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3 min read | अपडेटेड July 06, 2025, 20:36 IST
सारांश
सोने की कीमतों में इस सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि इन्वेस्टर्स की नजर 9 जुलाई की अहम टैरिफ डेडलाइन, अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख सेंट्रल बैंकों के नीतिगत संकेतों और प्रमुख ग्लोबल वृहद आर्थिक आंकड़ों (Global macroeconomic data) पर है। विश्लेषकों का ऐसा मानना है।

सोने की कीमतों में दिख सकता है भारी उतार-चढ़ाव
7 जुलाई से शुरू हो रहे सप्ताह में सोने की कीमतों पर इन्वेस्टर्स की नजरें गड़ी रहेंगी। सोने की कीमतों में इस सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि इन्वेस्टर्स की नजर 9 जुलाई की अहम टैरिफ डेडलाइन, अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख सेंट्रल बैंकों के नीतिगत संकेतों और प्रमुख ग्लोबल वृहद आर्थिक आंकड़ों (Global macroeconomic data) पर है। विश्लेषकों का ऐसा मानना है। विश्लेषकों ने कहा, ‘ये फैक्टर्स निकट भविष्य में सोने की कीमतों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि व्यापारियों के किसी भी प्रमुख नीतिगत संकेत या भू-राजनीतिक घटनाक्रम से पहले सतर्क रहने की संभावना है।
भारत सहित कई देशों से आयात पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ पर 90-दिवसीय निलंबन की अवधि 9 जुलाई को खत्म हो रही है, जिससे अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर 26% एक्स्ट्रा टैरिफ लगने का जोखिम फिर से बढ़ गया है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के जिंस एंड मुद्रा शोध के उपाध्यक्ष (ईबीजी) प्रणव मेर ने कहा, ‘मुख्य केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती, अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच व्यापार वार्ता के परिणाम और आगामी ग्लोबल आर्थिक आंकड़ों पर नजर रहेगी, जो निकट भविष्य में सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।’
निवेशक यूएस फेड की एफओएमसी (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी) की बैठक पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। पिछले सप्ताह, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त डिलीवरी के लिए कीमती धातु की कीमत 1,563 रुपये या 1.61% बढ़ गई। वेंचुरा में जिंस डेस्क के प्रमुख एन एस रामास्वामी ने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत फिलहाल 3,345 डॉलर प्रति औंस है और अमेरिका में मजबूत वृहद आर्थिक आंकड़ों के कारण बिकवाली का दबाव रह सकता है। इन आंकड़ों से फेडरल रिजर्व द्वारा जुलाई में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर असर पड़ा है।
कुछ सुधारात्मक तेजी के बावजूद, रामास्वामी ने कहा कि ‘शॉर्ट-टर्म परिदृश्य समेकन और सुधारात्मक गति का पक्षधर है, जिसके बाद व्यापक गिरावट की प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है।’ हालांकि, रामास्वामी ने कहा कि अमेरिका में राजकोषीय घाटे की चिंता और ट्रंप के टैरिफ के आसन्न निर्णय से नई अस्थिरता पैदा हो सकती है और पीली धातु की मांग बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि मई में केंद्रीय बैंकों ने ग्लोबल गोल्ड रिजर्व में 20 टन सोना जोड़ा। एंजेल वन के प्रथमेश माल्या ने कहा कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और मौजूदा भू-राजनीतिक चिंताओं से सोने की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। माल्या ने कहा, ‘डॉलर की कमजोरी 2024 के साथ-साथ 2025 में भी सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण रही है। यह रुझान साल के बाकी हिस्से में भी जारी रह सकता है।’
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