return to news
  1. Home Loan में Fixed और Floating रेट क्या है? समझिए रेट हाइक के बाद अब कौन सा विकल्प बेहतर

पर्सनल फाइनेंस

Home Loan में Fixed और Floating रेट क्या है? समझिए रेट हाइक के बाद अब कौन सा विकल्प बेहतर

Shubham Singh Thakur

5 min read | अपडेटेड October 09, 2026, 15:57 IST

सारांश

RBI का महंगाई को लेकर लक्ष्य 4% है। महंगाई से जुड़ी चिंताओं के बीच केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला किया। अब बैंक यह तय करेंगे कि बढ़ी हुई दरों का कितना बोझ ग्राहकों पर डाला जाए।

Home Loan

होम लोन लेते समय ग्राहकों के पास आमतौर पर फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दर का विकल्प होता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50% कर दिया। इस फैसले का असर होम लोन समेत दूसरे कर्ज लेने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई से जुड़ी चिंताओं और मिडिल ईस्ट संकट जैसे कारणों को इस फैसले के पीछे अहम वजह बताया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते जोखिम और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

RBI का महंगाई को लेकर लक्ष्य 4% है, लेकिन महंगाई से जुड़ी चिंताओं के बीच केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला किया। अब बैंक यह तय करेंगे कि बढ़ी हुई दरों का कितना बोझ ग्राहकों पर डाला जाए। अगर बैंक अपनी लेंडिंग रेट बढ़ाते हैं, तो फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्या अब फिक्स्ड ब्याज दर वाला होम लोन लेना ज्यादा फायदेमंद होगा या फ्लोटिंग रेट के साथ बने रहना बेहतर रहेगा?

Fixed और Floating Interest Rate में क्या अंतर है?

होम लोन लेते समय ग्राहकों के पास आमतौर पर फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दर का विकल्प होता है। दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। फिक्स्ड ब्याज दर वाले लोन में ब्याज दर एक तय अवधि के लिए स्थिर रहती है। इसका मतलब है कि उस अवधि में बाजार की ब्याज दरें बढ़ने पर भी आपके लोन की ब्याज दर में बदलाव नहीं होगा। इससे EMI को लेकर पहले से योजना बनाना आसान होता है।

वहीं, फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन में ब्याज दर समय के साथ बदल सकती है। ऐसे लोन अक्सर रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है और बैंक इसका असर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है। इससे EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है। हालांकि, अगर भविष्य में ब्याज दरें घटती हैं, तो फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों को इसका फायदा भी मिल सकता है।

RBI के फैसले के बाद कौन-सा होम लोन बेहतर है?

भारतीय बैंकों में आमतौर पर फिक्स्ड ब्याज दर वाले होम लोन की दर फ्लोटिंग रेट के मुकाबले ज्यादा होती है। इसकी वजह यह है कि बैंक भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने के जोखिम को ध्यान में रखते हुए फिक्स्ड रेट पर अतिरिक्त प्रीमियम लेते हैं। आम तौर पर फिक्स्ड रेट, फ्लोटिंग रेट से 1% से 2.5% तक ज्यादा हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी बैंक में फ्लोटिंग रेट पर होम लोन 8% ब्याज दर पर मिल रहा है, तो फिक्स्ड रेट पर यही ब्याज दर 9% से 10.5% के बीच हो सकती है। RBI की ओर से 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद फ्लोटिंग रेट बढ़कर 8.25% हो जाता है, तो भी यह उदाहरण में बताई गई फिक्स्ड ब्याज दर से कम है। हालांकि, वास्तविक ब्याज दरें बैंक, ग्राहक की प्रोफाइल और लोन की शर्तों के हिसाब से अलग हो सकती हैं।

इसलिए केवल RBI के रेपो रेट बढ़ाने के फैसले के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि फिक्स्ड रेट वाला होम लोन ज्यादा फायदेमंद हो गया है। फ्लोटिंग रेट में शुरुआती ब्याज दर कम हो सकती है, लेकिन भविष्य में इसमें और बढ़ोतरी का जोखिम बना रहता है।

आगे ब्याज दरें बढ़ीं तो क्या होगा?

अगर महंगाई का दबाव बना रहता है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है, तो आने वाली तिमाहियों में RBI ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसी स्थिति में फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है। इसलिए लोन लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी मासिक आय में इतनी गुंजाइश है या नहीं कि आप बढ़ी हुई EMI का बोझ उठा सकें।

दूसरी ओर, अगर भविष्य में महंगाई कम होती है और RBI ब्याज दरें घटाता है, तो फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है। फिक्स्ड रेट चुनने वालों को ब्याज दरों में गिरावट का सीधा फायदा नहीं मिलेगा, जब तक उनके लोन की शर्तों में ऐसा कोई प्रावधान न हो।

Hybrid Home Loan भी है एक विकल्प

कुछ बैंक हाइब्रिड होम लोन का विकल्प भी देते हैं। इसमें शुरुआती तय अवधि के दौरान ब्याज दर फिक्स्ड रहती है और उसके बाद लोन फ्लोटिंग रेट में बदल जाता है। यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो शुरुआती वर्षों में EMI को स्थिर रखना चाहते हैं, लेकिन बाद में फ्लोटिंग रेट का विकल्प भी खुला रखना चाहते हैं।

कुल मिलाकर, फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट में चुनाव आपकी आर्थिक स्थिति, जोखिम उठाने की क्षमता और भविष्य में ब्याज दरों को लेकर आपकी सोच पर निर्भर करता है। फैसला लेने से पहले बैंक से दोनों विकल्पों की ब्याज दरों, अतिरिक्त शुल्क और लोन की शर्तों की जानकारी लें। जरूरत पड़ने पर वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही विकल्प चुनें।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी फैसला लेने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

अगला लेख