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4 min read | अपडेटेड September 13, 2026, 10:02 IST
सारांश
इमरजेंसी सफर के लिए रेलवे की तत्काल सेवा बहुत काम आती है। लेकिन प्लान बदलने पर टिकट कैंसिल कराने के नियम जानना बेहद जरूरी है। पूरी तरह कन्फर्म तत्काल टिकट रद्द करने पर रेलवे कोई रिफंड नहीं देता है।

भारतीय रेलवे में तत्काल टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े जरूरी नियम।
अचानक से कहीं जाने का प्लान बनने पर भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट बुकिंग सेवा यात्रियों के बहुत काम आती है। लेकिन अगर किसी वजह से आपकी यात्रा का प्लान रद्द हो जाता है या बदल जाता है, तो तत्काल टिकट को कैंसिल कराने के नियम जान लेना बेहद जरूरी होता है। अक्सर जानकारी न होने की वजह से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। रेलवे के नियमानुसार कन्फर्म और वेटिंग तत्काल टिकटों के कैंसिलेशन और रिफंड को लेकर अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। अगर आप भी ट्रेन में सफर करने के लिए तत्काल टिकट बुक कराते हैं, तो आपको रेलवे के इन जरूरी नियमों को जरूर समझ लेना चाहिए ताकि आपको पता रहे कि किस स्थिति में कितना पैसा वापस मिलेगा।
अगर आपके पास पूरी तरह से कन्फर्म तत्काल टिकट है और आप किसी भी वजह से उसे खुद से कैंसिल कराते हैं, तो रेलवे की तरफ से आपको एक भी रुपया रिफंड नहीं किया जाता है। कन्फर्म तत्काल टिकट पर रेलवे 100% कैंसिलेशन चार्ज यानी पेनल्टी वसूलता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि टिकट कैंसिल कराने पर आपकी रिफंड की रकम शून्य यानी जीरो ही रहती है। चाहे आपकी ट्रेन छूटने में कितना भी समय बचा हो, अगर टिकट पूरी तरह कन्फर्म है और आपने उसे खुद से कैंसिल किया है, तो पूरा पैसा कट जाता है। इसलिए कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने से पहले यह अच्छे से सोच लेना चाहिए।
अगर आपका तत्काल टिकट बुकिंग के बाद वेटिंग या RAC में ही रह जाता है और आप उसे खुद से कैंसिल कराने का फैसला लेते हैं, तो नियम थोड़े राहत देने वाले हैं। ऐसे मामलों में रेलवे क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी बचा हुआ पैसा आपको वापस कर देता है। अगर बात स्लीपर क्लास की करें तो इसमें लगभग 60 रुपये प्रति यात्री और साथ में जीएसटी का चार्ज काटा जाता है। अगर ट्रेन का चार्ट बनने के समय तक भी आपका टिकट वेटिंग से क्लियर होकर कन्फर्म नहीं हो पाता है, तब भी यही तय चार्ज काटकर बाकी बची हुई रकम रिफंड कर दी जाती है।
अगर आपने IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक किया था और चार्ट बनने के बाद भी वह पूरी तरह से वेटिंग लिस्ट में ही बना रहता है, तो इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे टिकटों को यूजर को खुद से कैंसिल कराने की जरूरत नहीं पड़ती है। रेलवे का सिस्टम चार्ट तैयार होने के बाद ऐसे वेटिंग टिकटों को अपने आप यानी ऑटोमेटिक कैंसिल कर देता है। इसके बाद रेलवे नियमानुसार कैंसिलेशन चार्ज काटने के बाद बची हुई रकम सीधे आपके उस बैंक खाते में भेज देता है, जिससे आपने टिकट की बुकिंग का भुगतान किया था।
कई बार लोग परिवार या दोस्तों के साथ सफर करने के लिए एक ही पीएनआर पर एक से ज्यादा यात्रियों का तत्काल टिकट बुक कराते हैं। ऐसे ग्रुप टिकटों में कई बार कुछ यात्रियों का टिकट कन्फर्म हो जाता है जबकि कुछ यात्रियों का टिकट वेटिंग में ही अटका रह जाता है। ऐसे मामलों में रेलवे के नियम यात्रियों को थोड़ी राहत देते हैं। अगर आप ट्रेन छूटने के तय समय से पहले यानी चार्ट तैयार होने से पहले ही उस पूरे पीएनआर के टिकट को एक साथ कैंसिल करा देते हैं, तो वेटिंग यात्रियों के साथ-साथ कन्फर्म यात्रियों को भी नियमों के अनुसार तय कैंसिलेशन शुल्क काटने के बाद बाकी बची हुई रकम का रिफंड दे दिया जाता है।
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