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4 min read | अपडेटेड January 05, 2026, 09:26 IST
सारांश
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए हमले के बाद आज सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी आने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक तनाव के कारण बुलियन मार्केट में गैप-अप ओपनिंग होगी। वेनेजुएला के पास सोने का विशाल भंडार होने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

वैश्विक तनाव के बीच सोने और चांदी की चमक और बढ़ने की संभावना। | Image: Shutterstock
MCX पर आज बुलियन बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। सोना 10 ग्राम 1,619 रुपये उछलकर 1,37,380 रुपये पर कारोबार करता नजर आया, जबकि चांदी में और भी तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 6,645 रुपये की मजबूती के साथ 2,42,961 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। शुरुआती सेशन में सोने का दायरा 1,36,300 से 1,38,200 रुपये के बीच रहा, वहीं चांदी 2,42,582 से 2,49,900 रुपये के लेवल तक गई। बता दें कि साल 2025 में सोने ने पहले ही 1979 के बाद की अपनी सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की थी और अब इस नए संकट ने आग में घी डालने का काम किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया है। इस घटना के बाद दक्षिण अमेरिका में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। वेनेजुएला के पास दुनिया का एक बहुत बड़ा सोने का भंडार मौजूद है। आंकड़ों के अनुसार वहां करीब 161 मीट्रिक टन सोना है जिसकी कीमत वर्तमान बाजार दर पर लगभग 22 अरब डॉलर के करीब है। इस बड़े भंडार पर नियंत्रण और युद्ध की स्थिति ने बाजार में सोने की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
युद्ध के हालातों के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर भी सबकी नजर टिकी हुई है। हालांकि साल 2026 के पहले सत्र में तेल की कीमतें स्थिर रही हैं लेकिन भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 61 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही भारतीय रुपये की कमजोरी भी सोने के दाम बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। साल 2025 में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत तक टूट गया था। रुपये की इस कमजोरी की वजह से भारत में आयात होने वाला सोना महंगा हो जाता है जिसका सीधा बोझ घरेलू ग्राहकों और निवेशकों पर पड़ता है।
बाजार के जानकारों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। गोल्ड और सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी का अनुपात फिलहाल 60 के करीब पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि जब यह अनुपात 80 के नीचे आता है तो चांदी ओवरबॉट जोन में चली जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय सोने की कीमत 4,345.50 डॉलर प्रति औंस है जबकि चांदी 71.30 डॉलर प्रति औंस पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति में चांदी में नई खरीदारी करने से बचना चाहिए क्योंकि यह पहले ही काफी महंगी हो चुकी है और इसमें सुधार की गुंजाइश बन सकती है।
सोने की मांग बढ़ने के पीछे केवल युद्ध ही एक कारण नहीं है बल्कि टेदर जैसी गैर-सरकारी संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी भी है। टेदर अपनी कॉर्पोरेट सुरक्षा और बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए भारी मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहा है। टेदर के पास इस समय 100 टन से ज्यादा सोना जमा है जिसे वह एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहा है। केंद्रीय बैंकों की तरह अब बड़ी तकनीक आधारित वित्तीय कंपनियां भी सोने को अपने सुरक्षित भंडार का हिस्सा बना रही हैं। इससे सोने की कीमतों को नीचे से एक मजबूत सहारा मिल रहा है और बड़ी गिरावट की संभावना कम हो गई है।
अभी की बात करें तो रिटेल मार्केट में सोना एक लाख रुपए से अधिक पर कारोबार कर रहा है। इंडियन बुलियन के ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 134415 रुपये है। वहीं 18 कैरेट 100811 रुपये में मिल रहा है। चांदी का भी यही हाल है। वह 234906 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही है।
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