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  1. क्या देश में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल? केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने साफ शब्दों में दे दिया जवाब, अब जानें एक लीटर का भाव

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क्या देश में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल? केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने साफ शब्दों में दे दिया जवाब, अब जानें एक लीटर का भाव

Upstox

5 min read | अपडेटेड July 03, 2026, 09:31 IST

सारांश

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि भारत ने इस संकट के दौरान भी देश में बिना किसी किल्लत के ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित की है। हालांकि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल अब गिरकर 68 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया है, लेकिन सरकारी रिटेलर्स ने अभी तक घरेलू कीमतों में कोई कटौती नहीं की है।

hardeep Puri

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेल कंपनियों के तिमाही घाटे और ईंधन की कीमतों पर बड़ी जानकारी साझा की। Image: X/@HardeepSPuri

ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और भारतीय ऊर्जा क्षेत्र से एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जानकारी दी है कि देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को जून में समाप्त हुई चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की बिक्री पर लगभग 74,781 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। यह बड़ा वित्तीय झटका कंपनियों को तब लगा है जब उन्होंने वैश्विक स्तर पर ऊंचे दामों पर कच्चा तेल खरीदा लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए इसकी पूरी लागत का बोझ आम जनता पर नहीं डाला।

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दो महीने पहले खरीदे गए महंगे स्टॉक का दिख रहा असर

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि तेल कंपनियों को हुआ यह घाटा 30 जून तक की अवधि का है, जो संकट के चरम समय के दौरान खरीदे गए महंगे क्रूड ऑयल की वास्तविक लागत को दर्शाता है। उन्होंने इसके पीछे का पूरा गणित समझाते हुए कहा कि भारतीय तेल कंपनियां आमतौर पर लगभग दो महीने पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल का ऑर्डर देकर उसकी खरीद पूरी कर लेती हैं। इस वजह से सरकारी रिफाइनरियां इस समय उन खेपों (Cargoes) को प्रोसेस कर रही हैं जिन्हें अप्रैल और मई के शुरुआती हफ्तों में खरीदा गया था। उस समय दुनिया भर में सप्लाई चेन बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम अपने उच्चतम स्तर पर बने हुए थे।

कच्चे तेल की कीमतों का उतार-चढ़ाव और ताजा स्थिति

अगर हम पिछले कुछ महीनों के दौरान भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमतों पर नजर डालें, तो अप्रैल के महीने में क्रूड ऑयल का औसत दाम 114.48 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद मई के महीने में इसमें थोड़ी सी नरमी देखी गई और यह 106.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि जून का महीना आते-आते स्थितियां थोड़ी सुधरीं और औसत दाम गिरकर 83.22 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक 14 सूत्रीय शांति समझौते के प्रस्ताव (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल काफी हद तक कम हुआ है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में एक बहुत तेज और बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद 1 जुलाई को कच्चे तेल का भाव गिरकर 68.28 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर आ गया है।

क्या देश में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल?

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई इस बड़ी गिरावट के बाद जब केंद्रीय मंत्री से यह पूछा गया कि क्या देश के आम उपभोक्ताओं को भी अब पेट्रोल और डीजल की सस्ती कीमतों का तोहफा मिलेगा, तो उन्होंने एक बहुत ही संतुलित जवाब दिया। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ हफ्तों तक इसी तरह निचले स्तरों पर स्थिर बनी रहती हैं, तो घरेलू कीमतों में कटौती की मांग करना उपभोक्ताओं का एक बिल्कुल वैध और जायज सवाल होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वर्तमान में तेल कंपनियां अपने पुराने घाटे की भरपाई करने और बाजार की स्थिरता को बारीकी से देखने में जुटी हुई हैं, जिसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

इस भारी वित्तीय नुकसान के बावजूद केंद्रीय मंत्री ने संकट के दौर में भारतीय ऊर्जा सुरक्षा के बेहतरीन मैनेजमेंट की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में मचे इस बड़े संकट और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बाद भी भारत में एक दिन के लिए भी ईंधन की सप्लाई प्रभावित नहीं हुई। पूरे मार्च, अप्रैल, मई और जून के महीनों के दौरान देश के किसी भी हिस्से या किसी भी पेट्रोल पंप पर तेल खत्म होने यानी 'ड्राई-आउट' की कोई भी घटना सामने नहीं आई। पूरे देश में कहीं भी उपभोक्ताओं को तेल के लिए लंबी कतारों में नहीं खड़ा होना पड़ा और न ही किसी प्रकार की किल्लत का सामना करना पड़ा, जो कि सरकार और कंपनियों के बेहतरीन तालमेल को साबित करता है।

दिल्ली में क्या है ताजा भाव?

घरेलू बाजार में कीमतों के मौजूदा हाल को देखें तो सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आंशिक बदलाव किया था। इसके बाद से देश में ईंधन के दाम पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं। देश की राजधानी दिल्ली में आज भी इंडियन ऑयल के आउटलेट्स पर पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की पुरानी दरों पर ही बिक रहा है। हालांकि, सरकारी कंपनियों से अलग राह चुनते हुए निजी क्षेत्र की बड़ी रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने एक साहसिक कदम उठाया है। नायरा एनर्जी ने कच्चे तेल में आई नरमी का पूरा फायदा सीधे आम जनता तक पहुंचाते हुए 1 जुलाई से अपने 7,000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों के पूरे नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में सीधे 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की एक बहुत बड़ी कटौती कर दी है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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