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  1. युद्ध जैसी परिस्थितियों में म्यूचुअल फंड SIPs करने वाले इन्वेस्टरों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

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युद्ध जैसी परिस्थितियों में म्यूचुअल फंड SIPs करने वाले इन्वेस्टरों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 05, 2026, 10:39 IST

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सारांश

निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है। इसका सीधा सा मतलब है कि आप मार्केट के उतार-चढ़ाव को बिना घबराए कितना सहन कर सकते हैं। आपके पोर्टफोलियो का एसेट एलोकेशन इसी क्षमता के अनुरूप होना चाहिए।

म्यूचुअल फंड

क्या युद्ध जैसी परिस्थितियों में जारी रखनी चाहिए SIPs?

जब युद्ध छिड़ते हैं और जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है, तो ऐसे में शेयर मार्केट में भी अस्थिरता नजर आने लगती है। ऐसे में शेयर मार्केट में निवेशकों की पैनिक सेलिंग भी देखने को मिलती है। निवेशकों में डर कई बार इतना बढ़ जाता है कि वे अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को या तो रोक देते हैं, या फिर कम दाम में बेच देते हैं, हालांकि ऐसा करना उनके लिए घाटे का सौदा हो सकता है। अगर आप अपनी SIPs को लेकर गंभीर और अनुशासित हैं, तो ऐसे में मार्केट में आई गिरावट को आप अपने लिए एक मौके में बदल सकते हैं।

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जब युद्ध या तनाव के कारण मार्केट में गिरावट आती है, तो आपकी तय मासिक SIP वैल्यू से म्यूचुअल फंड की अधिक यूनिट्स कम नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर खरीदी जाती हैं। जब बाजार में सुधार होता है, तो ये एक्स्ट्रा यूनिट आपके वेल्थ क्रिएशन में अहम भूमिका निभाती हैं।

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर श्वेता शास्त्री ने कहा, ‘ये वो समय है जब आगे क्या होगा, इसका अनुमान लगाने की कोशिश करने से ज्यादा अनुशासन मायने रखता है। SIP रुपी कॉस्ट एवरेजिंग के हिसाब से चलती है। जब मार्केट गिरते हैं, तो उतने हे फंड से कम कीमतों पर अधिक यूनिट खरीदी जा सकती हैं। समय के साथ, इससे निवेश की कुल लागत कम करने में मदद मिलती है। चक्रवृद्धि ब्याज ही वास्तव में दीर्घकालिक संपत्ति का निर्माण करता है। जब आप इन्वेस्ट करते रहते हैं, तो आपका रिटर्न और रिटर्न हासिल करना शुरू कर देते हैं। लेकिन यह तभी काम करता है जब आप अपने पैसे को बिना बीच में रोके निवेशित रहने देते हैं। मार्केट की अस्थिरता आपके धैर्य की परीक्षा ले सकती है, लेकिन जो लोग निवेशित रहते हैं, वे चक्रवृद्धि ब्याज को अपने पोर्टफोलियो को साल दर साल मजबूत करने के लिए जरूर समय देते हैं।’

निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है। इसका सीधा सा मतलब है कि आप मार्केट के उतार-चढ़ाव को बिना घबराए कितना सहन कर सकते हैं। आपके पोर्टफोलियो का एसेट एलोकेशन इसी क्षमता के अनुरूप होना चाहिए। श्वेता आगे कहती हैं, ‘अगर आप ज्यादा अस्थिरता सहन नहीं कर सकते, तो आपका निवेश आक्रामक निवेशों की ओर ज्यादा नहीं होना चाहिए। इक्विटी या इक्विटी-उन्मुख योजनाओं, डेट और कमोडिटीज में उचित विविधीकरण पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है।’

स्थिरता प्रबंधन के लिए एक्सपर्ट्स सुझाव सुनिश्चित करें कि आपका एसेट एलोकेशन आपकी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से ही हो। अगर मार्केट में थोड़ी सी भी अस्थिरता से आपको घबराहट होती है, तो इक्विटी पोर्टफोलियो में भारी निवेश न करें। अपने पोर्टफोलियो में सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों को हेज के रूप में रखने से भी अस्थिरता को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। घबराहट में एसआईपी बंद न करें। मार्केट की अस्थिरता अस्थायी होती है, लेकिन दीर्घकाल में कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए, सुनिश्चित करें कि आपके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड हो।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है और इसे अपस्टॉक्स की ओर से निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को निवेश संबंधी फैसले लेने से पहले खुद रिसर्च करनी चाहिए या किसी रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना चाहिए।
Sangeeta Ojha
ELSS
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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