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  1. कच्चे तेल का दाम 2022 के बाद पहली बार $120 प्रति बैरल के पार पहुंचा, क्या पेट्रोल-डीजल अब होगा महंगा?

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कच्चे तेल का दाम 2022 के बाद पहली बार $120 प्रति बैरल के पार पहुंचा, क्या पेट्रोल-डीजल अब होगा महंगा?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड April 30, 2026, 08:47 IST

सारांश

वेस्ट टेक्सास इंटर-हॉर्मुजेडिएट वायदा 107 डॉलर से ऊपर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि जब तक तेहरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक वह ईरान के बंदरगाहों की नेवल ब्लॉकेड नहीं हटाएंगे, जबकि ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है।

कच्चा तेल

कच्चे तेल के दामों में जबर्दस्त तेजी, क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

ईरान और अमेरिका के बीच सुलह फिलहाल होती नजर नहीं आ रही है और सीजफायर होने के बावजूद स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है और यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमत चार साल में अपने हाइएस्ट लेवल पर पहुंच गई। अमेरिकी नेवी ने नाकाबंदी (Blockade) में कोई ढील न देने का संकेत दिया और ईरान से जुड़े जब्त किए गए टैंकरों की वापसी की मांग की। बुधवार को जून 2022 के बाद के हाइएस्ट लेवल पर पहुंचने के बाद ब्रेंट क्रूड लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था, जिसमें 6% से अधिक की वृद्धि हुई थी।

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वेस्ट टेक्सास इंटर-हॉर्मुजेडिएट वायदा 107 डॉलर से ऊपर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्सियोस को बताया कि जब तक तेहरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक वह ईरान के बंदरगाहों की नेवल ब्लॉकेड नहीं हटाएंगे, जबकि ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। अमेरिकी अधिकारी ईरानी कच्चे तेल के खरीदारों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके तहत ब्लॉकेड लागू करने वाली नेवी द्वारा जब्त किए गए ईरान से जुड़े दो तेल टैंकरों की वापसी की मांग करके अमेरिका तेहरान पर अपना दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी आर्मी ने मध्य पूर्व में हाइपरसोनिक मिसाइलें भेजने का भी अनुरोध किया है, जो इन हथियारों की तैनाती का पहला मौका होगा।

भारत में क्या है पेट्रोल-डीजल की स्थिति?

पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आने के बावजूद पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिटेल कीमतें स्थिर रहने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर क्रम से 14 रुपये और 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120-125 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती है, तो पेट्रोलियम कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन आगे भी नेगेटिव बना रहेगा, जिससे कंपनियों का प्रॉफिट प्रभावित हो रहा है।

इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद वाहन ईंधन की कीमतों में स्थिरता से पेट्रोलियम कंपनियों की मुनाफा कमाने की क्षमता पर असर पड़ रहा है।’ रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के अलावा रसोई गैस (एलपीजी) पर भी भारी ‘अंडर-रिकवरी’ यानी नुकसान होने की आशंका है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में करीब 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

वहीं, इस पीरियड में उर्वरक सब्सिडी बढ़कर 2.05 लाख करोड़ से 2.25 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच जाने का अनुमान है, जो 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से काफी अधिक है। इक्रा ने कहा कि करीब 20% ग्लोबल तेल एवं गैस आपूर्ति वाले समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधाओं के कारण ईंधन, उर्वरक और रसायनों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इससे कीमतों में वृद्धि और तेल रिफाइनरी और विपणन कंपनियों पर लागत दबाव बढ़ा है। फरवरी अंत में पश्चिम एशिया संकट शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70-72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी, जो 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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