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3 min read | अपडेटेड May 11, 2026, 13:53 IST
सारांश
डीओपी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 2,100 करोड़ रुपये की एडिशनल रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जो पिछले चार दशकों में सबसे अधिक वृद्धि मानी जा रही है। विभाग का कुल रेवेन्यू फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के 13,218 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 15,296 करोड़ रुपये हो गया।

DoP ने कैसे बदल दी अपनी तस्वीर?
डाक विभाग (Department of Posts, DoP) का टारगेट इस साल अपने इंक्रिमेंटल रेवेन्यू ग्रोथ को दोगुना कर 4,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का इरादा है। संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेन्नासानी का ऐसा कहना है। इसे इनोवेशन, जवाबदेही, प्रोत्साहन और अलग-अलग सेगमेंट में तय टारगेटों को पाकर हासिल करने का प्लान है। डीओपी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 2,100 करोड़ रुपये की एडिशनल रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जो पिछले चार दशकों में सबसे अधिक वृद्धि मानी जा रही है। विभाग का कुल रेवेन्यू फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के 13,218 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 15,296 करोड़ रुपये हो गया।
मंत्री ने कहा, ‘पिछले फाइनेंशियल ईयर में हमने 2,100 करोड़ रुपये की रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की जो डिपार्टमेंट की एवरेज ग्रोथ से 10 गुना अधिक है। इस साल हमारा टारगेट इसे 4,000 करोड़ रुपये तक ले जाना है। हर सेगमेंट के लिए टारगेट तय किए गए हैं। अगले तीन से चार सालों में पोस्ट ऑफिसों को कॉस्ट सेंटर से प्रॉफिट सेंटर में बदलना हमारा लक्ष्य है।’ उन्होंने बताया कि डीओपी का रेवेन्यू 2016 के 11,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 13,200 करोड़ रुपये हो गया। पेम्मासानी ने कहा कि सरकार लोगों के हित में भारतीय डाक सर्विसेज का विस्तार करने और इनोवेशन के जरिए उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘हमने डाक विभाग के सामने पेश होने वाली चुनौतियों को स्टडी किया। अलग-अलग सेक्टरों में हमारे वास्तविक बाजार हिस्से की पहचान की, बाधाओं को दूर किया, संचालन में उत्कृष्टता सुनिश्चित की, लक्ष्यों की नियमित निगरानी की, अधिकारियों को जवाबदेह बनाया और साथ ही उनके काम की सराहना भी की। इसी से यह वृद्धि संभव हुई।’ मंत्री ने बताया कि वह हर महीने विभाग के प्रदर्शन की समीक्षा करते हैं और जवाबदेही तय करने से पहले परिचालन संबंधी समस्याओं को दूर किया गया।
उन्होंने कहा कि मुख्य डाक महा प्रबंधकों को यह लक्ष्य तब दिए गए जब यह सुनिश्चित हो गया कि संचालन में कोई बाधा नहीं है। पेम्मासानी ने कहा, ‘मैंने सभी मुख्य डाक महाप्रबंधकों को पत्र लिखे और बताया कि आपने लक्ष्यों पर सहमति जताई है और कहा कि कोई बाधा नहीं है। अगर प्रदर्शन नहीं होगा तो सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। पहले महीने के अंत में 15 अधिकारियों को ऐसे पत्र भेजे गए। इसके बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया।’ उन्होंने कहा कि विभाग उपलब्धियों की सराहना भी करता है और अब कमजोर प्रदर्शन को लेकर भेजे जाने वाले पत्रों की संख्या घटकर एक रह गई है। मंत्री ने कहा कि लक्ष्यों को आकर्षक और इनोवेटिव सर्विसेज से समर्थन दिया गया है जैसे 24 और 48 घंटे में स्पीड पोस्ट वितरण, ट्रैकिंग सिस्टम और ओटीपी आधारित अलर्ट। उन्होंने कहा, ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलिजी के इस्तेमाल, लक्ष्यों और जवाबदेही से स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। पहले डाकघर कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें आती थीं लेकिन अब लक्ष्य आधारित व्यवस्था के कारण सभी अधिक ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।’
निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के लिए विभाग ने 214 डाकघरों में चौबीसों घंटे सेवा शुरू की है। करीब 4,000 डाकघरों में काम के घंटे सात घंटे से बढ़ाकर 24 घंटे तक किए गए हैं। मंत्री ने कहा, ‘हम अधिक डाकघरों में विस्तारित समय की सुविधा शुरू करेंगे ताकि लोग अपने दफ्तर के बाद भी डाक सेवाओं का उपयोग कर सकें।’
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