पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड March 05, 2026, 13:58 IST
सारांश
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने हवाई उड़ानों को पूरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में यात्री इस बात को लेकर परेशान हैं कि क्या उनका ट्रैवल इंश्योरेंस इस संकट में काम आएगा। क्लेम मिलना इस बात पर निर्भर करता है कि पॉलिसी कब ली गई और उड़ान रुकने की असल वजह क्या है।

मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालातों के बीच फंसे यात्रियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस के नियम और शर्तें समझना बेहद जरूरी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग जैसी स्थिति ने पूरी दुनिया के हवाई यातायात को हिलाकर रख दिया है। इस इलाके की उड़ानों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को अचानक फ्लाइट कैंसिल होने, लंबी देरी और आखिरी समय में रूट बदलने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं और इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनका आगे का सफर कैसा होगा और क्या उनका ट्रैवल इंश्योरेंस इस मुसीबत में मददगार साबित होगा। इंटरनेशनल यात्रा के लिए इंश्योरेंस वैसे तो जरूरी होता है, लेकिन युद्ध जैसी स्थितियों में इसके नियम काफी पेचीदा हो जाते हैं।
इंटरनेशनल यात्रा करने वाले ज्यादातर लोगों के पास इंश्योरेंस होता है, लेकिन आप क्लेम कर पाएंगे या नहीं, यह मुख्य रूप से दो बातों पर टिका होता है। पहला यह कि आपकी फ्लाइट रुकने की असल वजह क्या है और दूसरा यह कि आपने अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी कब खरीदी थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भू-राजनीतिक तनाव के कारण अचानक एयरस्पेस बंद हो जाता है और आप मिडिल ईस्ट के इलाकों में फंस जाते हैं, तो यात्रा में देरी या छूटी हुई कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए क्लेम किया जा सकता है। लेकिन यहाँ सबसे बड़ी शर्त यह है कि आपकी पॉलिसी उस घटना के शुरू होने से पहले ही खरीदी गई होनी चाहिए।
ट्रैवल इंश्योरेंस में 'वॉर एक्सक्लूजन क्लॉज' एक ऐसा नियम है जो ज्यादातर पॉलिसियों का हिस्सा होता है। यह क्लॉज कहता है कि अगर नुकसान सीधे या परोक्ष रूप से युद्ध, सैन्य कार्रवाई, या आंतरिक अशांति की वजह से हुआ है, तो इंश्योरेंस कंपनी उसकी भरपाई नहीं करेगी। अगर संचालन में रुकावट गृहयुद्ध या सशस्त्र संघर्ष की वजह से होती है, तो यात्री को इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलता है। हालांकि, बिना घोषणा की गई लड़ाई या सावधानी के तौर पर रूट बदलने जैसे मामलों में स्थिति थोड़ी उलझी हुई होती है। ऐसे में क्लेम मंजूर होगा या नहीं, यह कंपनी की शर्तों और नुकसान के युद्ध से जुड़ाव पर निर्भर करता है।
फ्लाइट्स रद्द होने की वजह से फंसे हजारों यात्रियों की मदद के लिए यूएई सरकार आगे आई है। जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी ने एक इमरजेंसी एविएशन सपोर्ट प्लान शुरू किया है, जो क्षेत्रीय एयरस्पेस बंद होने के कारण फंसे यात्रियों के ठहरने, खाने और दोबारा टिकट बुक करने का खर्च उठा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 20,200 यात्रियों पर उड़ानों के समय में बदलाव का असर पड़ा है। इसी तरह अबू धाबी के टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होटलों को निर्देश दिया है कि वे उन मेहमानों का स्टे बढ़ाएं जो हमलों के बाद उड़ानों में आई रुकावट की वजह से नहीं जा पा रहे हैं। इस अतिरिक्त ठहरने का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाएगा।
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