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  1. पहली बार 13,000 डॉलर के पार पहुंचा कॉपर का भाव, इन दो वजहों से आई तेजी

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पहली बार 13,000 डॉलर के पार पहुंचा कॉपर का भाव, इन दो वजहों से आई तेजी

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 06, 2026, 08:47 IST

सारांश

ग्लोबल मार्केट में कॉपर यानी तांबे की कीमतों ने 13,000 डॉलर प्रति टन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। चिली में हड़ताल और इंडोनेशिया में हुए हादसों की वजह से खदानों से आपूर्ति बाधित हुई है। वहीं अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले संभावित टैरिफ ने बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है।

Copper Price Record High 6 jan

कॉपर की कीमतें $13,000 प्रति टन के पार निकल गई हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की सेहत बताने वाले तांबे यानी कॉपर की कीमतों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में नया इतिहास रच दिया है। लंदन मेटल एक्सचेंज में तांबे का भाव पहली बार 13,000 डॉलर प्रति टन के लेवल को छू गया है। पिछले साल से शुरू हुई कीमतों में बढ़त का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को लंदन के बाजार में बेंचमार्क फ्यूचर्स में 4.3 प्रतिशत तक की भारी तेजी दर्ज की गई। तांबे की कीमतों में आई इस रिकॉर्ड तोड़ बढ़त ने औद्योगिक जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि यह धातु आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे का आधार मानी जाती है।

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सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें

तांबे की कीमतों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह खदानों से होने वाली सप्लाई में आ रही रुकावटें हैं। चिली की मंटोवर्दे खदान में चल रही कर्मचारियों की हड़ताल ने आपूर्ति को काफी प्रभावित किया है। इससे पहले दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तांबे की खदान जो इंडोनेशिया में स्थित है वहां एक घातक दुर्घटना हुई थी। इसके साथ ही डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में भी भूमिगत बाढ़ के कारण उत्पादन ठप पड़ गया था। इन सभी घटनाओं ने बाजार में तांबे की उपलब्धता को कम कर दिया है जबकि डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक कार की बैटरी के निर्माण के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

ये है दूसरा बड़ा कारण

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों ने भी बाजार में हलचल पैदा कर दी है। साल 2026 में प्राइमरी कॉपर पर दोबारा टैरिफ लगाने की योजना ने व्यापारियों को सतर्क कर दिया है। इसी डर से पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका की ओर तांबे की खेप भेजने की होड़ लग गई है। इस वजह से दुनिया के अन्य हिस्सों में तांबे की भारी कमी महसूस की जा रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिका के पास वर्तमान में वैश्विक भंडार का लगभग आधा हिस्सा है जबकि वहां तांबे की मांग दुनिया की कुल मांग की तुलना में 10 प्रतिशत से भी कम है।

भविष्य में और गहरा सकता है संकट

यूबीएस ग्रुप के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण तांबे के भंडार का प्रवाह पूरी तरह से बिगड़ गया है। लंदन के बाजार में फिलहाल बैकवर्डेशन की स्थिति बनी हुई है जिसका मतलब है कि आने वाले समय में तांबे की किल्लत और ज्यादा बढ़ सकती है। चाइना सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि साल 2026 में वैश्विक स्तर पर तांबे की कमी एक लाख टन से भी ज्यादा हो सकती है। तांबा ऊर्जा परिवर्तन यानी रिन्यूएबल एनर्जी की दिशा में बढ़ने के लिए सबसे जरूरी धातु है और इसकी बढ़ती कीमतें इस बदलाव की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।

अगर पिछले साल यानी 2025 की बात करें तो तांबे की कीमतों में 42 प्रतिशत का उछाल आया था। साल 2009 के बाद यह एक साल में होने वाली सबसे बड़ी बढ़त थी। आपूर्ति में कमी और क्षेत्रीय स्तर पर टैरिफ के कारण पैदा हुए असंतुलन ने तांबे को आज इस मुकाम पर पहुंचा दिया है। मंगलवार को दोपहर तक लंदन मेटल एक्सचेंज में तांबे का भाव 12,963.50 डॉलर प्रति टन के करीब कारोबार कर रहा था। दुनिया भर के निर्माता और निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या आपूर्ति की यह बाधाएं दूर होंगी या तांबा और भी महंगे नए रिकॉर्ड बनाएगा।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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