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  1. दो महीने से रफ्तार भर रहे बाजार को देख SIP शुरू करने का है मन? तुरंत देख लें ये 5 पैरामीटर

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दो महीने से रफ्तार भर रहे बाजार को देख SIP शुरू करने का है मन? तुरंत देख लें ये 5 पैरामीटर

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड November 06, 2026, 17:06 IST

सारांश

मुहूर्त ट्रेडिंग पर म्यूचुअल फंड शुरू करने जा रहे हैं तो आंख बंद करके पैसा न लगाएं। निवेश से पहले फंड का एक्सपेंस रेशियो, 5 साल का सीएजीआर और शार्प रेशियो जैसी 5 अहम चीजें जरूर जांचें।

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म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले इन 5 अहम आंकड़ों की जांच करना बहुत जरूरी है।

दिवाली का पावन पर्व आते ही शेयर बाजार में रौनक छा जाती है। इस मौके पर होने वाली मुहूर्त ट्रेडिंग को किसी भी नए निवेश की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। बहुत से निवेशक इस दिन शेयर खरीदने के साथ-साथ म्यूचुअल फंड या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP की भी नई शुरुआत करते हैं। म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना वेल्थ क्रिएशन का एक शानदार तरीका है, लेकिन केवल त्योहार देखकर किसी भी फंड में पैसा लगा देना समझदारी नहीं है। बाजार में हजारों म्यूचुअल फंड स्कीम्स मौजूद हैं और सही फंड का चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अगर आप भी इस मुहूर्त ट्रेडिंग पर म्यूचुअल फंड में अपनी निवेश यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, तो आपको किसी भी फंड को चुनने से पहले 5 बहुत जरूरी नंबर जरूर चेक करने चाहिए। आइए जानते हैं कि ये 5 अहम नंबर कौन से हैं और ये आपको कैसे बेहतर फंड चुनने में मदद करते हैं।

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फंड का एक्सपेंस रेशियो और 5 साल का रिटर्न

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सबसे पहले आपको एक्सपेंस रेशियो देखना चाहिए। यह वह सालाना चार्ज होता है जो म्यूचुअल फंड हाउस आपके निवेश को मैनेज करने के लिए काटता है। आपको हमेशा समान कैटेगरी वाले फंड्स के एक्सपेंस रेशियो की तुलना करनी चाहिए। अगर दो फंड एक जैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कम एक्सपेंस रेशियो वाला फंड लंबी अवधि में आपको ज्यादा रिटर्न दे सकता है। इसके बाद दूसरा अहम नंबर 5 साल का CAGR यानी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट है। यह बताता है कि फंड ने पिछले 5 सालों में सालाना कितना रिटर्न दिया है। केवल फंड का कुल रिटर्न देखने के बजाय, इसकी तुलना फंड के बेंचमार्क और उसी कैटेगरी के अन्य फंड्स के औसत रिटर्न से करनी चाहिए। इससे आपको पता चलेगा कि फंड ने बाजार के मुकाबले कैसा प्रदर्शन किया है।

रिस्क को समझने के लिए स्टैंडर्ड डेविएशन और शार्प रेशियो

हर निवेश में थोड़ा रिस्क होता है, इसलिए तीसरा जरूरी नंबर स्टैंडर्ड डेविएशन है। यह नंबर बताता है कि समय के साथ किसी फंड का रिटर्न कितना ऊपर-नीचे होता है या उसमें कितना उतार-चढ़ाव रहता है। अगर किसी फंड का स्टैंडर्ड डेविएशन कम है, तो इसका मतलब है कि उसका रिटर्न पैटर्न थोड़ा ज्यादा स्थिर है और उसमें उठापटक कम होती है। हालांकि यह फ्यूचर के रिस्क की पूरी गारंटी नहीं देता। रिस्क को बेहतर तरीके से समझने के लिए चौथा नंबर शार्प रेशियो देखा जाता है। शार्प रेशियो यह मापता है कि फंड ने जो रिस्क उठाया है, उसके मुकाबले कितना बेहतर रिटर्न दिया है। समान कैटेगरी के फंड्स की तुलना करते समय जिस फंड का शार्प रेशियो ज्यादा होता है, उसे रिस्क के लिहाज से ज्यादा बेहतर परफॉर्मेंस देने वाला माना जाता है।

पोर्टफोलियो टर्नओवर रेशियो से समझें ट्रेडिंग की रणनीति

पांचवां और आखिरी अहम नंबर पोर्टफोलियो टर्नओवर रेशियो होता है। यह नंबर दिखाता है कि कोई म्यूचुअल फंड अपने पोर्टफोलियो में मौजूद शेयरों को कितनी जल्दी-जल्दी खरीदता और बेचता है। अगर किसी फंड का टर्नओवर रेशियो बहुत ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि उस फंड में बार-बार ट्रेडिंग हो रही है। ज्यादा ट्रेडिंग होने से ट्रांजैक्शन कॉस्ट यानी लेनदेन का खर्च बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर आपके मुनाफे पर पड़ सकता है। इसलिए निवेश से पहले यह जरूर चेक कर लें कि क्या फंड की रणनीति इतनी बार शेयर बदलने को सही ठहराती है या नहीं। इन 5 नंबरों को ध्यान में रखकर आप मुहूर्त ट्रेडिंग पर अपने लिए सबसे बेहतरीन म्यूचुअल फंड चुन सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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