पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड April 02, 2026, 14:22 IST
सारांश
टैक्स एक्सपर्ट्स अब कर्मचारियों को नई टैक्स व्यवस्था अपनाने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि इसमें पेपरवर्क कम और फायदे ज्यादा हैं। नए नियमों में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है।

नए और पुराने टैक्स स्लैब के बीच उलझे सैलरीड क्लास के लिए सरकार ने दिए बड़े फायदे।
1 अप्रैल 2026 से देश में इनकम टैक्स के नए नियम पूरी तरह लागू हो चुके हैं। सैलरी पाने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए यह बदलाव काफी बड़ा है क्योंकि अब उन्हें यह तय करना है कि वे पुरानी टैक्स व्यवस्था में बने रहें या नई व्यवस्था में शिफ्ट हो जाएं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल से नई टैक्स व्यवस्था को चुनना ज्यादातर लोगों के लिए समझदारी भरा फैसला हो सकता है। इसमें न सिर्फ टैक्स बचाना आसान हो गया है बल्कि कागजी कार्रवाई का झंझट भी कम है। सरकार का मकसद टैक्स के सिस्टम को सरल बनाना है ताकि आम आदमी बिना किसी परेशानी के अपना रिटर्न फाइल कर सके और ज्यादा से ज्यादा बचत कर सके।
नई टैक्स व्यवस्था को अब और भी ज्यादा आकर्षक बना दिया गया है। सबसे बड़ी राहत उन लोगों के लिए है जिनकी सालाना कमाई 12.9 लाख रुपये तक है। सरकार ने इसमें मिलने वाले रिबेट और डिडक्शन को इस तरह सेट किया है कि 12.9 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसमें मिलने वाला 75,000 रुपये का फ्लैट स्टैंडर्ड डिडक्शन काफी मददगार साबित हो रहा है। मिसाल के तौर पर, अगर आपकी ग्रॉस सैलरी 12.75 लाख रुपये है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये रह जाएगी और रिबेट के चलते आपको एक पैसा भी टैक्स नहीं देना होगा। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो निवेश के झंझट में नहीं पड़ना चाहते।
नई व्यवस्था में सिर्फ टैक्स स्लैब ही नहीं बदले हैं, बल्कि कंपनी से मिलने वाले फायदों पर भी छूट बढ़ा दी गई है। अब कंपनियां अपने कर्मचारियों को साल में 15,000 रुपये तक के टैक्स-फ्री गिफ्ट या फेस्टिवल वाउचर दे सकेंगी, जो पहले सिर्फ 5,000 रुपये था। इसके अलावा, कर्मचारी अब एचआरए को रेंट-फ्री हाउसिंग में भी बदल सकते हैं। इसमें घर का एग्रीमेंट कंपनी के नाम पर होगा, जिससे टैक्स बचाने में बड़ी मदद मिलेगी। साथ ही, कंपनी की तरफ से दी जाने वाली गाड़ियों पर लगने वाले टैक्स को भी बेहतर तरीके से स्ट्रक्चर किया गया है। इससे कर्मचारी अपने फ्यूचर की बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे और हाथ में आने वाली सैलरी यानी टेक होम पे में बढ़ोतरी होगी।
जो लोग पुरानी टैक्स व्यवस्था में रहना चाहते हैं, उनके लिए भी सरकार ने कुछ अच्छी खबरें दी हैं। एचआरए छूट के लिए मेट्रो शहरों की लिस्ट बढ़ा दी गई है। अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई के साथ-साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50 पर्सेंट एचआरए छूट वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा, बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाला एजुकेशन अलाउंस अब 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है। हॉस्टल के खर्च पर मिलने वाली छूट भी अब 300 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये प्रति महीना हो गई है। यह उन पेरेंट्स के लिए बड़ी राहत है जिनके बच्चे बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था चुनने वालों को मील कार्ड्स यानी खाने-पीने के वाउचर पर भी बड़ी राहत मिली है। अब हर बार के खाने पर 200 रुपये तक का वाउचर टैक्स-फ्री होगा, जो पहले सिर्फ 50 रुपये था। इसके अलावा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक के निवेश और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर मिलने वाली छूट पहले की तरह ही जारी रहेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आपने मोटा निवेश किया हुआ है और आपके पास होम लोन या बड़े इंश्योरेंस प्रीमियम हैं, तो ही पुरानी व्यवस्था आपके लिए बेहतर है। लेकिन ज्यादातर सैलरी वाले लोगों के लिए नई व्यवस्था ही ज्यादा फायदेमंद और सरल साबित होने वाली है। अब यह पूरी तरह कर्मचारी पर निर्भर करता है कि वह अपनी इनकम के हिसाब से किस विकल्प को चुनता है।
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