पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड April 08, 2026, 12:13 IST
सारांश
आरबीआई ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को 5.25 पर्सेंट पर बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि फिलहाल होम लोन की ईएमआई में कोई कमी नहीं आएगी। हालांकि, पॉलिसी का रुख न्यूट्रल होने से भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

आरबीआई के फैसले के बाद अब होम लोन की किस्तों पर टिकी है सबकी नजर।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की ताजा मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के नतीजे आ गए हैं। इस बार भी आम जनता को ब्याज दरों के मोर्चे पर वैसी राहत नहीं मिली है जैसी उम्मीद की जा रही थी। आरबीआई के गवर्नर और कमेटी के सभी सदस्यों ने मिलकर यह फैसला लिया है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि रेपो रेट अभी भी 5.25 पर्सेंट के पुराने स्तर पर ही बना रहेगा। इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन लोगों के मन में है जिन्होंने होम लोन ले रखा है या जो नया घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं। असल में रेपो रेट का सीधा कनेक्शन आपकी बैंक ईएमआई से होता है।
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटता है तो बैंकों के लिए फंड जुटाना सस्ता हो जाता है और वे इसका फायदा ग्राहकों को होम लोन की ब्याज दरें कम करके देते हैं। लेकिन चूंकि इस बार आरबीआई ने इसे 5.25 पर्सेंट पर ही रोक कर रखा है, इसलिए बैंकों की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद फिलहाल कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी होम लोन की ईएमआई में अभी कोई गिरावट नहीं आने वाली है। अगर आप यह सोच रहे थे कि इस महीने से आपकी बैंक की किस्त कम हो जाएगी, तो आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
होम लोन लेने वाले ज्यादातर ग्राहक फ्लोटिंग रेट पर लोन लेते हैं। फ्लोटिंग रेट सीधे तौर पर रेपो रेट से जुड़े होते हैं। आरबीआई के इस फैसले से मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई पर कोई तत्काल असर नहीं पड़ेगा। यानी जितनी किस्त आप पिछले महीने भर रहे थे, उतनी ही इस महीने भी भरनी होगी। हालांकि, जिन लोगों ने हाल ही में नया लोन लिया है, उन्हें भी पुरानी दरों पर ही भुगतान करना होगा। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि ब्याज दरें बढ़ी नहीं हैं, जिससे आपकी ईएमआई में बढ़ोतरी का डर खत्म हो गया है। अगर आरबीआई दरें बढ़ा देता तो आपकी जेब पर बोझ और बढ़ जाता।
भले ही इस बार ब्याज दरों में कटौती नहीं हुई है, लेकिन आरबीआई ने अपनी पॉलिसी के रुख को न्यूट्रल कर दिया है। यह एक बड़ा संकेत है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कमी देखी जा सकती है। जब पॉलिसी का रुख न्यूट्रल होता है, तो इसका मतलब है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने दोनों के विकल्प खुले रख रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर महंगाई इसी तरह काबू में रही, तो अगली कुछ बैठकों में रेपो रेट को कम किया जा सकता है। जब ऐसा होगा, तभी होम लोन की ईएमआई में बड़ी राहत देखने को मिलेगी।
इतना ही नहीं रेपो रेट में बदलाव ना होने का असर आपके FD रिटर्न पर भी देखने को मिलेगा। अगर आप FD में पैसा लगाते हैं तो अभी तक जिस दर पर आपको रिटर्न मिल रहा है, वही आगे भी जारी रहेगा। बता दें कि आरबीआई ने केवल रेपो रेट ही नहीं, बल्कि अन्य दरों को भी स्थिर रखा है। सीआरआर 3 पर्सेंट पर है और एमएसएफ रेट 5.50 पर्सेंट पर बना हुआ है। बैंक रेट भी 5.50 पर्सेंट ही रखा गया है और एसडीएफ रेट 5.00 पर्सेंट तय किया गया है।
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