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  1. अब ये बैंक लाएंगे देश में गोल्ड और सिल्वर, इम्पोर्ट के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव

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अब ये बैंक लाएंगे देश में गोल्ड और सिल्वर, इम्पोर्ट के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 17, 2026, 16:03 IST

सारांश

सरकार ने भारत में सोना और चांदी इम्पोर्ट करने के लिए ऑथोराइज्ड बैंकों की नई लिस्ट जारी कर दी है। डीजीएफटी (DGFT) द्वारा जारी यह लिस्ट 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी।

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सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर

भारत सरकार ने देश में सोना और चांदी के इम्पोर्ट को लेकर एक बहुत ही अहम फैसला लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी ने उन बैंकों की नई और अपडेटेड लिस्ट जारी कर दी है, जिन्हें भारत में सोना और चांदी लाने की अनुमति दी गई है। यह नया नियम और बैंकों की यह लिस्ट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुकी है और अगले तीन साल यानी 31 मार्च 2029 तक पूरी तरह मान्य रहेगी। सरकार का यह कदम देश में बुलियन यानी सोने-चांदी की आवक को पूरी तरह से निगरानी में रखने और इसे एक पारदर्शी सिस्टम के दायरे में लाने की कोशिश का हिस्सा है।

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इन बैंकों को मिला सोना और चांदी लाने का अधिकार

नए फ्रेमवर्क के तहत देश के कई बड़े और प्रमुख बैंकों को सोना और चांदी दोनों का इम्पोर्ट करने की मंजूरी दी गई है। इस लिस्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एचडीएफसी (HDFC) बैंक, आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इनके अलावा कुछ अन्य इंटरनेशनल और प्राइवेट बैंकों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें डॉयचे बैंक, फेडरल बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आरबीएल (RBL) बैंक और यस बैंक का नाम प्रमुखता से शामिल है। साथ ही इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना को भी इस लिस्ट में जगह दी गई है, जो अगले तीन सालों तक इस प्रक्रिया का हिस्सा रहेंगे।

कुछ बैंकों के लिए बनाए गए खास नियम

सरकार ने इस बार बैंकों के लिए दो अलग-अलग कैटेगरी बनाई हैं। पहली कैटेगरी में वे बैंक हैं जो सोना और चांदी दोनों ला सकते हैं, लेकिन एक दूसरी कैटेगरी भी तैयार की गई है। इस दूसरी कैटेगरी में उन बैंकों को रखा गया है जो भारत में सिर्फ सोना इम्पोर्ट करने के लिए ऑथोराइज्ड होंगे। वर्तमान में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एसबीईआर (SBER) बैंक को इसी सेगमेंट में रखा गया है। इसका मतलब है कि ये बैंक फिलहाल चांदी का इम्पोर्ट नहीं कर सकेंगे। इस तरह का बंटवारा इसलिए किया गया है ताकि मार्केट की जरूरत के हिसाब से इम्पोर्ट की प्रोसेस को और भी ज्यादा स्ट्रीमलाइन किया जा सके।

पारदर्शिता और रेगुलेशन पर बढ़ेगा फोकस

सरकार की इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा उद्देश्य बुलियन इम्पोर्ट को पूरी तरह से रेगुलेटेड और ट्रेसेबल चैनलों के जरिए संचालित करना है। भारत दुनिया भर में सोने के सबसे बड़े कंज्यूमर्स में से एक है और चांदी का भी बहुत बड़ा इम्पोर्टर है। ऐसे में सोने-चांदी के इम्पोर्ट का सीधा असर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट और करेंसी की वैल्यू पर पड़ता है। जब इम्पोर्ट की पूरी प्रक्रिया ऑथोराइज्ड बैंकों के जरिए होती है, तो अधिकारियों के लिए डेटा पर नजर रखना और किसी भी तरह की अनियमितता को रोकना आसान हो जाता है।

मार्केट और कारोबारियों के लिए राहत की बात

कहा जा रहा है कि ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और बड़े खरीदार जो बैंकों के जरिए होने वाले इम्पोर्ट पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए अगले तीन साल का रास्ता अब बिल्कुल साफ है। सप्लाई चेन के फॉर्मलाइज होने से ज्वेलरी इंडस्ट्री को भी फायदा होगा और अनधिकृत चैनलों पर उनकी निर्भरता कम होगी। बता दें कि यह अपडेट फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के तहत समय-समय पर की जाने वाली समीक्षा का हिस्सा है, जिससे मार्केट में काम करने वाले सभी प्लेयर्स को अपने ऑपरेशनल कामों को प्लान करने में मदद मिलती है। ग्लोबल मार्केट में कीमतों के उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह नया सिस्टम काफी मददगार साबित हो सकता है।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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