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  1. चीनी प्रोडक्शन मौजूदा मार्केटिंग सीजन में 7% बढ़ा, MSP में संशोधन की मांग हुई तेज

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चीनी प्रोडक्शन मौजूदा मार्केटिंग सीजन में 7% बढ़ा, MSP में संशोधन की मांग हुई तेज

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 30, 2026, 14:53 IST

सारांश

पिछले साल की समान अवधि (30 अप्रैल तक) में यह उत्पादन 2.564 करोड़ टन था। चीनी मार्केटिंग सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। इस्मा के अनुसार, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन 80.9 लाख टन से बढ़कर 99.2 लाख टन हो गया।

चीनी प्रोडक्शन

चीनी प्रोडक्शन मौजूदा मार्केटिंग सीजन में 7% बढ़ा

भारत में 2025-26 मार्केटिंग सीजन में अब तक चीनी उत्पादन 7.32% बढ़कर 2.752 करोड़ टन रहा। उद्योग संगठन ‘भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ’ (Indian Sugar & Bio-energy Manufacturers Association, ISMA) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पिछले साल की समान अवधि (30 अप्रैल तक) में यह उत्पादन 2.564 करोड़ टन था। चीनी मार्केटिंग सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। इस्मा के अनुसार, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन 80.9 लाख टन से बढ़कर 99.2 लाख टन हो गया, जबकि कर्नाटक में यह 40.4 लाख टन से बढ़कर 48 लाख टन पहुंच गया। उत्तर प्रदेश में उत्पादन हालांकि घटकर 89.6 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 92.4 लाख टन था।

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संगठन ने 2025-26 मार्केटिंग सीजन के लिए ‘एथनॉल डायवर्जन’ के बाद कुल चीनी उत्पादन 2.93 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है, जो 2024-25 में दर्ज 2.612 करोड़ टन से अधिक है। ‘एथनॉल डायवर्जन’ से तात्पर्य गन्ने के रस या चीनी के शीरे या बी-हैवी मोलासेस को चीनी बनाने के बजाय एथनॉल बनाने के प्रोसेस में इस्तेमाल करना है। पेराई गतिविधि अब लगभग खत्म हो चुकी है और केवल पांच चीनी मिल ही चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 19 मिल काम कर रही थीं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की सभी मिल मुख्य सीजन के लिए बंद हो चुकी हैं। हालांकि कर्नाटक की कुछ इकाइयां जून-जुलाई 2026 में स्पेशन सीजन में काम करेंगी।

तमिलनाडु में भी कुछ मिल स्पेशल सीजन के दौरान संचालित होंगी और ऐतिहासिक रूप से ये दोनों राज्य इस अवधि में लगभग पांच लाख टन उत्पादन करते हैं। सीजन के समापन के करीब पहुंचने के साथ उद्योग ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में शीघ्र संशोधन की मांग की जा रही है। उद्योग का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और मिल स्तर पर कम प्राप्तियों से नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ रहा है जिससे गन्ना भुगतान बकाया बढ़ रहा है। केवल महाराष्ट्र में ही अप्रैल मध्य तक गन्ना भुगतान बकाया 2,130 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी पीरियड के 752 करोड़ रुपये से लगभग तीन गुना है।

उद्योग ने सरकार से एथनॉल मिश्रण लक्ष्य को मौजूदा ई20 कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर ई25 और ई85/ई100 जैसे उच्च स्तर तक ले जाने का भी आग्रह किया है। इसके साथ ही ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों के तेजी से विस्तार और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों के युक्तिकरण की मांग की गई है। संगठन ने यह भी कहा कि एथनॉल खरीद मूल्य में देरी से संशोधन के कारण इकाइयों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसलिए निवेशकों को स्पष्ट नीति संकेत देने और क्षमता उपयोग बढ़ाने के लिए कीमतों में जल्द संशोधन जरूरी है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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