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5 min read | अपडेटेड June 30, 2026, 09:19 IST
सारांश
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 1 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई है, जिससे यह लगातार चौथे महीने मंदी की तरफ बढ़ रहा है। भारत में भी दाम गिरने के डर से लोग अपनी पुरानी ज्वेलरी बेचकर कैश कराने में जुट गए हैं। चालू तिमाही में पुराने सोने की बिक्री में 43 पर्सेंट का बड़ा उछाल आया है।

सोने के दामों में आई हालिया गिरावट के बाद पुराना सोना बेचने के लिए लोग ज्वेलर्स की दुकानों पर पहुंच रहे हैं।
वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। 30 जून को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम 1 पर्सेंट से भी ज्यादा टूट गए, जिसके बाद यह लगातार चौथा ऐसा महीना बन गया है जब सोने में मंदी देखी जा रही है। इस बड़ी गिरावट के बीच भारतीय परिवारों में अपने घरों में रखी पुरानी ज्वेलरी को बेचकर कैश कराने की एक नई होड़ मच गई है। लोगों को डर है कि अगर सोने की कीमतें आगे और ज्यादा गिर गईं, तो उन्हें अपने सोने की सही कीमत नहीं मिल पाएगी। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस समय का फायदा उठाकर मुनाफा कमाने के लिए बाजार में पहुंच रहे हैं और पुराना सोना बेच रहे हैं।
वैश्विक बाजार में 30 जून को सोने और चांदी की कीमतों पर भारी दबाव देखा गया। हाजिर सोना यानी स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.5 पर्सेंट गिरकर 3,957.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इस गिरावट के साथ ही मंथली लेवल पर इसमें पूरे 12.7 पर्सेंट की बड़ी कमी दर्ज की जा चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में अगस्त डिलीवरी के लिए सोने का भाव 1.7 पर्सेंट टूटकर 3,971.60 डॉलर पर आ गया। सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मंदी का साया रहा और स्पॉट सिल्वर की कीमत 2.4 पर्सेंट की गिरावट के साथ 56.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए द्वारा जारी किए गए नए इंडिकेटिव रिटेल सेलिंग रेट्स के मुताबिक, देश में 999 शुद्धता वाले फाइन गोल्ड का रेट 14,142 रुपये प्रति ग्राम चल रहा है। वहीं, 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी का भाव 13,803 रुपये, 20 कैरेट का भाव 12,586 रुपये और 18 कैरेट का भाव 11,455 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया है। पिछले दिनों जब एमसीएक्स पर सोना 1,44,199 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, तब यह अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे आ चुका था। बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि जो सोना पहले 1.4 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, वह फ्यूचर में गिरकर 1.2 लाख रुपये तक आ सकता है। इसी डर से लोग अपने सोने को होल्ड करने के बजाय उसे बेचकर कैश ले रहे हैं।
कीमतों में और बड़ी गिरावट आने के डर से भारतीय परिवारों ने चालू तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच रिकॉर्ड मात्रा में सोना बेचा है। आईबीजेए के आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में लोगों ने लगभग 50 टन पुराना सोना बेचा है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले पूरे 43 पर्सेंट ज्यादा है। आईबीजेए के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने बताया कि भारतीय उपभोक्ता सोने की इस ऊंची कीमत का फायदा उठाकर उसे कैश में बदल रहे हैं। बाजार में मंदी आने की आशंका के चलते लोग अपनी ज्वेलरी बेचकर मुनाफा कमाना सुरक्षित मान रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में सोने पर दबाव बनने के पीछे कुछ मुख्य वजहें हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने की उम्मीदों ने सोने की चमक को कम कर दिया है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों का ध्यान सोने जैसी संपत्तियों से हटकर ब्याज देने वाले एसेट्स की तरफ चला जाता है, क्योंकि सोने पर कोई फिक्स रिटर्न नहीं मिलता है।
लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर पुराना सोना बेचने से भारत के संगठित गोल्ड रीसाइकलिंग इंडस्ट्री को बहुत बड़ा फायदा मिल रहा है। जो ज्वेलरी घरों के लॉकरों में बेकार पड़ी रहती थी, वह अब मुख्य इकॉनमी में वापस लौट रही है। इसे रिफाइन करके शुद्ध सोने में बदला जा रहा है और ज्वेलरी बनाने वालों को सप्लाई किया जा रहा है। मुथूट एक्ज़िम के सीईओ केयूर शाह ने बताया कि उनके 100 से ज्यादा गोल्ड पॉइंट्स के नेटवर्क पर पुराने सोने के वॉल्यूम में 40 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है। लोग अब पारदर्शी तरीकों से अपने सोने को भुना रहे हैं।
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, लेकिन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर सोना बाहर से इम्पोर्ट करना पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने करीब 72.4 बिलियन डॉलर का सोना इम्पोर्ट किया था। साल 2025 में रीसाइकिल्ड गोल्ड का योगदान 125 से 150 टन रहा था। अगर पुराना सोना बेचने का यही ट्रेंड जारी रहा, तो यह आंकड़ा इस साल बढ़कर 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है। भारतीय परिवारों के पास करीब 30,000 टन सोना होने का अनुमान है, ऐसे में रीसाइकलिंग बढ़ने से भारत की इम्पोर्ट पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।
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