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4 min read | अपडेटेड June 16, 2025, 14:00 IST
सारांश
Government Bonds को सॉवरेन बॉन्ड या ट्रेजरी के रूप में भी जाना जाता है। इसे सरकार द्वारा अलग-अलग जरूरतों के लिए फंड जुटाने के मकसद से जारी किया जाता है। आसान शब्दों में, इसके जरिए सरकार निवेशकों से पैसे उधार लेती है और बदले में उन्हें समय-समय पर ब्याज देती है।

Government Bonds: विदेशी निवेशकों के साथ ही घरेलू निवेशकों के लिए भी यह निवेश का भरोसेमंद विकल्प है।
सरकारी बॉन्ड को सॉवरेन बॉन्ड या ट्रेजरी के रूप में भी जाना जाता है। इसे सरकार द्वारा अलग-अलग जरूरतों के लिए फंड जुटाने के मकसद से जारी किया जाता है। आसान शब्दों में, इसके जरिए सरकार निवेशकों से पैसे उधार लेती है और बदले में उन्हें समय-समय पर ब्याज देती है। इसके साथ ही निवेशकों को मैच्योरिटी पर मूल राशि वापस मिल जाती है।
जब सरकार नए बॉन्ड जारी करती है, तो वो उनकी नीलामी करती है। इसमें सीधे निवेश किया जा सकता है। ज़्यादातर बैंक आपको सरकारी बॉन्ड खरीदने की सुविधा देते हैं। आप अपने बैंक ब्रांच जाकर या उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बोली लगा सकते हैं।
प्राइमरी डीलर भी वो वित्तीय संस्थाएं हैं जिन्हें RBI ने सरकारी बॉन्ड की नीलामी में हिस्सा लेने की अनुमति दी है। आम लोग इनके माध्यम से सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं।
इसके अलावा, आप NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) या BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के जरिए भी बोली लगा सकते हैं। इसके लिए आपको एक ट्रेडिंग अकाउंट चाहिए होता है।
जब बॉन्ड एक बार जारी हो जाते हैं, तो वे शेयर बाजार में खरीदे-बेचे जा सकते हैं। शेयर बाजार के जरिए आप NSE या BSE में अपने ट्रेडिंग अकाउंट से इन बॉन्ड्स को खरीद सकते हैं। कुछ बैंक और वित्तीय संस्थान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी यह सुविधा देते हैं। अगर आप सीधे बॉन्ड नहीं खरीदना चाहते, तो आप ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं जो सरकारी बॉन्ड्स में पैसा लगाते हैं।
RBI ने आम लोगों के लिए "Retail Direct" सुविधा शुरू की है। इसके जरिए कोई भी व्यक्ति सीधे सरकारी बॉन्ड्स की नीलामी में भाग ले सकता है। इसके लिए RBI की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होता है।
ये लंबे समय के लिए होते हैं, जैसे 91 दिन से लेकर 40 साल तक। हर 6 महीने में ब्याज मिलता है। इसे सुरक्षित निवेश माने जाता है।
ये शॉर्ट टर्म के लिए सरकारी बॉन्ड होते हैं। इसका पीरियड 91, 182 या 364 दिन तक हो सकता है। ये कम कीमत पर मिलते हैं और मेच्योर होने पर पूरा पैसा वापस मिलता है।
ये बॉन्ड सोने में निवेश का विकल्प हैं, लेकिन इसमें सोना हाथ में नहीं होता। हर साल ब्याज मिलता है और अंत में सोने की कीमत के हिसाब से पैसे मिलते हैं। हालांकि, सरकार ने इसे हाल ही में बंद करने का फैसला किया है।
राज्य सरकारें विकास के लिए ये बॉन्ड जारी करती हैं। हर राज्य के अलग-अलग ब्याज दर और अवधि होती है।
इन बॉन्ड्स का ब्याज दर बदलती रहती है। बाजार के हिसाब से ऊपर-नीचे हो सकती है।
इनका ब्याज दर तय होता है और टैक्स के दायरे में आता है।
RBI की वेबसाइट पर इस अकाउंट को खोलकर आप सीधे सरकारी बॉन्ड्स खरीद सकते हैं।
ये बॉन्ड स्पेसिफाइड एंटिटी द्वारा जारी किए जाते हैं और इनमें निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 54EC के तहत कर लाभ मिल सकता है। प्रॉपर्टी जैसी एसेट्स की बिक्री से होने वाले कैपिटल गेन को कर बचाने के लिए इन बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है।
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