिक उतना ही ज्यादा मुनाफा कमा पाएगा। केवल प्रति लीटर मिलने वाले मार्जिन के भरोसे रहना मुश्किल है। इसी वजह से देश भर के डीलर्स समय-समय पर कमीशन बढ़ाने और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज उठाते रहते हैं।
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