पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड March 25, 2026, 15:15 IST
सारांश
सिबिल रिपोर्ट में 'रिटेन ऑफ' का मतलब है कि बैंक ने आपके लोन को घाटे के रूप में दर्ज कर लिया है। यह कर्ज माफी नहीं है और इससे आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह गिर सकता है। अगर आप भविष्य में नया लोन चाहते हैं, तो इस स्टेटस को सुधारना बहुत जरूरी है।

सिबिल स्कोर खराब होने पर भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
अक्सर लोग अपनी सिबिल रिपोर्ट चेक करते समय 'रिटेन ऑफ' स्टेटस देखकर यह समझ लेते हैं कि उनका लोन अब खत्म हो गया है या बैंक ने उसे माफ कर दिया है। लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। स्मार्ट पंडित के तौर पर मैं आपको बता दूँ कि यह आपके वित्तीय फ्यूचर के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। जब आप ईमानदारी से लोन लेते हैं लेकिन किसी वजह से उसकी किस्तें समय पर नहीं भर पाते, तो बैंक लंबे समय तक इंतजार करने के बाद उसे अपने खातों में घाटे के रूप में लिख देता है। इसका सीधा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है और भविष्य में किसी भी तरह की वित्तीय मदद मिलना बंद हो जाती है।
जब कोई उधार लेने वाला व्यक्ति अपने लोन या क्रेडिट कार्ड की ईएमआई लगातार नहीं भरता, तो बैंक उसे कई बार याद दिलाता है। अगर 180 दिन या उससे ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पैसा वापस नहीं मिलता, तो बैंक यह मान लेता है कि अब इस पैसे की वसूली की उम्मीद बहुत कम है। ऐसी स्थिति में बैंक उस अकाउंट को रिटेन ऑफ घोषित कर देता है। यह बैंक की अपनी अकाउंटिंग का एक तरीका है ताकि वे अपने नुकसान को कागजों पर दर्ज कर सकें। लेकिन आपको यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि आप कानूनी रूप से उस पूरी बकाया राशि को चुकाने के लिए अभी भी जिम्मेदार हैं। बैंक या कोई भी रिकवरी एजेंसी आपसे उस पैसे की मांग भविष्य में भी कर सकती है।
सिबिल रिपोर्ट में रिटेन ऑफ का दिखना एक बहुत ही गंभीर नेगेटिव मार्क माना जाता है। यह इस बात का सबूत है कि आपने लंबे समय तक अपना वादा नहीं निभाया। इसका सबसे पहला असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है, जो अचानक 100 पॉइंट या उससे भी ज्यादा गिर सकता है। जब आपका स्कोर इतना कम हो जाता है, तो बैंक आपको होम लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड देने से साफ मना कर देते हैं। अगर कोई बैंक लोन देने को तैयार होता भी है, तो वह बहुत ज्यादा ब्याज दर वसूलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह स्टेटस आपके रिकॉर्ड में करीब 7 साल तक बना रह सकता है, जिससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पूरी तरह खराब हो जाती है।
यहाँ एक बात समझना बहुत जरूरी है कि रिटेन ऑफ और सेटल्ड दो अलग-अलग स्थितियां हैं। रिटेन ऑफ में बैंक ने मान लिया है कि पैसा नहीं आएगा और उसने वसूली की कोशिशें कम कर दी हैं। वहीं 'सेटल्ड' का मतलब है कि आपने बैंक के साथ बातचीत की और पूरी रकम के बजाय कुछ कम पैसा देकर मामले को रफा-दफा कर लिया। ये दोनों ही स्थितियां आपके स्कोर के लिए अच्छी नहीं हैं। हालांकि, अगर आप पूरी बकाया राशि चुका देते हैं, तो बैंक आपके स्टेटस को 'क्लोज्ड' या 'रिटेन ऑफ पेड' में बदल सकता है, जो कि सेटलमेंट करने से कहीं ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है।
अगर आपकी रिपोर्ट में यह खराब स्टेटस दिख रहा है, तो घबराने के बजाय सुधार के कदम उठाएं। सबसे पहले सिबिल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी पूरी रिपोर्ट डाउनलोड करें और देखें कि किस बैंक का कितना पैसा बकाया है। इसके बाद उस बैंक या संस्थान से संपर्क करें और उन्हें बताएं कि आप अपना बकाया चुकाना चाहते हैं। कोशिश करें कि आप पूरा पैसा एक बार में चुका दें। भुगतान करने के बाद बैंक से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' यानी एनओसी जरूर मांगें। बैंक से यह भी कहें कि वे इस जानकारी को सिबिल को भेजें ताकि आपका स्टेटस अपडेट हो सके। अगर 30 से 45 दिनों में स्टेटस नहीं बदलता, तो आप सिबिल पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।
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