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CBI ने चंडीगढ़ और Delhi-NCR समेत 6 जगहों पर मारा छापा, ₹661 करोड़ का है मामला

Upstox

4 min read | अपडेटेड June 07, 2026, 11:25 IST

सारांश

CBI की जांच में सामने आया है कि सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर IDFC First Bank और एयू फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया। नोएडा की विपम कंसलटेंसी और उसके डायरेक्टर के ठिकानों पर भी छापे मारे गए हैं।

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सीबीआई ने 661 करोड़ रुपये के सरकारी फंड घोटाले में कई ठिकानों पर छापेमारी की। | Image: Shutterstock

सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी CBI ने सरकारी धन की हेराफेरी को लेकर एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। CBI ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभागों से जुड़े कथित 661 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी की टीमों ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में कुल छह ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई IDFC First Bank और एयू फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी पैसों के गलत इस्तेमाल को लेकर चल रही जांच के तहत की गई है।

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बड़े अफसरों और निजी कंपनी पर कसा शिकंजा

CBI की इस छापेमारी के दायरे में हरियाणा कैडर के सीनियर सरकारी अधिकारी और नोएडा की एक निजी कंपनी आई है। जांच एजेंसी ने हरियाणा के बड़े सरकारी अफसरों के साथ-साथ नोएडा स्थित विपम कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर से जुड़े परिसरों की गहन तलाशी ली है। CBI के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे घोटाले और धोखाधड़ी से हरियाणा सरकार के आठ महत्वपूर्ण विभाग और चंडीगढ़ के दो बड़े विभाग प्रभावित हुए हैं। चंडीगढ़ के प्रभावित विभागों में चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसाइटी यानी क्रिस्ट शामिल हैं। इन विभागों का पैसा बैंकों में जमा था, जिसका गलत फायदा उठाया गया।

बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों का गठजोड़

CBI द्वारा जारी किए गए बयान में इस बात का साफ जिक्र है कि जांच के दौरान कई ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं, जिनसे सरकारी कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों के बीच की मिलीभगत का पता चलता है। इन कर्मचारियों ने बैंक के बड़े अफसरों के साथ मिलकर नियम कायदों को ताक पर रखकर नए खाते खुलवाए और सरकारी धन को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया। इसके बाद इस सरकारी पैसे का इस्तेमाल दूसरे निजी कामों में किया गया। CBI का आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों ने इन अवैध लेन-देन को आसान बनाने और इस बड़ी गड़बड़ी के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के बदले में बैंकों और निजी लोगों से अनुचित लाभ यानी रिश्वत ली थी।

इस पूरे घोटाले में नोएडा की विपम कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी बेहद संदिग्ध पाई गई है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इस धोखाधड़ी और अपराध से कमाया गया पैसा सबसे पहले विपम कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में जमा किया गया था। इसके बाद इस रकम को कंपनी के डायरेक्टर के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। छापेमारी के दौरान CBI को कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और दूसरी जरूरी सामग्री मिली है, जिसे जांच टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है। यह सारा सामान आगे की जांच में बड़े सबूत के तौर पर काम आएगा।

पंचकूला की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल

CBI की यह बड़ी जांच असल में हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से लिए गए एक मामले और चंडीगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा पुलिस थाने द्वारा दर्ज किए गए दो मामलों पर आधारित है। CBI ने बताया कि ये सभी मामले आपस में जुड़े हुए हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, सरकारी धन का दुरुपयोग और लोक सेवकों की मिलीभगत शामिल है। जांच एजेंसी ने इस मामले में आगे कदम बढ़ाते हुए पंचकूला की एक विशेष अदालत में अपनी पहली चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के लोक सेवकों की भूमिका की पूरी डिटेल दी गई है।

बैंकों के जरिए हेराफेरी का पूरा तरीका उजागर

अदालत में पेश की गई इस चार्जशीट में इस बात का भी पूरा विवरण दिया गया है कि आरोपियों ने IDFC First Bank और एयू फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी धन की हेराफेरी के लिए किस तरह के हथकंडे और तौर-तरीके अपनाए थे। CBI ने साफ किया है कि इस बड़े घोटाले की जांच अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुई है बल्कि आगे भी जारी है। जैसे-जैसे इस मामले में दूसरे लोगों की संलिप्तता और नए सबूत सामने आएंगे, उनके खिलाफ भी अदालत में अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

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