बिजनेस न्यूज़
.png)
3 min read | अपडेटेड January 06, 2026, 15:30 IST
सारांश
व्यापारिक संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से निर्यात ऋण पर 4% ब्याज सब्सिडी, सड़क और रेल माल ढुलाई के लिए 3% समर्थन और शुल्क माफी योजनाओं (आरओडीटीईपी - निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) के समय पर वितरण की मांग की।

देश के चावल किसानों के लिए खास मांगें क्या हैं?
भारतीय चावल निर्यातक संघ (Indian Rice Exporters Federation, IREF) ने सरकार से आने वाले 2026-27 बजट में कर प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी और माल ढुलाई सहायता देने का मंगलवार को आग्रह किया जिससे स्थिरता संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए इस सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया जा सके। व्यापारिक संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से निर्यात ऋण पर 4% ब्याज सब्सिडी, सड़क और रेल माल ढुलाई के लिए 3% समर्थन और शुल्क माफी योजनाओं (आरओडीटीईपी - निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) के समय पर वितरण की मांग की। आईआरईएफ के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने वित्त मंत्री को भेजे एक ज्ञापन में कहा, ‘ये उपाय निर्यातकों की लागत को सीधे तौर पर कम करेंगे, स्थिरता को प्रोत्साहित करेंगे और मूल्यवर्धित लदान को बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे।’
उन्होंने कहा कि वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40% है। उसने वित्त वर्ष 2024-25 में 170 से अधिक देशों को लगभग 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया। गर्ग ने कहा, ‘चावल का निर्यात एक रणनीतिक आर्थिक संपत्ति बना हुआ है जो किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार एवं विदेशी बाजार को सहारा देता है।’ उन्होंने कहा कि इस प्रमुख खाद्य पदार्थ में निरंतर नेतृत्व भारत की आर्थिक मजबूती और कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाता है।
गर्ग ने साथ ही कहा कि इस सेक्टर को हालांकि कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिनमें प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में भूजल का कम होना, खरीद एवं भंडारण की उच्च लागत और बाजार में अस्थिरता शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय बजट लक्षित राजकोषीय एवं सहायक उपायों के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ स्थिरता और किसानों के परिणामों में सुधार कर सकता है।’ आईआरईएफ ने प्रमाणित जल-बचत एवं कम उत्सर्जन वाली पद्धतियों जैसे कि वैकल्पिक गीलापन और सुखाने (एडब्ल्यूडी), सीधे बोए गए चावल (डीएसआर), ‘लेजर लेवलिंग’ और ऊर्जा-कुशल ‘मिलिंग’ से जुड़े कर और निवेश प्रोत्साहनों के माध्यम से टिकाऊ चावल उत्पादन के लिए समर्थन मांगा।
संघ ने किसानों को बेहतर प्रतिफल देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद पर दबाव कम करने के लिए उच्च मूल्य वाली धान एवं चावल की किस्मों प्रीमियम बासमती, जीआई/जैविक/विशेष गैर-बासमती की ओर खेती का रकबा स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहन देने का भी आह्वान किया। कार्यशील पूंजी के संबंध में आईआरईएफ ने लघु एवं मझोले उद्यम चावल निर्यातकों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात ऋण पर 4% ब्याज सब्सिडी की मांग की। संघ ने कहा, ‘इससे वित्तपोषण लागत कम होती है, नकदी प्रवाह सुगम होता है और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है।’ एक प्रमुख मांग कुछ चावल किस्मों पर 20% निर्यात शुल्क लगाए जाने के बाद उत्पन्न हुए पूर्वव्यापी शुल्क दावों की एकमुश्त छूट है।
आईआरईएफ ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रीय अधिकारियों तथा निर्यातकों के बीच शुल्क आधार एवं गणना पद्धति की असंगत व्याख्या के कारण अनजाने में विसंगतियां उत्पन्न हुईं। संघ ने प्रीमियम बाजारों में भारत की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए निर्यात वित्त गारंटी और अनुपालन बुनियादी ढांचे (परीक्षण, पता लगाने की क्षमता, गुणवत्ता आश्वासन) को मजबूत करने का भी आह्वान किया है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख
How To Use Open Interest For Intraday Trading: Complete Guide
What Is Stop Loss In Trading? Meaning, Types, & How To Use It
What Is ICRA? Why Its Credit Ratings Matter To Investors
Explore Learning Centre
All topics · stocks, MFs, derivatives, IPOs