पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड April 08, 2026, 12:12 IST
सारांश
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के चौथे क्वार्टर में प्राइवेट बैंकों ने डिपॉजिट में 12 से 17% की वृद्धि दर्ज की, जबकि पब्लिक सेक्टर के बैंकों में यह वृद्धि 2 से 14% रही। पीटीआई-भाषा द्वारा जमा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कम लागत वाले डिपॉजिट पर लगातार दबाव के कारण, बैंक हाल के क्वार्टर्स में डिपॉजिट सर्टिफिकेट के जरिए फंड जुटाने पर अधिक निर्भर रहे हैं।

डिपॉजिट ग्रोथ के मामले में प्राइवेट बैंकों का डंका, कर्ज देने में सरकारी बैंकों पर लोगों का भरोसा
प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने डिपॉजिट ग्रोथ के मामले में पब्लिक सेक्टर के बैंकों को पीछे छोड़ते हुए मजबूत वृद्धि दर्ज की है। हालांकि कुल मिलाकर बैंकों को डिपॉजिट जुटाने में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंकों के अस्थायी आंकड़ों को ओवरऑल देखने पर पता चलता है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के चौथे क्वार्टर में प्राइवेट बैंकों ने डिपॉजिट में 12 से 17% की वृद्धि दर्ज की, जबकि पब्लिक सेक्टर के बैंकों में यह वृद्धि 2 से 14% रही। पीटीआई-भाषा द्वारा जमा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कम लागत वाले डिपॉजिट पर लगातार दबाव के कारण, बैंक हाल के क्वार्टर्स में डिपॉजिट सर्टिफिकेट के जरिए फंड जुटाने पर अधिक निर्भर रहे हैं।
डिपॉजिट जुटाना खासतौर से करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट के मामले में चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसका कारण यह है कि अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों के कारण अन्य वित्तीय उत्पादों की तुलना में ये जमा कम आकर्षक हो गए हैं। प्राइवेट बैंकों में से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने FY26 के चौथे क्वार्टर में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की। बैंक की जमा राशि 17.2% बढ़कर 2.84 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसके बाद कोटक महिंद्रा बैंक 14.7% और एचडीएफसी बैंक 14.4% की वृद्धि के साथ क्रम से दूसरे एवं तीसरे स्थान पर रहे।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने एक रिपोर्ट में कहा कि एचडीएफसी बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ FY28 तक 14% बनी रहने का अनुमान है और उस समय तक कर्ज-जमा अनुपात घटकर 94% रहने की संभावना है। पब्लिक सेक्टर के बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया ने जनवरी-मार्च तिमाही में 14.33% की जमा वृद्धि दर्ज की। इसके बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 14% और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 13.37% की वृद्धि दर्ज की। ज्यादातर बैंकों ने मार्च क्वार्टर खत्म होने के बाद अस्थायी प्रदर्शन आंकड़े साझा किए हैं। लेकिन देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई जैसे कुछ बैंकों ने ये आंकड़े नहीं दिए हैं।
हालांकि कर्ज के मामले में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। सरकारी बैंकों ने इस मामले में 12 से 22% तक की वृद्धि दर्ज की है जबकि निजी बैंकों ने 12 से 20% की वृद्धि दर्ज की है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने सालाना आधार पर 22% वृद्धि के साथ 2.92 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इसके अलावा, यूको बैंक ने 20% वृद्धि के साथ 2.34 लाख करोड़ रुपये और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 18.90% की वृद्धि के साथ 3.45 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिए। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 मार्च, 2026 तक कर्ज वृद्धि 13.8% रही और पर्याप्त नकदी और जीएसटी कटौती के बाद उपभोग-आधारित सुधार के कारण इसमें तेजी बनी हुई है।
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