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4 min read | अपडेटेड June 30, 2026, 08:06 IST
सारांश
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगे अस्थाई रेगुलेटरी नियमों को हटाने का बड़ा फैसला किया है। यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। वेस्ट एशिया संकट के समय शुरू की गई ये पाबंदियां अब देश में ईंधन की सप्लाई सुधरने के बाद पूरी तरह से खत्म कर दी गई हैं।

सरकार ने 1 जुलाई 2026 से पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगी सभी अस्थाई पाबंदियां हटाने का एलान किया है। (Photo: Shutterstock)
देश में पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की बिक्री और उनके डिस्ट्रीब्यूशन पर लगाई गई सभी अस्थाई पाबंदियों को पूरी तरह से वापस लेने का एलान कर दिया है। सरकार का यह नया फैसला 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू होने जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स यानी पेट्रोल पंपों पर तेल की बिक्री अब पहले की तरह सामान्य रूप से चलेगी। सरकार ने देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मौजूदा सप्लाई की समीक्षा करने के बाद यह माना है कि अब जनहित में इन पाबंदियों की कोई जरुरत नहीं बची है।
इस पूरे मामले की शुरुआत कुछ समय पहले इंटरनेशनल मार्केट में मचे हड़कंप से हुई थी। वेस्ट एशिया संकट के दौरान जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया और सप्लाई प्रभावित हुई, तब भारत सरकार ने देश के आम रिटेल ग्राहकों को इस तेज बढ़ोतरी से बचाने का काम किया था। सरकार ने वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों का असर आम जनता पर नहीं पड़ने दिया और देश में पेट्रोल और डीजल के रिटेल दामों को पूरी तरह से स्थिर बनाए रखा। सरकार के इस कदम से आम लोगों को तो राहत मिल गई, लेकिन इसकी वजह से घरेलू बाजार में कीमतों को लेकर एक नया अंतर पैदा हो गया।
सरकार द्वारा रिटेल कीमतें स्थिर रखने की वजह से आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े, लेकिन जो बड़े खरीदार थे यानी बल्क कंज्यूमर्स, उनके लिए कीमतें काफी अलग थीं। इस वजह से पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले तेल के दामों और बल्क खरीदारों के लिए लागू होने वाले दामों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर पैदा हो गया। जब कुछ औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत खरीदारों ने देखा कि आम पेट्रोल पंपों पर तेल काफी सस्ता मिल रहा है, तो उन्होंने अपनी जरुरत के लिए सीधे रिटेल आउटलेट्स से ही भारी मात्रा में डीजल और पेट्रोल खरीदना शुरू कर दिया।
बड़े खरीदारों द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने की वजह से बाजार का पूरा संतुलन बिगड़ने लगा था। इसके चलते बाजार में तेल की हेराफेरी, जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के मामले सामने आने लगे, जिससे आम जनता को मिलने वाले ईंधन के सही डिस्ट्रीब्यूशन पर बुरा असर पड़ रहा था। इस गंभीर स्थिति से निपटने और आम ग्राहकों को बिना रुकावट तेल देने के लिए सरकार ने 12 जून 2026 को कुछ अस्थाई नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत पेट्रोल पंपों पर प्रति ग्राहक या प्रति वाहन हर दिन अधिकतम 200 लीटर हाई स्पीड डीजल देने की लिमिट तय की गई थी और बड़े खरीदारों को तय कंज्यूमर पंपों से ही तेल लेने को कहा गया था।
अब सरकार ने देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई की स्थिति की नए सिरे से पूरी समीक्षा की है। सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि जनता के हित को देखते हुए अब इन अस्थाई रेगुलेटरी नियमों को जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई काफी बेहतर हुई है और सामान्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से बहाल हो चुकी हैं। इन अस्थाई कदमों ने संकट के समय देश भर में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और रिटेल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में मदद की। अब 1 जुलाई से इन नियमों के हटने के बाद पूरा ऑपरेशन पहले की तरह सामान्य रूप से काम करने लगेगा।
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