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  1. विरासत में मिले सोने से लेकर नई खरीदारी तक, गोल्ड पर टैक्स के ये नियम जानना है बेहद जरूरी

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विरासत में मिले सोने से लेकर नई खरीदारी तक, गोल्ड पर टैक्स के ये नियम जानना है बेहद जरूरी

Upstox

4 min read | अपडेटेड January 14, 2026, 16:03 IST

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सारांश

भारत में सोना केवल निवेश ही नहीं, बल्कि परंपरा का हिस्सा भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विरासत में मिले सोने और बाजार से खरीदे गए सोने पर टैक्स के नियम बिल्कुल अलग हैं? इनकम टैक्स विभाग ने सोने को रखने और उसे बेचने पर लगने वाले टैक्स को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं।

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सोने की खरीदारी पर टैक्स को लेकर अलग-अलग है नियम

भारतीय घरों में सोने का होना समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, सोना खरीदना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि घर में रखे सोने पर भी इनकम टैक्स विभाग की नजर होती है। चाहे वह सोना आपको विरासत में मिला हो, किसी ने उपहार में दिया हो या आपने खुद अपनी कमाई से खरीदा हो, इन सभी पर टैक्स के नियम अलग-अलग तरीके से लागू होते हैं। अगर आप अपना पुराना सोना बेचने जा रहे हैं या नई खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो टैक्स के इन नियमों को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है ताकि भविष्य में किसी कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

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विरासत में मिले सोने पर टैक्स का गणित

सबसे पहले बात करते हैं उस सोने की जो हमें विरासत में अपने दादा-दादी या माता-पिता से मिलता है। भारत में विरासत में मिली संपत्ति या सोने पर उसे प्राप्त करने के समय कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। यानी अगर आपको वसीयत के जरिए या विरासत में गहने मिले हैं, तो वह पूरी तरह से टैक्स फ्री हैं। हालांकि, असली खेल तब शुरू होता है जब आप इस विरासत में मिले सोने को बाजार में बेचने जाते हैं। जब आप इसे बेचते हैं, तो इस पर होने वाले फायदे को 'कैपिटल गेन' माना जाता है। टैक्स की गणना के लिए यह देखा जाता है कि वह सोना मूल रूप से कब खरीदा गया था। अगर सोना बेचने पर हुआ मुनाफा लॉन्ग टर्म की कैटेगरी में आता है, तो आपको तय दर से टैक्स चुकाना होगा।

नई खरीदारी और जीएसटी का बोझ

जब आप किसी ज्वेलर के पास जाकर नया सोना, गहने या सिक्के खरीदते हैं, तो आपको उसी समय टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। फिलहाल सोने की खरीद पर 3 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। इसके अलावा, अगर आप गहने बनवा रहे हैं, तो मेकिंग चार्जेस पर भी अलग से 5 प्रतिशत जीएसटी देना होता है। यह टैक्स खरीदारी के समय बिल में ही शामिल कर लिया जाता है। इसलिए हमेशा पक्का बिल लेना चाहिए ताकि आपके पास निवेश का कानूनी प्रमाण रहे। यदि आप बिना बिल के सोना खरीदते हैं, तो भविष्य में उसके सोर्स को साबित करना आपके लिए बहुत मुश्किल हो सकता है।

सोना बेचने पर लगने वाला कैपिटल गेन्स टैक्स

सोने को बेचने पर होने वाले मुनाफे को दो हिस्सों में बांटा गया है। अगर आपने सोना खरीदने के 24 महीने यानी दो साल के भीतर ही उसे बेच दिया है, तो इससे होने वाले फायदे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है। इस मुनाफे को आपकी कुल सालाना आय में जोड़ दिया जाता है और आप जिस टैक्स स्लैब में आते हैं, उसी के अनुसार आपको टैक्स देना होता है। वहीं, अगर आप सोने को दो साल से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचते हैं, तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत की दर से फ्लैट टैक्स लगता है। इसमें अब इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता है।

घर में कितना सोना रखना है कानूनी

इनकम टैक्स विभाग ने घर में सोना रखने की एक सीमा भी तय की है, जिसे बिना किसी इनकम प्रूफ के रखा जा सकता है। एक विवाहित महिला अपने पास 500 ग्राम तक सोना रख सकती है, जबकि अविवाहित महिला के लिए यह सीमा 250 ग्राम है। पुरुषों के लिए यह सीमा केवल 100 ग्राम तय की गई है। अगर आपके पास इस सीमा से ज्यादा सोना मिलता है, तो आपको उसका स्रोत या खरीदारी का बिल दिखाना पड़ सकता है। यदि आप अपनी आय के वैध स्रोतों से खरीदे गए सोने का प्रमाण दे सकते हैं, तो आप कितनी भी मात्रा में सोना अपने पास रख सकते हैं। टैक्स से जुड़ी इन बारीकियों को समझकर आप अपनी संपत्ति को सुरक्षित रख सकते हैं।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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