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3 min read | अपडेटेड January 14, 2026, 13:28 IST
सारांश
वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 6.3 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के बावजूद भारत की मजबूत घरेलू मांग और बढ़ता उपभोग अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

वर्ल्ड बैंक को है भारत के ग्रोथ पर भरोसा
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही पॉजिटिव खबर सामने आई है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी ताजा 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्टस' रिपोर्ट में भारत की विकास दर के अनुमान में बड़ी बढ़ोतरी की है। वर्ल्ड बैंक का मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रह सकती है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जून 2025 में इसी एजेंसी ने भारत की ग्रोथ का अनुमान महज 6.3 प्रतिशत जताया था। इस बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह है कि दुनिया भर में आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती बनाए हुए है और लगातार आगे बढ़ रही है।
इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात यह है कि वर्ल्ड बैंक ने अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए जाने वाले भारी-भरकम टैरिफ को भी ध्यान में रखा है। अमेरिकी सरकार ने भारत से होने वाले निर्यात पर करीब 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने की बात कही है। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि हालांकि इन टैरिफ से भारत के सामानों के निर्यात पर थोड़ा दबाव जरूर पड़ेगा, लेकिन भारत की मजबूत घरेलू मांग इस असर को काफी हद तक कम कर देगी। भारत के भीतर लोगों की खरीदारी करने की क्षमता और सर्विस के सेक्टर में शानदार प्रदर्शन देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने में ढाल का काम करेगा।
भारत की इस शानदार ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह देश की मजबूत घरेलू खपत को माना जा रहा है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, हाल ही में टैक्स में की गई कटौती और ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक आय में हुई बढ़ोतरी ने लोगों की जेब में पैसा पहुँचाया है। इससे बाजार में मांग बढ़ी है और उपभोग के पैटर्न में सुधार हुआ है। यही कारण है कि बाहरी झटकों के बाद भी भारतीय बाजार स्थिर नजर आ रहा है। इसके साथ ही भारत में गरीबी कम होने की दर में भी तेजी आने की उम्मीद जताई गई है, जो देश के समावेशी विकास का एक बड़ा संकेत है।
हालांकि वर्ल्ड बैंक ने एक चेतावनी भी दी है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर थोड़ी मध्यम होकर 6.5 प्रतिशत पर आ सकती है। इसका कारण यह माना जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ का पूरा असर उस समय तक साफ दिखने लगेगा। इसके बावजूद दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत की स्थिति सबसे मजबूत बनी रहेगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत को छोड़कर इस क्षेत्र के अन्य देशों की औसत विकास दर 2026 में 5 प्रतिशत के आसपास ही रहेगी। भारत का बढ़ता सेवा निर्यात और घरेलू निवेश इसे अन्य देशों के मुकाबले काफी आगे रखता है।
वर्ल्ड बैंक ने भारत के राजकोषीय घाटे और खर्च के दबाव को लेकर भी कुछ चिंताएं जताई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार राजकोषीय मजबूती की दिशा में कदम उठा रही है और धीरे-धीरे घाटे को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। अगर भारत अपनी राजकोषीय मजबूती के प्रयासों को जारी रखता है और बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाता है, तो लंबे समय तक उच्च विकास दर को बनाए रखा जा सकता है। कुल मिलाकर, वर्ल्ड बैंक की यह रिपोर्ट भारत के आर्थिक भविष्य पर दुनिया के बढ़ते भरोसे को दिखाती है।
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