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12 min read | अपडेटेड February 01, 2026, 12:37 IST
सारांश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना नौवां बजट पेश कर दिया है। इस बार के बजट 2026 में विदेशी यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत दी गई है। अब विदेशी टूर पैकेज खरीदने पर लगने वाली TCS दर को 5-20% की पुरानी रेंज से घटाकर केवल 2% कर दिया गया है।

टैक्स स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं
ट्रेडर्स के लिए बजट से एक बड़ी खबर आ रही है। वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। अब फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम पर इसे 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। सरकार के इस कदम का मकसद डेरिवेटिव मार्केट में बढ़ती सट्टेबाजी को कम करना और इसे रेग्युलेट करना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टैक्सपेयर्स को बड़ा अपडेट देते हुए एलान किया है कि इनकम टैक्स स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि पुराने और नए, दोनों ही टैक्स रिजीम में टैक्स की दरें पहले जैसी ही बनी रहेंगी। हालांकि मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोग इस बार स्लैब में राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन सरकार ने मौजूदा स्ट्रक्चर को ही बरकरार रखने का फैसला किया है।
बजट 2026 में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए क्लाउड सर्विसेज वाली कंपनियों को बड़ी राहत देने की तैयारी है। वित्त मंत्री ने प्रस्ताव दिया है कि 2027 से ऐसी कंपनियों को विशेष टैक्स छूट दी जाएगी, जिससे भारत को एक ग्लोबल डिजिटल हब बनाया जा सके।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि अब भारत के बाहर रहने वाले व्यक्ति यानी PROI पोर्टफोलियो निवेश योजना के जरिए लिस्टेड भारतीय कंपनियों में सीधे इक्विटी निवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही ऐसे निवेशकों के लिए निवेश की सीमा को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार ने कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर आधारित फंड्स और डेरिवेटिव्स तक पहुंच बनाने के लिए एक नया ढांचा तैयार करने की भी बात कही है।
बजट 2026 में यह साफ कर दिया गया है कि दुर्घटना से संबंधित किसी भी तरह के क्लेम या मुआवजे पर इनकम टैक्स नहीं लगेगा। पीड़ितों और उनके परिवारों को मिलने वाली यह राहत पहले की तरह बरकरार रहेगी। चाहे बीमा पॉलिसी से मिला पैसा हो, कोर्ट का कोई फैसला हो या नौकरी के दौरान चोट, विकलांगता या मृत्यु होने पर एंप्लॉयर की ओर से मिला मुआवजा, इसे टैक्स योग्य आय नहीं माना जाएगा।
इनकम टैक्स रिटर्न को रिवाइज करने की आखिरी तारीख अब बदल दी गई है। पहले जहां गलतियों को सुधारने के लिए 31 दिसंबर तक का समय मिलता था, उसे अब बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। इस बदलाव से टैक्सपेयर्स को 3 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा, ताकि वे अपनी फाइल की गई रिटर्न में किसी भी तरह की गलती को सुधार सकें या छूटी हुई जानकारी को अपडेट कर सकें।
बजट 2026 में विदेशी यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत दी गई है। अब विदेशी टूर पैकेज खरीदने पर लगने वाली TCS दर को 5-20% की पुरानी रेंज से घटाकर केवल 2% कर दिया गया है। इसके अलावा पढ़ाई के लिए विदेश पैसे भेजने यानी LRS पर लगने वाले TDS में भी कटौती की गई है। सरकार के इस कदम से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं या जो लोग विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना 9वां बजट भाषण शुरू कर दिया है। इस बार बजट रविवार को पेश होकर इतिहास रच रहा है। भाषण के शुरुआती हिस्से में सरकार ने रिफॉर्म्स और 'विकसित भारत' के संकल्प पर जोर दिया है। नौकरीपेशा लोगों, सीनियर सिटीजन्स और फ्रीलांसर्स के लिए टैक्स से जुड़ी मुख्य घोषणाएं भाषण के आखिरी हिस्से में होने की उम्मीद है। फिलहाल सबकी नजरें स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी, नए टैक्स रिजीम में सुधार और सीनियर सिटीजन्स को मिलने वाली राहतों पर टिकी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 की वजह से इस बार कई नियमों को सरल बनाया जा सकता है।
सेक्शन 80D के तहत टैक्सपेयर्स खुद, अपने परिवार और माता-पिता के लिए चुकाए गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। फिलहाल यह छूट सिर्फ पुराने टैक्स रिजीम में मिलती है, जहां इसकी सीमा उम्र के हिसाब से 25,000 से 1,00,000 के बीच होती है। बजट 2026 में मेडिकल महंगाई को देखते हुए एक्सपर्ट्स मांग कर रहे हैं कि सामान्य नागरिकों के लिए इस लिमिट को 25,000 से बढ़ाकर 50,000 और सीनियर सिटीजन्स के लिए 50,000 से बढ़ाकर 1,00,000 किया जाए। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि इस बार सरकार नए टैक्स रिजीम में भी 80D के तहत सीमित छूट देने पर विचार कर सकती है।
टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि पिछले साल की तरह इस बार भी इनकम टैक्स स्लैब में मिडिल क्लास के लिए बड़े एलान होंगे। मौजूदा वैश्विक हालातों के बीच यह बजट भारत की 'सॉफ्ट पावर' वाली छवि और दूसरे देशों से रिश्तों के लिए काफी अहम माना जा रहा है, खासकर 27 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ के साथ हुए ऐतिहासिक ट्रेड डील के बाद। घरेलू मोर्चे पर सरकार का पूरा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग इंडस्ट्री पर है। इस क्षेत्र के लिए 70,000 करोड़ के बड़े पैकेज और जहाजों को 'इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस' मिलने की चर्चा है, जिससे विदेशी जहाजों पर भारत की निर्भरता कम होगी और देश एक ग्लोबल मैरीटाइम हब के रूप में उभरेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जल्द ही अपना 9वां बजट पेश करने वाली हैं, जिससे मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को काफी उम्मीदें हैं। टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि नए टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जाए और होम लोन के ब्याज व लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर भी राहत मिले। पिछले साल सरकार ने 12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करने का बड़ा एलान किया था, लेकिन इस बार टैक्सपेयर्स की मांग है कि 30% वाले सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब की शुरुआत 24 लाख की बजाय 30 लाख की सालाना आय से की जाए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन बदलावों से लोगों की बचत बढ़ेगी और उन्हें महंगाई से लड़ने में मदद मिलेगी।
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 16 के तहत मिलने वाला स्टैंडर्ड डिडक्शन अब नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के सेक्शन 19 में शामिल किया गया है। बजट भाषण से पहले दोनों टैक्स रिजीम में इस लिमिट को बढ़ाने की पुरजोर मांग हो रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती महंगाई और रहने-खाने के खर्चों को देखते हुए यह बदलाव जरूरी है। KPMG के मुताबिक बजट 2026 में सरकार इसे बढ़ाकर 1 लाख करने पर विचार कर सकती है, जो फिलहाल पुराने रिजीम में 50,000 और नए रिजीम में 75,000 है।
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस साल टैक्स नियमों में बहुत बड़े बदलाव करने से बच सकती हैं, लेकिन फिर भी टैक्सपेयर्स को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। बजट भाषण से जुड़ी 5 प्रमुख मांगों में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाना और NPS में राहत देना शामिल है। इसके अलावा प्रोफेशनल्स के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन को आसान बनाने, नए टैक्स रिजीम में होम लोन पर छूट देने, HRA में राहत और सीनियर सिटीजन्स के लिए खास रियायतों की उम्मीद की जा रही है। ये बदलाव आम आदमी की जेब पर टैक्स का बोझ कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स इस बार कई तरह की छूट और डिडक्शन की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जिसमें सबसे खास स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा में बढ़ोतरी है। फिलहाल यह सीमा 75,000 है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में नए टैक्स स्लैब के तहत इसे बढ़ाकर 1 लाख किया जा सकता है। अगर सरकार यह कदम उठाती है, तो इससे सैलरीड क्लास के हाथों में खर्च के लिए ज्यादा पैसा बचेगा और टैक्स का बोझ भी कम होगा।
पुराने और नए टैक्स रिजीम में टैक्स की दरें काफी अलग हैं। पुराने रिजीम में 2,50,000 तक की कमाई टैक्स फ्री है, जबकि 2,50,001 से 5,00,000 पर 5%, 5,00,001 से 10,00,000 पर 20% और 10,00,000 से ज्यादा की कमाई पर 30% टैक्स लगता है। दूसरी तरफ नए टैक्स रिजीम में 4 लाख तक कोई टैक्स नहीं है। इसके बाद 4 से 8 लाख पर 5%, 8 से 12 लाख पर 10%, 12 से 16 लाख पर 15%, 16 से 20 लाख पर 20%, 20 से 24 लाख पर 25% और 24 लाख से ऊपर की इनकम पर 30% टैक्स चुकाना होता है।
STT यानी सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, डेरिवेटिव्स और म्यूचुअल फंड यूनिट्स की खरीद या बिक्री पर लगाया जाता है। इसे हर ट्रांजैक्शन पर वसूलने का मुख्य मकसद कैपिटल गेन्स पर होने वाली टैक्स चोरी को रोकना है। पिछले बजट में सरकार ने ऑप्शंस पर STT बढ़ाकर ऑप्शन प्रीमियम का 0.1% कर दिया था, वहीं फ्यूचर्स ट्रेड पर इसे बढ़ाकर ट्रेड वैल्यू का 0.02% कर दिया गया, जिससे ट्रेडिंग की कुल लागत बढ़ गई है।
बजट 2014 के बाद से सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली 1.5 लाख की छूट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि यह फायदा सिर्फ पुराने टैक्स रिजीम में मिलता है, जिसे अब धीरे-धीरे हटाया जा रहा है, फिर भी बहुत से लोग सालों से इसका लाभ उठा रहे हैं। बजट 2026 में टैक्सपेयर्स और एक्सपर्ट्स ने सरकार से मांग की है कि इस लिमिट को 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर दिया जाए। कुछ जानकारों का तो यह भी मानना है कि इसे 3.5 लाख तक ले जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस कदम से लोगों में बचत करने की आदत बढ़ेगी और पिछले कुछ सालों में घरों की घटती बचत में सुधार आएगा।
बजट से ठीक एक दिन पहले भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने निवेश पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इक्विटी निवेश और बैंक डिपॉजिट से होने वाली कमाई पर टैक्स की दरें समान होनी चाहिए। शेट्टी के मुताबिक दुनिया में कहीं भी टैक्स को लेकर ऐसा भेदभाव नहीं देखा जाता है और अब समय आ गया है कि भारत भी वैश्विक बाजारों के साथ तालमेल बिठाए। उन्होंने तर्क दिया कि वित्तीय बचत के सभी साधनों के लिए बाजार में एक समान अवसर होने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सरकार के सामने राजकोषीय सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन आज के दौर में जब लोग जोखिम भरे शेयर बाजार में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, तो इक्विटी को मिलने वाली विशेष छूट की जरूरत शायद अब नहीं है।
निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश करने जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि व्यक्तिगत आयकर के मोर्चे पर शायद इस बार बहुत बड़े बदलाव न हों, क्योंकि पिछले बजट में पहले ही टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी गई थी। पिछले बजट में नई टैक्स व्यवस्था के तहत बारह लाख रुपये तक की आय वाले लोगों के लिए जीरो टैक्स का प्रावधान किया गया था। यह एक अभूतपूर्व कदम था जिसने लाखों लोगों को टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया था। इस बार सरकार का ध्यान मौजूदा नियमों को और बेहतर बनाने और टैक्स प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर हो सकता है।
इस बजट में वित्त मंत्री के पास इनकम टैक्स एक्ट की धारा सत्तासी-ए के तहत मिलने वाली छूट को और भी सटीक बनाने का मौका है। वर्तमान में एक बड़ी समस्या यह है कि अगर किसी व्यक्ति की कुल आय बारह लाख रुपये से कम भी है, तो भी उसे इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर टैक्स रिबेट का लाभ नहीं मिलता है। यह सरकार के उस उद्देश्य के विपरीत है जिसमें बारह लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करने की बात कही गई थी। टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि इस विसंगति को दूर किया जाएगा ताकि शेयर बाजार से होने वाली छोटी कमाई पर भी उन्हें राहत मिल सके।
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