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  1. SGB बनाम गोल्ड ETF और फिजिकल गोल्ड, 1 लाख रुपये का निवेश 5 साल में कितना हो गया?

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SGB बनाम गोल्ड ETF और फिजिकल गोल्ड, 1 लाख रुपये का निवेश 5 साल में कितना हो गया?

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 18:24 IST

सारांश

साल 2021-22 में सोवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB में 1 लाख रुपये लगाने वाले निवेशकों का पैसा आज तीन गुना से ज्यादा हो चुका है। सोने की कीमतों में आई भारी तेजी और सालाना 2.5% ब्याज ने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया है।

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सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को सोने की बढ़ती कीमतों और ब्याज का डबल फायदा मिला है।

सोने में निवेश को हमेशा से सुरक्षित और मुनाफा देने वाला माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में डिजिटल गोल्ड और सरकारी गोल्ड बॉन्ड ने कमाई के मामले में नए रिकॉर्ड बनाए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 में जिन निवेशकों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी सोवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB में 1 लाख रुपये का निवेश किया था, उनका पैसा आज तीन गुना से भी ज्यादा हो चुका है। सोने की ऑल टाइम हाई कीमतों और सरकार की तरफ से मिलने वाले फिक्स्ड ब्याज के कारण SGB निवेशकों के लिए सबसे बड़ा वेल्थ क्रिएटर साबित हुआ है।

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1 लाख रुपये का निवेश अब कितना हुआ

साल 2021-22 के दौरान SGB की इश्यू प्राइस औसतन 4,800 रुपये प्रति ग्राम के आसपास थी। उस समय 1 लाख रुपये लगाने पर एक इनवेस्टर को लगभग 20.83 ग्राम सोना आवंटित हुआ था। आज 2026 में 24 कैरेट सोने का भाव बढ़कर करीब 15,200 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया है। इस हिसाब से 20.83 ग्राम सोने की मार्केट वैल्यू आज बढ़कर लगभग 3.16 लाख रुपये हो गई है। इसके अलावा SGB पर सरकार हर साल इश्यू प्राइस पर 2.5% का फिक्स्ड ब्याज भी देती है। 1 लाख रुपये के इनवेस्टमेंट पर 5 साल में कुल 12,500 रुपये का ब्याज भी निवेशकों के बैंक खाते में जमा हो चुका है। यानी 1 लाख रुपये का कुल इनवेस्टमेंट आज लगभग 3.29 लाख रुपये से 3.30 लाख रुपये बन चुका है।

SGB बनाम गोल्ड ईटीएफ और फिजिकल गोल्ड

अगर तुलना करें तो SGB ने गोल्ड ईटीएफ और फिजिकल गोल्ड दोनों को बड़े अंतर से पछाड़ा है। अगर किसी व्यक्ति ने 2021-22 में 1 लाख रुपये का फिजिकल गोल्ड यानी सोने के सिक्के या आभूषण खरीदे होते, तो उन्हें 3% जीएसटी और कम से कम 10 से 15% तक मेकिंग चार्ज देना पड़ता। इसके अलावा लॉकर का खर्च और बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स अलग से लगता, जिससे शुद्ध मुनाफा घटकर लगभग 2.60 लाख से 2.75 लाख रुपये ही रह जाता। दूसरी तरफ गोल्ड ईटीएफ में मेकिंग चार्ज तो नहीं लगता, लेकिन हर साल लगभग 0.5 से 1% का एक्सपेंस रेशियो कटता है और बेचने पर टैक्स भी देना पड़ता है, जिससे 1 लाख रुपये का निवेश करीब 3.05 लाख रुपये ही बन पाता।

SGB क्यों साबित हुआ सबसे बेहतर विकल्प?

SGB का सबसे बड़ा फायदा इसका टैक्स स्ट्रक्चर और अतिरिक्त ब्याज है। SGB में निवेशकों को सोने के भाव में बढ़ोतरी का पूरा फायदा तो मिलता ही है, साथ ही सालाना 2.5% का एक्स्ट्रा ब्याज भी मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाले कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। इसमें न तो चोरी होने का डर रहता है और न ही किसी तरह के स्टोरेज या लॉकर का चार्ज देना पड़ता है। यही वजह है कि लंबी अवधि के इनवेस्टमेंट के लिए SGB ने बाकी सभी विकल्पों को पीछे छोड़ दिया है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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