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4 min read | अपडेटेड April 30, 2026, 11:04 IST
सारांश
वेस्ट टेक्सास इंटर-हॉर्मुजेडिएट वायदा 107 डॉलर से ऊपर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि जब तक तेहरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक वह ईरान के बंदरगाहों की नेवल ब्लॉकेड नहीं हटाएंगे, जबकि ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है।

कच्चे तेल के दामों में जबर्दस्त तेजी, क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
ईरान और अमेरिका के बीच सुलह फिलहाल होती नजर नहीं आ रही है और सीजफायर होने के बावजूद स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है और यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमत चार साल में अपने हाइएस्ट लेवल पर पहुंच गई। अमेरिकी नेवी ने नाकाबंदी (Blockade) में कोई ढील न देने का संकेत दिया और ईरान से जुड़े जब्त किए गए टैंकरों की वापसी की मांग की। बुधवार को जून 2022 के बाद के हाइएस्ट लेवल पर पहुंचने के बाद ब्रेंट क्रूड लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था, जिसमें 6% से अधिक की वृद्धि हुई थी। वहीं आज ब्रेंट क्रूड का दाम 125 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया जबकि ग्लोबल शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई।
अमेरिका-ईरान वार्ता ठप पड़ने से होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और युद्ध के स्थायी अंत को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड के जून में आपूर्ति वाले अनुबंध का भाव 6.2% चढ़कर 125.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि जुलाई में आपूर्ति वाले अनुबंधों की कीमत 3.1% की बढ़त के साथ 113.85 डॉलर प्रति बैरल हो गई। नौवें सप्ताह में प्रवेश कर चुके इस युद्ध के खत्म होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी है जबकि होर्मुज स्ट्रेट बंद है जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस बीच, अमेरिकी वायदा बाजार और एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई।
वेस्ट टेक्सास इंटर-हॉर्मुजेडिएट वायदा 107 डॉलर से ऊपर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि जब तक तेहरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक वह ईरान के बंदरगाहों की नेवल ब्लॉकेड नहीं हटाएंगे, जबकि ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। अमेरिकी अधिकारी ईरानी कच्चे तेल के खरीदारों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत ब्लॉकेड लागू करने वाली नेवी द्वारा जब्त किए गए ईरान से जुड़े दो तेल टैंकरों की वापसी की मांग करके अमेरिका तेहरान पर अपना दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी आर्मी ने मध्य पूर्व में हाइपरसोनिक मिसाइलें भेजने का भी अनुरोध किया है, जो इन हथियारों की तैनाती का पहला मौका होगा।
पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आने के बावजूद पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिटेल कीमतें स्थिर रहने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर क्रम से 14 रुपये और 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120-125 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती है, तो पेट्रोलियम कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन आगे भी नेगेटिव बना रहेगा, जिससे कंपनियों का प्रॉफिट प्रभावित हो रहा है।
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद वाहन ईंधन की कीमतों में स्थिरता से पेट्रोलियम कंपनियों की मुनाफा कमाने की क्षमता पर असर पड़ रहा है।’ रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के अलावा रसोई गैस (एलपीजी) पर भी भारी ‘अंडर-रिकवरी’ यानी नुकसान होने की आशंका है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में करीब 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
वहीं, इस पीरियड में उर्वरक सब्सिडी बढ़कर 2.05 लाख करोड़ से 2.25 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच जाने का अनुमान है, जो 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से काफी अधिक है। इक्रा ने कहा कि करीब 20% ग्लोबल तेल एवं गैस आपूर्ति वाले समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधाओं के कारण ईंधन, उर्वरक और रसायनों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इससे कीमतों में वृद्धि और तेल रिफाइनरी और विपणन कंपनियों पर लागत दबाव बढ़ा है। फरवरी अंत में पश्चिम एशिया संकट शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70-72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी, जो 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।
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