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3 min read | अपडेटेड April 07, 2026, 16:13 IST
सारांश
एयर इंडिया के सीईओ और एमडी कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विल्सन ने 2024 में ही चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को अपने फैसले के बारे में बता दिया था। वे नए उत्तराधिकारी के आने तक पद पर बने रहेंगे।

एयर इंडिया के कायाकल्प में अहम भूमिका निभाने वाले कैंपबेल विल्सन ने दिया इस्तीफा।
एयर इंडिया से आज एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। एयरलाइन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। विल्सन पिछले चार सालों से एयर इंडिया की कमान संभाल रहे थे और उनके नेतृत्व में एयरलाइन ने निजीकरण के बाद कई बड़े बदलाव देखे हैं। यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है बल्कि इसके लिए काफी पहले से तैयारी की जा रही थी। विल्सन तब तक अपने पद पर बने रहेंगे जब तक कि उनके उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान नहीं हो जाता और वह कार्यभार नहीं संभाल लेता। विल्सन का यह कार्यकाल एयर इंडिया को एक नई पहचान देने के लिए याद किया जाएगा।
कैंपबेल विल्सन ने साल 2024 में ही एयर इंडिया के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को अपनी मंशा बता दी थी कि वह 2026 में पद छोड़ना चाहते हैं। तब से वह कंपनी के लीडरशिप को मजबूत करने और बदलाव की प्रक्रिया को आसान बनाने पर काम कर रहे थे। विल्सन का मानना है कि अब एयर इंडिया एक मजबूत स्थिति में पहुंच गई है और नए नेतृत्व के लिए बागडोर संभालने का यह सही समय है। टाटा ग्रुप ने उनके इस फैसले का सम्मान किया है और उनके योगदान की काफी तारीफ की है। विल्सन ने अपनी टीम को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर दिया है।
विल्सन के कार्यकाल के दौरान एयर इंडिया ने निजीकरण के बाद का सबसे महत्वपूर्ण दौर देखा है। पिछले चार सालों में चार एयरलाइंस का सफल मर्जर किया गया है। सरकारी कामकाज के तरीके से हटकर प्राइवेट सेक्टर की कार्यप्रणाली को अपनाना एक बड़ी चुनौती थी जिसे विल्सन की टीम ने बखूबी निभाया है। इस दौरान एयरलाइन के बेड़े में 100 नए विमान जोड़े गए हैं। साथ ही पुराने विमानों के इंटीरियर को पूरी तरह से बदलने का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। अब नए डिजाइन वाले बड़े विमानों की डिलीवरी भी शुरू हो गई है जो यात्रियों को एक वर्ल्ड क्लास अनुभव देंगे।
सिर्फ विमान ही नहीं बल्कि एयर इंडिया ने फ्यूचर की तैयारी के लिए बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काफी काम किया है। दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग एकेडमी, दो फ्लाइट सिम्युलेटर सुविधाएं और एक नई फ्लाइंग स्कूल की शुरुआत विल्सन के समय में ही हुई है। इसके अलावा एक बड़ा मेंटेनेंस रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ बेस भी बनाया जा रहा है ताकि विमानों की मरम्मत और देखरेख के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। यह सब एयर इंडिया के बड़े लक्ष्य और ऊंचे मानकों को पूरा करने के लिए किया गया है ताकि ऑपरेशनल परफॉर्मेंस बेहतर हो सके।
विल्सन का कहना है कि अब एयर इंडिया के विकास का अगला चरण शुरू होने वाला है। कंपनी ने करीब 600 नए विमानों का ऑर्डर दे रखा है जिनकी डिलीवरी साल 2027 से बड़े पैमाने पर शुरू होने वाली है। ऐसे में नए सीईओ के पास कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का पूरा मौका होगा। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने विल्सन के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सप्लाई चैन की दिक्कतों और ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद एयर इंडिया को एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाया है। टाटा ग्रुप अब एक ऐसे लीडर की तलाश में है जो विल्सन द्वारा बनाई गई मजबूत नींव पर एयर इंडिया के सुनहरे फ्यूचर की इमारत खड़ी कर सके। विल्सन ने एयर इंडिया के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
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