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4 min read | अपडेटेड March 16, 2026, 10:57 IST
सारांश
शेयर बाजार में गिरावट के समय सही म्यूचुअल फंड चुनना बहुत जरूरी है। इंडेक्स फंड बाजार की चाल पर चलते हैं, जबकि फ्लैक्सी कैप में फंड मैनेजर को बदलाव की आजादी होती है। वहीं, मल्टी एसेट फंड गोल्ड और डेट में निवेश कर नुकसान को कम करते हैं।

गिरते बाजार में अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए सही फंड कैटेगरी का चुनाव करना बेहद जरूरी है।
शेयर बाजार में जब युद्ध की खबरें आती हैं, तो हर तरफ गिरावट का माहौल बन जाता है। ऐसे गिरते बाजार में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स असल में काम कैसे करते हैं। बिना यह जाने पैसा लगाना बिल्कुल वैसा ही है जैसे अंधेरे में तीर चलाना। निवेश की दुनिया में हर फंड का अपना एक अलग नेचर होता है और संकट के समय उनका व्यवहार भी बदल जाता है। आज हम इंडेक्स फंड, फ्लैक्सी कैप और मल्टी एसेट फंड के बीच के अंतर को समझेंगे ताकि आप अपने पोर्टफोलियो के लिए सही फैसला ले सकें।
सबसे पहले बात करते हैं इंडेक्स फंड की। इसे आप बाजार का 'मिरर इमेज' मान सकते हैं। यह फंड किसी इंडेक्स, जैसे निफ्टी या सेंसेक्स की नकल करता है। अगर निफ्टी 10 पर्सेंट गिरेगा, तो आपका इंडेक्स फंड भी लगभग उतना ही गिरेगा। इसमें फंड मैनेजर का कोई जादू नहीं चलता है क्योंकि वह सिर्फ इंडेक्स को फॉलो करता है। 13 मार्च तक के डेटा को देखें तो बाजार में आई 10% की गिरावट के बीच इंडेक्स फंड्स में लगभग 9 पर्सेंट की गिरावट आई है। यानी बाजार के साथ चढ़ना और बाजार के साथ गिरना ही इसकी असल फितरत है।
अब आते हैं फ्लैक्सी कैप फंड पर। यहां फंड मैनेजर के पास पूरी आजादी होती है कि वह निवेशकों का पैसा कहां लगाए। वह अपनी सूझबूझ से पैसा लार्ज कैप, मिड कैप या स्मॉल कैप कंपनियों में लगा सकता है। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर वह इक्विटी और डेट के बीच भी संतुलन बना सकता है। जब बाजार गिरने लगता है, तो एक स्मार्ट मैनेजर रिस्की छोटे शेयरों से पैसा निकालकर बड़ी और सुरक्षित कंपनियों में डाल देता है। इससे आपके पोर्टफोलियो को एक सुरक्षा कवच मिल जाता है और गिरावट का असर थोड़ा कम हो सकता है। अगर आप पिछले 1 महीने के डेटा को देखें तो पराग पारिख जैसे फ्लैक्सी कैप फंड में 4 फीसदी की ही गिरावट आई है।
मल्टी एसेट फंड इन सबसे बिल्कुल अलग तरीके से काम करता है। यह फंड सिर्फ शेयर बाजार यानी इक्विटी में पैसा नहीं लगाता। यह आपके पैसे को गोल्ड, चांदी जैसी कमोडिटी, डेट और यहां तक कि रियल एस्टेट में भी निवेश करता है। इतिहास गवाह है कि जब भी युद्ध की खबरों से शेयर बाजार गिरता है, तब सबसे ज्यादा चमक सोने में आती है। मल्टी एसेट फंड में सोने की मौजूदगी आपके नुकसान को काफी हद तक कम कर देती है। यही कारण है कि जहां इंडेक्स फंड 9 पर्सेंट टूटे हैं, वहीं मल्टी एसेट फंड में केवल 4 पर्सेंट के आसपास ही गिरावट देखी गई है।
अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर इनमें से बेस्ट कौन सा है। इसका जवाब आपके रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। अगर आप बाजार की पूरी हलचल को झेलने के लिए तैयार हैं और लंबी अवधि में मार्केट जैसा रिटर्न चाहते हैं, तो इंडेक्स फंड एक विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप अपने निवेश में स्थिरता चाहते हैं और रिस्क को बैलेंस करना चाहते हैं, तो मल्टी एसेट फंड एक बेहतर ढाल साबित हो सकता है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने फ्यूचर गोल और रिस्क उठाने की ताकत को जरूर पहचानें क्योंकि हर फंड का अपना अलग पैरामीटर होता है।
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