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3 min read | अपडेटेड June 05, 2026, 08:10 IST
सारांश
भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट और उनके पार्ट्स, कीमती धातुएं, टेक प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदने की भी मंशा जताई है।

भारत-अमेरिका ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की प्रतिबद्धता जताई (Photo: Shutterstock)
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड वार्ता का एक और दौर पूरा हो गया। दोनों देशों के प्रमुख नेगोशिएटर्स के बीच 1 से 4 जून के बीच बातचीत का एक और दौर पूरा हुआ और इसके बाद ऐसा लग रहा है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर जल्द ही मुहर लग सकती है। दोनों देशों ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा। 1 से 4 जून तक चली बातचीत के खत्म होने के बाद यह बयान जारी किया गया। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ‘बातचीत सहयोग और व्यावहारिकता की भावना के साथ हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाले समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई।’ बयान के मुताबिक, दोनों देशों के व्यापार दलों ने वस्तु व्यापार (Good trade), नॉन-टैरिफ उपायों, कस्टम ड्यूटी, व्यापार सुगमता, इकॉनमिक सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन और आपसी हित (Mutual interest) के अन्य मुद्दों पर क्रीएटिव और पॉजिटिव चर्चा की।
अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उसके चीफ नेगोशिएटर ब्रेंडन लिंच ने किया जबकि भारतीय पक्ष की अगुवाई वाणिज्य विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी और नेगोशिएटर दर्पण जैन ने की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement, BTA) की रूपरेखा को अंतिम रूप दे चुके हैं और अब अंतरिम व्यापार समझौते और व्यापक बीटीए की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इससे पहले कहा था कि पहले चरण के समझौते के ज्यादातर पॉइंट्स पर सहमति बन चुकी है और अब कुछ 'छोटे मुद्दों' पर ही चर्चा चल रही है।
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान में अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय करने की घोषणा की थी। इसमें अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी और रूसी तेल खरीद से जुड़े 25% टैरिफ को भी हटा दिया था। बाकी टैरिफ को भी घटाकर 18% करने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक जवाबी सीमा शुल्कों को खारिज कर दिया। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10% का समान शुल्क लागू करने की घोषणा की। प्रस्तावित ढांचे के तहत भारत ने अमेरिकी इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ खत्म या कम करने के साथ कई एग्रिकल्चरल और फूड प्रोडक्ट्स पर रियायत देने का भी प्रस्ताव रखा है। इनमें पशु आहार का लाल ज्वार, मेवे, ताजा और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट और उनके पार्ट्स, कीमती धातुएं, टेक प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदने की भी मंशा जताई है। अमेरिकी टैरिफ स्ट्रक्चर में हाल के बदलावों के कारण इस समझौते में संशोधन की जरूरत पड़ सकती है, ताकि भारत को श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में बढ़त मिल सके। अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इनका द्विपक्षीय व्यापार 87.3 अरब डॉलर के निर्यात और 52.9 अरब डॉलर के आयात के साथ महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।
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